संपादकीय
इंदौर को प्रदेश की आर्थिक राजधानी, स्वच्छता में अव्वल और विकास का मॉडल शहर कहा जाता रहा है। लेकिन सवाल यह है कि क्या यह शहर अब भी आम नागरिक के लिए सुरक्षित है? या फिर यह धीरे-धीरे गुंडागर्दी, लापरवाही और कानून व्यवस्था की ढिलाई का प्रतीक बनता जा रहा है?
तब यह उम्मीद स्वाभाविक है कि इंदौर कानून-व्यवस्था के मामले में आदर्श बनेगा। लेकिन जमीनी हकीकत इससे बिल्कुल उलट नजर आ रही है। शहर में अपराधियों के हौसले इतने बुलंद हो चुके हैं कि वे खुलेआम चाकू लहराते हैं, राह चलते लोगों को डराते हैं और दिनदहाड़े लूट की कोशिश करते हैं।
सीएम डॉ. मोहन यादव के सपनों का शहर इंदौर है और लगभग सप्ताह में एक दिन वे यहां आते ही हैं। ऐसा भी नहीं है कि उन्हें इंदौर का क्राइम रेट पता न हो, लेकिन जहां कानून का राज होना चाहिए, वहां गुंडाराज दिखाई दे रहा है। इंदौर में गुंडागर्दी इतनी बढ़ गई है कि खुलेआम बदमाश लोगों पर चाकू से हमले कर रहे हैं। दोपहिया वाहनों पर मुंह पर कपड़ा या नकाब पहनकर बदमाश वारदात कर रहे हैं, लेकिन इन्हें रोकने के लिए पुलिस कोई सख्ती नहीं करती। हां, सख्ती पुलिस की रात में शराब पीकर वाहन चलाने वालों पर जरूर नजर आती है, क्योंकि इस कार्रवाई से राजस्व मिलता है। लेकिन जहां आम नागरिक बदमाशों की वजह से घायल हो रहा है, उस दिशा में पुलिस की सक्रियता नजर नहीं आती। गुंडे खुलेआम चाकू दिखाकर लोगों को डरा रहे हैं। हाल ही में हीरानगर थाना क्षेत्र के कारसदेव नगर मेन रोड पर सुबह 6 बजे एक इंजीनियर को चाकू दिखाकर लूटने की कोशिश की गई। इंजीनियर ने भागकर अपनी जान बचाई। बांगड़दा क्षेत्र में उज्जैन से एक परिवार अपने रिश्तेदार को शादी का निमंत्रण देने आया था। एक बदमाश ने डंडे के दम पर उन्हें धमकाया और कार के कांच फोड़ने पर उतारू हो गया। परिवार के लोग हाथ जोड़ते रहे, लेकिन वह धमकाता ही रहा। इसके बाद राजेंद्र नगर सब्जी मंडी में एक बदमाश खुलेआम चाकू लहराते हुए धमकी देता नजर आया। कुल मिलाकर इंदौर में कानून व्यवस्था चरमरा गई है। चाहे ट्रैफिक पुलिस हो या थाना पुलिस, दोनों ही गुंडे-बदमाशों के आगे पंगु नजर आ रहे हैं। धुरंधर हो चुके गुंडे बड़े-बड़े बाल और दाढ़ी बढ़ाकर लोगों को धमका रहे हैं। ये लोग पुलिस के सामने ही दोपहिया वाहन गलत दिशा में चलाते हैं और नियमों का पालन करने वाले वाहन चालकों से अड़बाजी करते नजर आते हैं। लेफ्ट टर्न पर भी दोपहिया वाहन चालक अतिक्रमण कर खड़े रहते हैं। वहीं इंदौर के ब्रिजों पर गलत दिशा में दौड़ते वाहन और खुलेआम नियमों की धज्जियां उड़ाते लोग- इन पर कोई ठोस कार्रवाई न होना इस बात का संकेत है कि व्यवस्था कमजोर पड़ चुकी है। जब गुंडे सड़क पर कानून तय करने लगें और ईमानदार नागरिक खुद को असुरक्षित महसूस करे, तो यह सिर्फ कानून-व्यवस्था की नहीं, बल्कि शासन की विश्वसनीयता की भी हार होती है।
दुखद पहलू यह भी है कि इंदौर में 9 विधायक हैं, लेकिन वे सरकारी योजनाओं के प्रचार-प्रसार में व्यस्त नजर आते हैं। शहर की जनता, जो ट्रैफिक और सुरक्षा को लेकर परेशान है, उसकी ओर ध्यान नहीं दिया जा रहा। उन्हें ये समस्याएं सिर्फ चुनाव के दौरान ही नजर आती हैं।
-जगजीतसिंह भाटिया
प्रधान संपादक

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