अमेरिका और इजराइल लगातार ईरान पर हमले कर रहे हैं। वहीं ईरान भी इन हमलों का जवाब पूरी ताकत से दे रहा है। यह संघर्ष अब दुनिया को एक ऐसे मोड़ पर ले आया है, जहां हालात और ज्यादा गंभीर होते दिख रहे हैं।
पिछले एक साल में अमेरिका-इजराइल की ओर से ईरान पर बड़े हमले किए गए, जिनका उद्देश्य उसकी परमाणु क्षमता को कमजोर करना बताया गया। बीते कुछ हफ्तों से ईरान में सैन्य गतिविधियां लगातार जारी हैं।
विशेषज्ञों का मानना है कि इस संघर्ष ने वैश्विक स्तर पर परमाणु हथियारों की होड़ को फिर से तेज कर दिया है। कई देशों में अब अपनी सुरक्षा नीतियों को लेकर नए सिरे से चर्चा शुरू हो गई है। कुछ देश अब यह भी सोचने लगे हैं कि क्या उन्हें अपनी सुरक्षा के लिए दूसरों पर निर्भर रहना चाहिए या खुद मजबूत बनना चाहिए।
यूरोप में कुछ देश सामूहिक सुरक्षा व्यवस्था पर पुनर्विचार कर रहे हैं, वहीं एशिया में भी सुरक्षा को लेकर चिंताएं बढ़ी हैं। बदलते वैश्विक हालात के बीच कई देश अपनी रणनीति को लेकर नए विकल्प तलाश रहे हैं।
रिपोर्ट्स के अनुसार, कुछ बड़े देश भी अपनी सैन्य क्षमताओं को फिर से मजबूत करने के संकेत दे रहे हैं। वहीं मध्य-पूर्व में भी तनाव बढ़ने से क्षेत्रीय संतुलन प्रभावित हो रहा है।
अंतरराष्ट्रीय परमाणु निगरानी संस्था के प्रमुख ने चेतावनी दी है कि यदि ज्यादा देशों के पास परमाणु हथियार पहुंचते हैं, तो वैश्विक सुरक्षा और भी खतरे में पड़ सकती है।
विशेषज्ञों का कहना है कि अगर देशों का भरोसा सामूहिक सुरक्षा व्यवस्था से उठता है, तो वे अपनी रक्षा के लिए बड़े और खतरनाक हथियारों की ओर बढ़ सकते हैं। मौजूदा हालात ने उस अंतरराष्ट्रीय व्यवस्था पर भी सवाल खड़े कर दिए हैं, जिसका उद्देश्य परमाणु हथियारों के प्रसार को रोकना था।

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