मध्यप्रदेश में रिश्वतखोरी और भ्रष्टाचार की जुगलबंदी कथित अफसरों की मिलीभगत से चल रही है। जवाबदेही लगातार इस बात को प्रमुखता से प्रकाशित करता आ रहा है कि सरकारी विभागों में भले ही पोस्टर-बैनर चस्पा किए गए हों कि रिश्वत देना और लेना दोनों अपराध है, लेकिन हकीकत यह है कि रिश्वत तो ली ही जाती है.., पोस्टर-बैनर नियमों की मर्यादा और कानून का पालन हो रहा है, ऐसा दर्शान के लिए लगाए जाते हैं। यहां तक की कई सरकारी विभागों में तो सीसीटीवी कैमरे भी लगे है, ताकि पारदर्शिता होती है यह दिखाई दे, लेकिन ऐसा होता नहीं है। इधर, इस सप्ताह सुप्रीम कोर्ट की जस्टिस बीवी नागरत्ना ने एक कार्यक्रम में अदालतों में जजों के आचरण को लेकर अहम बातें कही हैं। न्यायपालिका में ईमानदारी के मुद्दे पर टिप्पणी करते हुए उन्होंने कहा कि जो जज लालच का शिकार हो जाते हैं, उनका सिस्टम में कोई स्थान नहीं है और उन्हें हटा दिया जाना चाहिए।
कार्यक्रम में लोगों को संबोधित करते हुए जस्टिस नागरत्ना ने कहा कि वेतन आयोग की सिफारिशों के लागू होने के बाद आज ज्यूडिशियरी में शामिल अधिकारियों को बहुत अच्छा वेतन और सेवा शर्तें मिल रही हैं, इसलिए किसी भी तरह का अनैतिक आचरण अपनाना सही नहीं है। उन्होंने कहा कि अगर कोई जज लालच में आ जाता है, तो उसे सिस्टम से ही हटा दिया जाना चाहिए। उन्होंने कहा कि एक जज को अपने वैध वेतन में खुश रहना चाहिए और किसी भी तरह के प्रलोभन से बचना चाहिए। उन्होंने कहा कि ऐसा न कर पाना न्याय प्रणाली की बुनियाद को कमजोर करता है। उन्होंने यह भी कहा कि न्यायिक स्वतंत्रता केवल बाहरी दबावों से मुक्त होने तक सीमित नहीं है, बल्कि इसमें आंतरिक अनुशासन और ईमानदारी बनाए रखना भी शामिल है।
दरअसल, जस्टिस बीवी नागरत्ना की यह बात सभी अफसरों पर लागू होती है कि वो अपने वेतन में खुश रहे और देश को एक साफ और स्वच्छ और भ्रष्टाचार मुक्त वातावरण दे, लेकिन ऐसा हो नहीं रहा है। उक्त बातें सिर्फ जजों पर ही नहीं, बल्कि सरकारी विभाग के हर अफसर पर लागू होती है, जो रिश्वतखोरी के साथ भ्रष्टाचार कर रहा है।
जस्टिस नागरत्ना का ये संदेश हर भ्रष्टाचारी के लिए है, अकेले जज ही लालची नहीं है, बल्कि सरकारी विभागों में कई कथित अफसर है, जो नौकरी सिर्फ घूसखोरी के लिए कर रहे हैं। सरकारी तन्ख्वाह एक लाख का आंकड़ा तक पार कर रही है, सरकारी बंगला, गाड़ी, सेवक सब कुछ है, लेकिन फिर भी उनका मोह बेईमानी और भ्रष्टाचार करके रुपया कमाना बन गया है...।
भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम के तहत केस दर्ज
आरोपियों के विरुद्ध भ्रष्टाचार निवारण (संशोधन) अधिनियम, 2018 की धारा 7 एवं भारतीय न्याय संहिता (BNS), 2023 की धारा 61(2) के तहत प्रकरण दर्ज कर कार्रवाई जारी है। ट्रैप टीम में टीआई आशुतोष मिठास, प्रतिभा तोमर और विवेक मिश्रा सहित अन्य सदस्य शामिल थे। यह कार्रवाई लोकायुक्त के महानिदेशक योगेश देशमुख और उप पुलिस महानिरीक्षक मनोज कुमार सिंह के निर्देश पर की गई।
4 महीने में कुल 15 घूसखोर पकड़े : इस साल के शुरुआती चार महीनों में ही लोकायुक्त ने 15 घूसखोरों को रंगेहाथ रिश्वत लेते पकड़ा है। सबसे ज्यादा तीन-तीन ट्रैप खरगोन, झाबुआ में किए गए हैं। इंदौर जिले में भी तीन ट्रैप किए जा चुके।
पहले से ही बदनाम है पीडब्ल्यूडी विभाग
तीन अफसर रिश्वत लेते पकड़ाए
बिल के बदले मांगे थे 3.50 लाख
इंदौर में लोक निर्माण विभाग (पीडब्ल्यूडी) के तीन अधिकारी मंगलवार 21 अप्रैल को रिश्वत लेते हुए पकड़ाए हैं। पकड़े गए अधिकारियों के नाम जयदेव गौतम (कार्यपालन यंत्री, संभाग-1, इंदौर), टीके जैन (अनुविभागीय अधिकारी, पीडब्ल्यूडी संभाग-1) और अंशु दुबे (उपयंत्री, संभाग-1, इंदौर) हैं।
लोकायुक्त टीम ने आरोपी जयदेव गौतम को उनके शासकीय निवास से 1.50 लाख रुपए की रिश्वत लेते हुए पकड़ा है। जबकि टीके जैन को कार्यालय परिसर के पोर्च के नीचे से 1 लाख रुपए लेते हुए रंगे हाथ गिरफ्तार किया गया। आरोपी अंशु दुबे ने भी 1 लाख रुपए की मांग की थी, लेकिन कम राशि उपलब्ध होने के कारण उसने रकम नहीं ली। इस प्रकार कुल 2.50 लाख रुपए की राशि जब्त की गई है।
4.51 करोड़ रुपए में पूरा किया था काम
पटेल इंटरप्राइजेस संचालक राजपाल सिंह पंवार एक शासकीय ठेकेदार हैं। वे धार के निवासी हैं और वर्ष 2023 में उनकी फर्म ने मैथवाड़ा फोरलेन पहुंच मार्ग का कार्य 4.73 करोड़ रुपए में लिया था, जिसे 4.51 करोड़ रुपए में पूरा किया गया। अंतिम बिल भुगतान के बदले अधिकारियों ने 3.50 लाख रुपए की रिश्वत मांगने की शिकायत लोकायुक्त कार्यालय इंदौर में की थी। सत्यापन में शिकायत सही पाए जाने के बाद एसपी राजेश सहाय ने इसके लिए एक ट्रैप टीम गठित की जिसने मंगलवार को कार्रवाई की गई।
इधर, पुलिस भी कम नहीं पड़ रही
5 पुलिसकर्मियों ने व्यापारी के घर से 36 लाख का सोना किया चोरी?
इंदौर। पांच पुलिसकर्मियों को एक व्यवसायी के घर में कथित तौर पर घुसकर 20 तोला सोना और 36 लाख रुपए मूल्य के चांदी के बर्तन चुराने के आरोप में निलंबित कर दिया गया है। पुलिस अधिकारियों के अनुसार, यह घटना 1 अप्रैल की रात की है। पुलिस टीम चेक बाउंस मामले के सिलसिले में व्यवसायी के घर पहुंची थी। व्यवसायी गौरव जैन ने आरोप लगाया है कि पुलिसकर्मियों ने दरवाजा तोड़ दिया, उनके परिवार के सदस्यों के साथ दुर्व्यवहार किया और सोने-चांदी के गहने व चांदी के बर्तन लेकर फरार हो गए। अतिरिक्त पुलिस उपायुक्त अमरेंद्र सिंह ने बताया कि निलंबित पुलिसकर्मियों में संजय बिश्नोई, प्रवीण भदौरिया, दिनेश जाट, रविंद्र कुशवाहा और एक हेड कांस्टेबल शामिल हैं। जैन ने आरोप लगाया है कि पुलिस अधिकारियों ने सीसीटीवी कैमरे बंद करके और मास्टर चाबी से ताले खोलकर चोरों की तरह उनके घर में प्रवेश किया। उन्होंने अपनी शिकायत में यह भी कहा है कि पुलिसकर्मियों के पास वारंट नहीं था और उन्होंने घर के सामान को भी नुकसान पहुंचाया।
सरकारी राशि के गबन में चपरासी
अतिथि शिक्षकों के साथ सहायक संचालक और प्राचार्य तक फंसे
इंदौर। स्कूली शिक्षा विभाग में लगभग ढाई करोड़ रुपए का जो गबन पकड़ाया, उसकी जांच कलेक्टर द्वारा करवाई गई और जिला पंचायत सीईओ सिद्धार्थ जैन ने कमेटी बनाकर जांच करवाई तो पता चला कि विभाग के चपरासी से लेकर अतिथि शिक्षक और यहां तक कि सहायक संचालक और प्राचार्य तक इसमें लिप्त हैं। अलग-अलग निजी खातों में यह सरकारी राशि जमा कराई गई। हालांकि कुछ राशि की वसूली भी हुई है। अब इसमें लिप्त सभी लोगों की विभागीय जांच के साथ-साथ एफआईआर भी दर्ज कराई जा रही है। इसमें मुख्य रूप से सिद्धार्थ जोशी नामक चपरासी की भूमिका सामने आई है।
यह गड़बड़ी 2017 से लेकर 2022 के बीच की गई और इसमें से कुछ कर्मचारी सेवानिवृत्त भी हो गए हैं। अभी जिन 5 आरोपियों के खिलाफ एफआईआर दर्ज करवाना है उसमें चपरासी सिद्धार्थ जोशी प्रमुख है, जिसने अपनी पत्नी-पुत्र और अन्य परिजनों के 8 खातों में लगभग पौने 2 करोड़ रुपए से अधिक की राशि जमा करा दी। 1 करोड़ 75 लाख 62,277 रुपए की वसूली जोशी से होगी।
सरकारी राशि के गबन में चपरासी
एक अतिथि शिक्षक मोहन डांगी के खाते में 8 लाख 41 हजार 390 रुपए जमा हुए, तो एक अन्य चपरासी पवन खामोद के खाते में 32800 रुपए, वहीं सहायक ग्रेड-2 छोटेलाल गौड़, जिनकी मृत्यु 14.10.2023 को हो चुकी है, के खाते में 1 लाख 16 हजार 750 रुपए जमा हुए। इसी तरह पांचवें आरोपी अतिथि शिक्षक केदार नारायण दीक्षित के खाते में 16 लाख 66 हजार 259 रुपए जमा हुए। इस तरह इन पांच खातों में 2 करोड़ 2 लाख 19 हजार 476 रुपए की राशि जमा हुई, जबकि लगभग 25 लाख रुपए की राशि वसूल भी हो चुकी है। जिला पंचायत सीईओ सिद्धार्थ जैन के मुताबिक, इस पूरे मामले की जांच कमेटी बनाकर करवाई गई, जिसमें 5 आरोपी तो तय हुए।
वहीं अन्य जिम्मेदार अधिकारियों के खिलाफ भी विभागीय जांच कराई जा रही है, क्योंकि उनके लॉग इन पासवर्ड का उपयोग कर ही इस राशि को ट्रांसफर किया गया, जिसमें प्राचार्य ओपी वर्मा, अनिता चौहान, महेश खोटे, डॉ. शांता स्वामी के अलावा राजेन्द्रसिंह जाधोन, मेघना चाल्र्स, दिनेश पंवार की विभागीय जांच की जाएगी। जांच में यह भी पता चला कि इस पूरे मामले में लगभग 19 लोग शामिल रहे और राशि को मंजूर करने के मामले में भी आधा दर्जन अधिकारी शामिल रहे, जिनमें सहायक संचालक भार्गव के अलावा प्राचार्य विजया शर्मा व अन्य के नाम मिले हैं। आवास भत्ता, वॉशिंग भत्ता और ऐसे अन्य मदों के जरिए भी राशि अवैध रूप से ट्रांसफर की गई। कलेक्टर के निर्देश पर जो जांच कमेटी बनाई गई, उसमें संभागीय संयुक्त संचालक कोष और लेखा दिव्या शर्मा के साथ मनीष दुबे, प्रतीक गौड़, गुंजन तेजावत, चेतना पटेल, सिंपल पटेल, सजल सक्सेना, सुनंदा बघेल, अमान नकवी और निधि कटियार आदि शामिल रहे। कलेक्टर वर्मा के मुताबिक भी इस गबन में इस्तेमाल पूरी राशि की सख्ती से वसूली संबंधित आरोपियों से की जाएगी और दोषियों के खिलाफ एफआईआर भी दर्ज कराई जा रही है।


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