साप्ताहिक, पाक्षिक और मासिक अखबारों को राहत की उम्मीद
जर्नलिस्ट एसोसिएशन ऑफ मध्यप्रदेश (JUMP), जो नेशनल यूनियन जर्नलिस्ट्स ऑफ इंडिया (NUJI) से संबद्ध है, ने प्रदेश के लघु एवं मध्यम समाचार पत्रों के हित में बड़ा कदम उठाते हुए नियमित शासकीय विज्ञापन जारी करने की मांग को प्रमुखता से उठाया है। इंदौर संभाग अध्यक्ष चंपालाल गुर्जर के नेतृत्व में JUMP के प्रतिनिधिमंडल ने जनसंपर्क संचालनालय आयुक्त मनीष सिंह से मुलाकात कर इस मुद्दे पर विस्तृत चर्चा की।
प्रतिनिधिमंडल ने आयुक्त को बताया कि पूर्व मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान के कार्यकाल में यह घोषणा की गई थी कि साप्ताहिक, पाक्षिक और मासिक समाचार पत्रों को प्रतिवर्ष छह शासकीय विज्ञापन नियमित रूप से दिए जाएंगे, लेकिन वर्तमान में यह व्यवस्था प्रभावी रूप से लागू नहीं हो रही है। इसके कारण छोटे और क्षेत्रीय समाचार पत्र गंभीर आर्थिक संकट से गुजर रहे हैं।
JUMP पदाधिकारियों ने स्पष्ट कहा कि छोटे समाचार पत्र लोकतंत्र की जमीनी आवाज हैं और इन्हें आर्थिक संबल देना आवश्यक है। नियमित विज्ञापन व्यवस्था लागू होने से न केवल इन पत्रों को राहत मिलेगी, बल्कि ग्रामीण और क्षेत्रीय पत्रकारिता भी मजबूत होगी।
इस पर जनसंपर्क आयुक्त मनीष सिंह ने सकारात्मक रुख अपनाते हुए आश्वासन दिया कि बजट आवंटन के बाद इस विषय पर निर्णय लिया जाएगा और इसे लागू करने का हरसंभव प्रयास किया जाएगा।
भोपाल में भी उठी आवाज
इंदौर बैठक के अलावा JUMP प्रतिनिधिमंडल ने भोपाल स्थित जनसंपर्क कार्यालय में अपर संचालक गणेश जायसवाल से भी मुलाकात कर इस विषय पर चर्चा की। जायसवाल ने भी मांगों पर सकारात्मक आश्वासन दिया। इसके बाद प्रभारी संयुक्त संचालक डॉ. आर.आर. पटेल से मुलाकात कर पत्रकारों की विभिन्न समस्याओं पर विस्तार से चर्चा की गई।
अन्य मुद्दों पर भी हुई चर्चा... प्रतिनिधिमंडल ने जनसंपर्क विभाग के संयुक्त संचालक डॉ. आरआर पटेल, अशोक मनवानी एवं संजय जैन से भी पत्रकार हितों से जुड़े विभिन्न विषयों पर चर्चा की और मांग पत्र सौंपा।
प्रतिनिधिमंडल
में रहे शामिल
इस अवसर पर अशोक बड़गुर्जर, नंदकुमार चौहान, लक्ष्मीनारायण पटेरिया, बापू सिंह बघेल, मनोज सालुंके, अशोक समन, राजू दास, सुरेश यादव, भूपेंद्र दंडोतिया, बसंत गहलोत, दिनेश सालवी, ओमप्रकाश जैन, नरेंद्र नरेला, चंद्रशेखर कर्मा, राजेश यादव राजा बाबू खंडेलवाल, मनोहर मेहता,जीतू शिवहरे, नैवेद्य पुरोहित सहित कई सदस्य उपस्थित रहे। JUMP ने विश्वास जताया है कि सरकार शीघ्र ठोस निर्णय लेकर लघु एवं मध्यम समाचार पत्रों को राहत देगी, जिससे प्रदेश की क्षेत्रीय पत्रकारिता को नई ऊर्जा और मजबूती मिलेगी।
लघुकथा संग्रह, चमक जुगनूं की
बयान
साहित्य ‘सहित’ का भाव है। जो हित के साथ हो वह ‘सहित’ है। जहाँ शब्द और अर्थ साथ-साथ चलते हैं, रचनाकार और पाठक साथ-साथ चलते हैं, लेखक का व्यक्ति और उसकी समष्टि चेतना साथ-साथ चलते हैं, वह भी ‘सहित’ है। उसी का भाववाची नाम साहित्य है। साहित्य मनुष्य को मनुष्य से जोड़ता है, उससे आगे बढ़कर उसकी भावनाओं तथा सूक्ष्मतम अनुभूतियों से संबंध कराता है।
समाज में विभिन्न परिस्थितियों अथवा परिवेश में व्याप्त विसंगतियों, अदम्यताजनित दूरियों के कारण जीवन का जीना कठिन हो जाता है। उन्ही सब से जुड़ी यथार्थ की भूमि में संवेदना से अभिसिंचित लघुकथा का अंकुरण हुआ है, होता है। जीवन में जो कुछ टूट रहा है, छूट रहा है, वह पीड़ा ही लघुकथा है। लघुकथा अपने समय के यथार्थ का बयान करती है। वह जागरण गीत भी है और दृष्टिबोध भी। लघुकथा जीवन के एकांश का साक्षात्कार है।
प्रत्येक विधा का चरित्र उस की मूलभूत अपरिवर्तनीय और विशिष्ट विशेषताओं से निर्मित होता है, जिस का निर्धारण उस विधा विशेष में वर्णित परिवेश और संप्रेषित अनुभव अथवा संवेदना और उसे सशक्त करने के लिए नियोजित किए गए परिवेश का स्वरूप पृथक-पृथक होता है। अनुभव आदि परिवेश की यह अभिव्यक्ति की विशिष्टता ही विधा के मूल चरित्र को निर्धारित करती है। जिस के माध्यम से लघुकथाकार पाठक के विशेष संपर्क स्थापित कर लेता है। लेखक और पाठक के मध्य संवेदनात्मक स्तर पर बना यह संपर्क ही लघुकथा को सम्प्रेषणीय बनाता है। आज लघुकथा पाठक के सब से क़रीब की विधा है। समकालीन लघुकथा एक सुगठित रचना है।
‘चमक जुगनूँ की’ मेरा चौथा लघुकथा संग्रह है। अपनी लघुकथाओं के बारे में कुछ कहना आत्ममुग्धता है। इस का निर्णय तो सुधि पाठकों एवं समीक्षकों को ही करना है।
विद्वान साहित्यकार, प्रतिभावान और प्रभुतासंपन्न तो बहुत हैं लेकिन अपने अंतरतम में मनुष्य बने रहने वाले लोग दुर्लभ होते जा रहे हैं। श्री योगराज प्रभाकर उसी दुर्लभ प्रजाति के मनुष्य हैं जिनमें इंसानियत का जज्बा, कर्मठता, जीवटता
और समर्पण समंदर की तरह गहरा और अनुकरणीय है। ‘लघुकथा कलश’ के यशस्वी सम्पादक के रूप में उन्होंने कम समय में लघुकथा विधा को रौशनी की मीनार पर खड़ा कर चारों तरफ उसके महत्व के उजाले को फैलाया है। नए लेखकों की रचनाओं को अपनी पत्रिका में सम्मिलित कर उन्हें प्रोत्साहित भी किया है और नई दिशा भी दी है। वे हृदय से स्वीकार करते हैं कि नई क़लम आश्वस्त करती है। वे स्वयं एक सिद्धहस्त लघुकथाकार, समीक्षक, अनुवादक एवं ग़ज़लकार हैं। उन्होंने अनेक हिंदी लेखकों की लघुकथाओं का पंजाबी में अनुवाद कर उन्हें पुस्तक रूप में प्रकाशित कर ऐतिहासिक काम किया है। स्वेच्छा एवं निस्वार्थ भावना से मेरी लघुकथाओं का भी पंजाबी में अनुवाद भी किया और स्वयं प्रकाशित भी किया। मैं उन के ज़ौके-अदब और हुस्ने-सुलूक का कायल हूँ। मेरे इस संग्रह ‘चमक जुगनूँ की’ के प्रकाशन का उत्तरदायित्व वहन कर मुझे उपकृत किया, आभारी हूँ।
प्रभु की अनुकंपा से मुझे विख्यात लघुकथाकारों, आदरणीय भगीरथ परिहार, डॉ. बलराम अग्रवाल, डॉ. अशोक भाटिया, सुकेश साहनी, रामेश्वर काम्बोज हिमांशु, डॉ. पुरुषोत्तम दुबे, डॉ. योगेन्द्रनाथ शुक्ल, प्रो. रूप देवगुण, योगराज प्रभाकर एवं साहित्यकार सदाशिव कौतुक जैसे नामचीन विद्वानों का प्रोत्साहन मिला। मैं अपने परिवारजन विशेषकर अपने पुत्र श्री कंवलदीप सिंह सोढ़ी के श्रद्धाभाव से बेहद प्रभावित हुआ हूँ, उसे ढेरों आशीष। अपने पाठकों, समीक्षकों एवं हितैषियों के स्नेह का तहे-दिल से शुक्रिया अदा करता हूँ।


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