महिलाओं की भागीदारी बढ़ाना केवल प्रतिनिधित्व का विषय नहीं है, ये हमारे लोकतंत्र को अधिक संवेदनशील, अधिक संतुलित और अधिक उत्तरदायी बनाने का प्रयास है। इक्कीसवीं सदी की विकास यात्रा में भारत एक महत्वपूर्ण और ऐतिहासिक क्षण की ओर आगे...

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी

इक्कीसवीं सदी की विकास यात्रा में भारत एक महत्वपूर्ण और ऐतिहासिक क्षण की ओर आगे बढ़ रहा है। आने वाले दिनों में हम अपने लोकतंत्र को और मजबूत करने वाली एक बड़ी पहल के साक्षी बनने वाले हैं। यह ऐसा अवसर है, जब समानता, समावेशन और जनभागीदारी के प्रति हमारी राष्ट्रीय प्रतिबद्धता एक नए रूप में सामने आएगी। यह ऐसा समय है, जब हमारी संसद को एक महत्वपूर्ण दायित्व निभाना है। उसे ऐसा कदम आगे बढ़ाना है, जो हमारे लोकतंत्र को अधिक व्यापक एवं और अधिक प्रतिनिधिक बनाए। संसद का यह निर्णय महिलाओं की राजनीतिक भागीदारी को नई शक्ति देगा। लोकसभा और विधानसभाओं संस्थाओं में उनका उचित स्थान सुनिश्चित करेगा।

यह क्षण इसलिए भी विशेष है, क्योंकि यह ऐसे समय में आ रहा है जब देश का वातावरण उत्सव, नवीनता और सकारात्मकता से भरा हुआ है। आने वाले दिनों में भारत के अलग-अलग हिस्सों में अनेक पर्व मनाए जाएंगे। असम के लोग रोंगाली बिहू मनाने वाले हैं, और ओडिशा में महा बिशुबा पणा संक्रांति का उत्सव मनाया जाएगा। पश्चिम बंगाल में पोइला बैशाख के साथ बंगाली नववर्ष की शुरुआत होगी। केरलम में विशु पूरे उत्साह के साथ मनाया जाएगा। तमिलनाडु के लोग उत्सुकता से पुथांडु की प्रतीक्षा कर रहे हैं, तो पंजाब और उत्तर भारत के अन्य हिस्सों में लोगों को वैसाखी के पर्व का इंतजार है। ये पावन पर्व हर किसी में एक नई आशा का संचार करने वाले हैं। भारत और दुनियाभर में इन त्योहारों को मनाने वाले सभी लोगों को मैं हृदय से शुभकामनाएं देता हूं। कामना करता हूं कि ये दिव्य और पावन अवसर हम सभी के जीवन में सुख-समृद्धि लेकर आएं।

इसी दौरान 11 अप्रैल से महात्मा फुले की 200वीं जयंती के समारोह भी शुरू होंगे। 14 अप्रैल को हम डॉ. बाबासाहेब आंबेडकर की जयंती मनाएंगे। ये तिथियां हमें सामाजिक न्याय व मानवीय गरिमा के उन मूल्यों की भी याद दिलाती हैं, जिन्होंने आधुनिक भारत की दिशा तय की।

इन्हीं प्रेरणादायी अवसरों के बीच, 16 अप्रैल को संसद की ऐतिहासिक बैठक होगी। महिला आरक्षण को लागू करने से जुड़े महत्वपूर्ण विधेयक पर चर्चा के बाद उसे पारित कराने के लिए विशेष सत्र बुलाया गया है। इसे सिर्फ विधायी प्रक्रिया कहना इसके महत्व को कम आंकना होगा। यह भारतवर्ष की करोड़ों महिलाओं की आकांक्षाओं का प्रतिबिंब है।

हमारी नारीशक्ति देश की लगभग आधी आबादी का प्रतिनिधित्व करती है। उन्होंने राष्ट्र निर्माण में अपना अमूल्य योगदान दिया है। आज हर सेक्टर में नारी शक्ति मिसाल बनी है। साइंस एंड टेक्नोलॉजी से लेकर एंटरप्रेन्योरशिप तक, खेल के मैदान से लेकर सशस्त्र बलों तक और संगीत से लेकर कला के क्षेत्र तक महिलाएं अपनी सशक्त पहचान बना रही हैं। हमारी माताएं-बहनें और बेटियां देश की प्रगति में अग्रणी भूमिका निभा रही हैं।

हमारे पारंपरिक मूल्य बताते हैं कि कोई भी समाज तभी प्रगति करता है, जब माताओं-बहनों को आगे बढ़ने के ज्यादा से ज्यादा मौके मिलते हैं। इसी सोच के साथ बीते 11 वर्षों में महिला सशक्तीकरण के लिए एक अनुकूल माहौल तैयार करने पर जोर दिया गया है, इसके लिए निरंतर प्रयास किए गए हैं। शिक्षा तक बढ़ती पहुंच, बेहतर स्वास्थ्य सेवाएं, वित्तीय समावेशन में बढ़ोतरी और बुनियादी सुविधाओं तक बेहतर पहुंच ने आर्थिक और सामाजिक जीवन में महिलाओं की भागीदारी को मजबूती दी है।

लेकिन ये भी सच्चाई है कि इन सारे प्रयासों के बावजूद राजनीति और विधायी संस्थाओं में महिलाओं का प्रतिनिधित्व समाज में उनकी भूमिका के अनुरूप नहीं रहा है। इस कमी को अब दूर किया जाना चाहिए, क्योंकि जब महिलाएं प्रशासन चलाने और प्रशासनिक निर्णयों में हिस्सा लेती हैं तो उनका अनुभव और विज़न बहुत काम आता है। इससे चर्चा तो समृद्ध होती ही है, क्वालिटी ऑफ गवर्नेंस में सुधार भी होता है। महिलाओं की भागीदारी बढ़ाना केवल प्रतिनिधित्व का विषय नहीं है, ये हमारे लोकतंत्र को अधिक संवेदनशील, अधिक संतुलित और अधिक उत्तरदायी बनाने का प्रयास है।

पिछले कई दशकों में लोकतांत्रिक संस्थाओं में महिलाओं को उनका उचित स्थान दिलाने के निरंतर प्रयास हुए हैं। समितियां गठित की गईं, विधेयकों के मसौदे प्रस्तुत किए गए, लेकिन वे कभी पारित नहीं हो सके। फिर भी, इस बात पर व्यापक सहमति रही है कि विधायी निकायों में महिलाओं का प्रतिनिधित्व बढ़ना चाहिए। सितंबर, 2023 में संसद ने सर्वसम्मति से नारी शक्ति वंदन अधिनियम पारित किया था। यह मेरे जीवन के सबसे विशेष अवसरों में से एक रहा है। अब जरूरत है कि 2029 के लोकसभा चुनाव और आने वाले समय में राज्यों के विधानसभा चुनाव महिला आरक्षण के प्रावधानों के साथ कराए जाएं।

महिलाओं के लिए आरक्षण सुनिश्चित करने का यह अवसर हमारे संविधान की मूल भावना के साथ गहराई से जुड़ा है। हमारे संविधान निर्माताओं ने एक ऐसे समाज की कल्पना की थी, जहां समानता न केवल संविधान में निहित हो, बल्कि उसे व्यवहार में भी लाया जाए। विधायी संस्थाओं में महिलाओं की भागीदारी को सुनिश्चित करना, उस परिकल्पना को साकार करने की दिशा में एक अहम कदम है। यह एक ऐसे समाज के निर्माण के प्रति हमारी प्रतिबद्धता का प्रतीक है, जिसमें राष्ट्र का भविष्य तय करने में हर नागरिक की समान भूमिका हो।

अब इस निर्णय को और टाला नहीं जा सकता। दशकों से इसकी आवश्यकता को स्वीकार किया गया है। इस पर चर्चा हुई है, इसे बार-बार दोहराया गया है। अगर अब भी हम इसे आगे टालते हैं, तो उसका अर्थ यही होगा कि हम उस असंतुलन को और लंबा खींच रहे हैं, जिसे हम पहचानते भी हैं और सुधारने की क्षमता भी रखते हैं। आज भारत पूरे आत्मविश्वास और दृढ़ संकल्प से आगे बढ़ रहा है। इसलिए जरूरी है कि हमारी संस्थाएं सभी नागरिकों, विशेष रूप से हमारी आधी आबादी का प्रतिनिधित्व करने वाली महिलाओं की आकांक्षाओं का सम्मान करें। इससे न सिर्फ दशकों पुराना संकल्प पूरा होगा, बल्कि विकास की गति को बहुत मदद मिलेगी। यह हमारे लोकतंत्र को अधिक उत्तरदायी बनाने और भविष्य के अनुरूप तैयार करने की दिशा में एक अहम कदम होगा।

यह समय सामूहिक संकल्प का है। यह किसी एक सरकार, एक दल या एक व्यक्ति का विषय नहीं है। यह पूरे राष्ट्र का विषय है। हमें मिलकर इस कदम के महत्व को समझना है और मिलकर ही इसे साकार करना है। यही हमारी नारी शक्ति के प्रति हमारा दायित्व भी है, इसलिए महिला आरक्षण बिल को पारित कराने के लिए सहमति बहुत जरूरी है। इसे बड़े राष्ट्रीय हित को ध्यान में रखकर देखा जाना चाहिए। ऐसे अवसर हमें यह याद दिलाते हैं कि कुछ फैसले अपने समय से बड़े होते हैं। वे आने वाली पीढ़ियों की दिशा तय करते हैं। ये हमें याद दिलाते हैं कि लोकतंत्र की असली ताकत समय के साथ खुद को और अधिक न्यायपूर्ण और अधिक समावेशी बनाने की क्षमता में होती है।

संसद का यह ऐतिहासिक सत्र करीब आ चुका है। मैं सभी दलों के सांसदों से हमारी नारी शक्ति के लिए इस महत्वपूर्ण कदम का समर्थन करने का आग्रह करता हूं। हम जिम्मेदारी और दृढ़ संकल्प के साथ इस दायित्व को पूरा करें। आइए, हम अपने लोकतंत्र की सर्वोच्च परंपराओं के अनुरूप इसमें अपनी भागीदारी सुनिश्चित करें।

गृहस्थ नहीं, लेकिन जानता सब हूं: मोदी

 हमारी योजनाओं से औरतें आर्थिक रूप से ताकतवर बनीं

 पीएम नरेंद्र मोदी ने सोमवार को महिला आरक्षण बिल पर कहा कि हमारे देश की संसद एक नया इतिहास रचने के करीब है। विधानसभाओं से लेकर संसद तक दशकों की प्रतीक्षा के अंत का समय आ गया है। इसलिए सरकार 16 से 18 अप्रैल तक संसद का स्पेशल सेशन लाई aका बड़ा अवसर बनने जा रहा है। संसद तक पहुंचने का रास्ता आसान बनने जा रहा है। आज महिलाओं की भूमिका और भी अहम हो गई है। हमारी योजनाओं से औरतें आर्थिक रूप से ताकतवर बनीं। उन्होंने कहा कि मैं गृहस्थ नहीं हूं, लेकिन जानता सब हूं।'

पीएम मोदी ने कहा, ‘हमारी सरकार महिलाओं के लिए कई योजनाएं लेकर हाजिर है। बेटी बचाओ-बेटी पढ़ाओ, मातृत्व योजना, जन्म के बाद सुकन्या समृद्धि योजना, सही समय पर टीके लगें इसके लिए मिशन इंद्र धनुष शुरू किया।’

स्कूल में शौचालय की परेशानी न हो स्वच्छ भारत अभियान, मुफ्त सेनेटरी पैड, खेलों में सालाना 1 लाख की मदद, भविष्य में सेना में जाना चाहे तो सरकार ने सैनिक स्कूल के दरवाजे खोले। जीवन के आगे के पड़ाव में रसोई में धुएं की परेशानी से बचाने उज्जवला योजना, पानी के लिए हर घर नल, 5 लाख तक मुफ्त इलाज देने वाली आयुष्मान योजना। इन सबका सबसे ज्यादा लाभ हमारी बहनों और बेटियों को हो रहा है।

3 करोड़ से ज्यादा महिलाएं अपने घर की मालिक बनी हैं। आम तौर पर पिता और बेटा व्यापार की बात करते हैं न और मां आ जाए तो कहते हैं तुम जाओ। अब जब वो आर्थिक सशक्त हो गई हैं तो बेटा भी कहता है कि मां को बुलाइए न। उन्होंने कहा कि मैं गृहस्थ नहीं हूं, लेकिन जानता सब हूं।

‘भारत की सभी महिलाओं को एक नए युग के आगमन की बधाई भी देता हूं। लोकतांत्रिक संरचना में महिलाओं को आरक्षण देने की जरूरत दशकों से हर कोई महसूस कर रहा है।’ ‘महिला आरक्षण बिल पर विमर्श को करीब चालीस साल बीत गए। इसमें सभी पार्टियों के और कितनी ही पीढ़ियों के प्रयास शामिल हैं।

19 किसानों पर जुर्माना

मजदूरी से कम है जुर्माना इसलिए जला रहे नरवाई

नरवाई जलाने वालों की सैटेलाइट से हो रही मॉनीटरिंग में पिछले एक माह में 1016 प्रकरण सामने आए हैं। इनमें से औसतन 15% मामूली आग को हटाते हुए 852 किसानों को चिह्नित किया। नरवाई जलाने वाले 19 किसानों पर प्रशासन ने 57 हजार का जुर्माना भी लगाया है।  सैटेलाइट रिपोर्ट की पुष्टि के बाद 852 नरवाई जलाने के मामले में 19 किसानों पर कार्रवाई के बाद शेष पर भी कार्रवाई की तैयारी है। 22 किसानों को एसडीएम स्तर से नोटिस जारी हो चुके हैं। वहीं 133 किसानों के पंचनामे तैयार हैं। नोटिस देकर 2500 से 15 हजार रु. जुर्माने की कार्रवाई होगी।

कार्रवाई गलत : मामले में किसानों ने विरोध भी किया था। भाकिसं के प्रांत महामंत्री भारतसिंह बैस ने आरोप लगाया सरकार नरवाई नष्ट करने के उपकरण उपलब्ध कराने के बजाय कार्रवाई कर रही है। यह गलत है। उप संचालक कृषि यूएस तोमर ने बताया सैटेलाइट रिपोर्ट पर कार्रवाई हो रही है। सबसे ज्यादा खाचरौद में 45 पंचनामा, महिदपुर में एक भी नहीं- सैटेलाइट रिपोर्ट के बाद विभागीय स्तर पर 133 पंचनामा में सबसे ज्यादा खाचरौद ब्लॉक में 45 पंचनामे बने हैं, जबकि महिदपुर में एक भी नहीं बना। उज्जैन में 38, तराना में 35, घट्टिया में 10 और बड़नगर में 5 पंचनामा बनाया है।

प्रशासन की सख्ती का नहीं असर

 प्रशासन की लाख सख्ती के बावजूद मध्यप्रदेश के कई जिलों में नरवाई जलाई जा रही है। यहां तक कि प्रशासन जुर्माना भी लगाता आ रहा है, लेकिन नरवाई किसानों द्वारा जलाई ही जा रही है। उसके पीछे का एक कारण और सामने आ रहा है कि किसानों को नरवाई निकालने में जो मजदूरी लगती है, उसके कम का जुर्माना है...। सूत्रों की माने तो यही एक कारण है कि किसानो द्वारा नरवाई जलाना जारी है और इसके एवज में वो जुर्माना भरना पसंद करते हैं, क्योंकि नरवाई निकालने की मजदूरी अधिक होती है और जुर्माना 2000 हजार रुपए से ज्यादा से ज्यादा 10 या 15 हजार...।


Post a Comment

Previous Post Next Post