नर्मदा सिंचाई योजनाओं में 

2400 करोड़ से ज्यादा की गड़बड़ी

प्रदेश में नर्मदा सिंचाई योजनाओं में भ्रष्टाचार की परतें उजागर हुई हैं। कैग (कंट्रोलर एंड ऑडिटर जनरल) ने मालवा-निमाड़ व घाटी क्षेत्र में 43 माइक्रो सिंचाई परियोजनाओं में से 18 की समीक्षा की है। इसमें 2400 करोड़ रुपए से ज्यादा की आर्थिक गड़बड़ी उजागर की है। 

रिपोर्ट के मुताबिक नर्मदा घाटी विकास प्राधिकरण द्वारा सिंचाई योजनाओं के आकलन और डिजाइन में गड़बड़ी के कारण 47,000 एकड़ जमीन तक पानी ही नहीं पहुंचा। सिंहस्थ के लिए अहम नर्मदा-शिप्रा लिंक परियोजना सहित 6300 करोड़ रुपए की 3 योजनाएं बेकार हो गईं।

ठेकेदारों को अनुचित लाभ पहुंचाने की बात भी रिपोर्ट में उजागर की गई है। कैग ने यह भी कहा है कि नर्मदा ट्रिब्यूनल बंटवारे में प्रदेश को मिले 18 मिलियन एकड़ फीट (एमएएफ) पानी का 24 से 66 फीसदी ही उपयोग हो सका है। बता दें, सरकार ने इन परियोजनाओं के लिए बीते 6 साल में 29 हजार करोड़ से ज्यादा का आवंटन किया है।

15 परियोजनाओं का काम देरी से हुआ, जिम्मेदार एजेंसियों का करोड़ों का जुर्माना छोड़ा?

एनवीडीए द्वारा 2015 के बाद शुरू की गई 43 माइक्रो सिंचाई परियोजनाओं में से 18 की जांच की।

इसमें 8 पूर्ण व 10 निर्माणाधीन योजनाएं।

कैग ने कहा- 11 साल में 12 योजनाएं ही पूरी हो सकीं।

नर्मदा-शिप्रा, नर्मदा-गंभीर, नर्मदा-पार्वती, बलवाड़ा व नागलवाड़ी उद्वहन योजनाएं जांच में शामिल हैं।

अव्यावहारिक हो गई 3 योजनाएं

लाभ-लागत अनुपात का आकलन गलत। नर्मदा-शिप्रा लिंक, नर्मदा झाबुआ-सरदारपुर, आईएसपी कालीसिंध फ्लॉप।

गलत डिजाइन, पानी कम मिला

दोषपूर्ण डिजाइन के कारण बहाव कम रखा गया। इससे करीब 47,200 एकड़ क्षेत्र में पानी नहीं पहुंच पाया।

818 करोड़ का 

जुर्माना छोड़ा

15 परियोजनाओं का काम देरी से हुआ। जिम्मेदार एजेंसियों पर 818 करोड़ रुपए का जुर्माना होना था लेकिन इसे छोड़ दिया।

109 करोड़ ज्यादा खर्च

बड़वानी के पास पाटी एमआईपी, नागलवाड़ी एमआईपी में तकनीकी गलतियां सामने आईं। इससे 109 करोड़ अधिक व्यय हुए।

आठ अनुबंधों की जांच : पाइप की मोटाई कम

8 अनुबंधों की जांच में पता चला, पाइप की मोटाई तय मानक से कम थी। ठेकेदारों को 1074 करोड़ का अनुचित लाभ मिला।

मनमानी :62 में पानी नहीं पहुंचा

नर्मदा-क्षिप्रा परियोजना में 162 गांवों में 75 हजार एकड़ में सिंचाई होनी थी। पता चला, 62 गांवों तक पानी नहीं पहुंचा।

डीपीआर का अनुमोदन ठीक से नहीं कराया

नर्मदा घाटी विकास प्राधिकरण के अफसरों ने डीपीआर का केंद्रीय जल आयोग व केंद्रीय डिजाइन संगठन से अनुमोदन ही नहीं करवाया। 10 हजार हेक्टेयर या इससे बड़े कमांड एरिया के लिए यह जरूरी होता है।

प्रेमी की दीवानी युवतियों के लिए एक जरूरी चेतावनी

किसी का परिवार बिखरने का आपको कोई हक नहीं

 आज देशभर में लगातार ऐसी दर्दनाक घटनाएं सामने आ रही हैं, जहां विवाह के बाद पत्नी अपने पूर्व प्रेमी के साथ मिलकर पति की हत्या जैसी जघन्य वारदात को अंजाम दे रही है। यह केवल एक व्यक्ति की हत्या नहीं होती, बल्कि इसके साथ कई जिंदगियां बर्बाद हो जाती हैं। एक परिवार उजड़ता है, माता-पिता टूट जाते हैं, भाई-बहनों का भविष्य प्रभावित होता है और समाज में दोनों परिवारों की प्रतिष्ठा मिट्टी में मिल जाती है। अभी हाल ही में  यह विषय केवल अपराध का नहीं, बल्कि सामाजिक चेतना, पारिवारिक संवाद, युवतियों के आत्मनिर्णय और जिम्मेदारी का भी है।

प्रेम किसी से, विवाह किसी और से- त्रासदी की शुरुआत : कई मामलों में देखा गया है कि युवतियां प्रेम किसी और से करती हैं, लेकिन पारिवारिक दबाव, सामाजिक भय या आर्थिक कारणों से विवाह किसी अन्य युवक से कर लेती हैं। विवाह के बाद यदि वे अपने पुराने संबंध समाप्त नहीं करतीं, तो तनाव, झूठ, छल और अंततः अपराध की स्थिति बनती है। यदि कोई युवती पहले से किसी से प्रेम करती है, तो उसे साहस के साथ अपने परिवार से बात करनी चाहिए। यदि परिवार सहमत नहीं है, तब भी किसी निर्दोष युवक की जिंदगी से खिलवाड़ करने का अधिकार किसी को नहीं है। किसी ऐसे व्यक्ति से विवाह करना, जिसे आप मन से स्वीकार नहीं करतीं, केवल एक सामाजिक औपचारिकता नहीं- यह दूसरे व्यक्ति के जीवन के साथ अन्याय है।

कुछ चर्चित उदाहरण

1. सिंगरौली, मध्यप्रदेश मामला (2026) : सिंगरौली में एक महिला ने शादी के केवल 25 दिन बाद अपने प्रेमी के साथ मिलकर पति की हत्या करवा दी। पुलिस जांच में कॉल डिटेल्स से पूरा षड्यंत्र उजागर हुआ। यह मामला बताता है कि जल्दबाजी में किया गया विवाह और छिपे संबंध किस भयावह मोड़ तक जा सकते हैं।

2. श्रीगंगानगर, राजस्थान मामला (2026) : राजस्थान में एक नवविवाहिता ने शादी के तीन महीने बाद प्रेमी के साथ मिलकर पति की हत्या की योजना बनाई। हत्या को दुर्घटना दिखाने की कोशिश की गई, लेकिन पुलिस जांच में सच सामने आ गया।

3. गाजियाबाद, उत्तरप्रदेश मामला (2025) : यहाँ पत्नी ने प्रेमी के साथ मिलकर टैक्सी चालक पति की हत्या कर दी। कारण था—वह अपने विवाह से बाहर निकलना चाहती थी, लेकिन कानूनी रास्ता अपनाने के बजाय अपराध का रास्ता चुना।

इंदौर का राजा रघुवंशी हत्या कांड और अभी हाल ही में धार में एक युवक को पत्नी ने प्रेमी के चक्कर में मौत के घाट उतार दिया....

सवाल: क्या तलाक अपराध से कठिन है?

यदि विवाह असफल है, यदि मन किसी और के साथ है, यदि पति-पत्नी में सामंजस्य नहीं, तो कानून ने रास्ते दिए हैं:

आपसी सहमति से तलाक, छह से साल भर में हो जाता है, फिर हत्या क्यों? हत्या कभी समाधान नहीं। हत्या केवल विनाश है।

माता-पिता की भी जवाबदेही : कई बार माता-पिता बेटियों की शादी उनकी इच्छा जाने बिना तय कर देते हैं। यह सोच कि ‘शादी के बाद सब ठीक हो जाएगा’ आज खतरनाक साबित हो रही है। क्योंकि मोबाइल एक ऐसा अनजान शत्रु है, जो हर गतिविधि का पर्दाफाश कर रहा है और परिणाम हत्या और परिवारों का बिखरना दिखाई दे रहा है।


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