इंदौर जिला कोर्ट ने विवाह का झांसा देकर दुष्कर्म करने के मामले में आरोपी को 10 वर्ष के कठोर कारावास की सजा सुनाई है। आरोपी ने पीड़िता के साथ करीब तीन माह तक यौन शोषण किया था।

अदालत ने स्पष्ट कहा कि शादी का झांसा देकर शारीरिक संबंध बनाना गंभीर अपराध है और ऐसे मामलों में सख्त सजा जरूरी है।

पीड़िता पहले जबलपुर में अकाउंटेंट के रूप में कार्यरत थी। वर्ष 2021 में इंदौर में एक सहेली की जन्मदिन पार्टी के दौरान उसकी आरोपी से मुलाकात हुई, जिसके बाद दोनों के बीच पहचान बढ़ी। सितंबर 2021 में वह इंदौर आकर रहने लगी।

करीब एक माह बाद आरोपी ने पीड़िता से संपर्क कर नौकरी की जरूरत बताई। पीड़िता ने अपने कंपनी के मालिक से बात कर उसे एक फर्नीचर फैक्ट्री में काम दिलाया।

1 मार्च 2022 को कार्यस्थल पर विवाद के चलते युवती ने नौकरी छोड़ दी और जबलपुर लौटने की तैयारी करने लगी। इस दौरान आरोपी ने उसे जाने से रोका और इंदौर में किराए का कमरा दिलवाया। बाद में वह खुद भी उसी कमरे में रहने लगा।

आरोपी ने शादी का झांसा देकर पीड़िता के साथ करीब तीन माह तक शारीरिक संबंध बनाए। 25 जून 2022 तक दोनों साथ रहे, जिसके बाद आरोपी जबलपुर चला गया।

जब पीड़िता ने संपर्क किया तो आरोपी ने बताया कि उसकी सगाई पहले से तय है और वह विवाह नहीं कर सकता। परिजनों से बात करने पर भी विवाह से इनकार कर दिया गया।

धोखा मिलने के बाद पीड़िता ने आजाद नगर थाने में आरोपी के खिलाफ शिकायत दर्ज कराई।

मामले की सुनवाई के दौरान कोर्ट ने साक्ष्यों और गवाहों के आधार पर आरोपी को दोषी पाया। 10 अप्रैल को उसे 10 वर्ष के कठोर कारावास की सजा सुनाई गई।

मामले में शासन की ओर से पैरवी एजीपी (सरकारी वकील) द्वारा की गई।

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