मध्य प्रदेश सरकार ने पशुपालन को बढ़ावा देने और ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूत करने के उद्देश्य से बुरहानपुर जिले में महत्वाकांक्षी 'क्षीर धारा ग्राम योजना' की शुरुआत की है। इस योजना के तहत जिले को पायलट प्रोजेक्ट के रूप में चुना गया है, जहां पशुओं के स्वास्थ्य, टीकाकरण और नस्ल सुधार पर विशेष ध्यान दिया जा रहा है।
क्षीर धारा योजना के अंतर्गत पशुपालन विभाग की टीमें गांव-गांव पहुंचकर पशुपालकों से सीधे संपर्क कर रही हैं। पशुओं में बांझपन की समस्या के समाधान के लिए विशेष शिविर लगाए जा रहे हैं, वहीं संक्रामक बीमारियों से बचाव हेतु नियमित टीकाकरण भी किया जा रहा है।
इसके साथ ही कृत्रिम गर्भाधान के जरिए उन्नत नस्ल के पशु तैयार करने पर जोर दिया जा रहा है, जिससे दुग्ध उत्पादन में वृद्धि हो सके। पशुपालकों को संतुलित आहार और आधुनिक पशुपालन तकनीकों की जानकारी भी दी जा रही है, ताकि उनकी आय में बढ़ोतरी हो सके।
पशुपालन विभाग के अनुसार, "क्षीर धारा योजना के माध्यम से जिले के पशुपालकों को सीधे लाभ पहुंचाया जा रहा है। हमारा उद्देश्य है कि पशुओं का बेहतर स्वास्थ्य सुनिश्चित हो, उत्पादन बढ़े और पशुपालक आत्मनिर्भर बनें।"
गौरतलब है कि आधिकारिक रिपोर्ट के मुताबिक, राज्य के नेतृत्व में कृषक कल्याण वर्ष 2026 के अंतर्गत प्रदेश में दुग्ध उत्पादन बढ़ाने के उद्देश्य से संचालित 'क्षीर धारा ग्राम' योजना का प्रभावी क्रियान्वयन किया जा रहा है। सरकार की इस महत्वाकांक्षी योजना का मुख्य उद्देश्य ग्रामीण क्षेत्रों में पशुपालन को आधुनिक तकनीकों से जोड़कर दुग्ध उत्पादन को दोगुना करना तथा चयनित ग्रामों को आदर्श दुग्ध उत्पादन ग्राम के रूप में विकसित करना है।
योजना के तहत पशुपालन को वैज्ञानिक आधार देने के लिए नस्ल सुधार, पशु स्वास्थ्य प्रबंधन और संतुलित पोषण पर विशेष ध्यान दिया जाता है। चयनित ग्रामों में सभी पशुओं की शत-प्रतिशत टैगिंग की जाती है, जिससे प्रत्येक पशु की पहचान, स्वास्थ्य स्थिति, टीकाकरण, प्रजनन और बीमा से संबंधित जानकारी का व्यवस्थित रिकॉर्ड तैयार किया जा सके। इससे पशुपालकों को समय पर इलाज और विभागीय योजनाओं का लाभ मिल सकेगा।
पशु नस्ल सुधार कार्यक्रम के तहत अवर्णित नस्ल के सांडों का नियमानुसार बधियाकरण किया जाता है। वहीं उच्च गुणवत्ता वाले सांडों के वीर्य से कृत्रिम गर्भाधान के माध्यम से बेहतर नस्ल तैयार की जाती है। विभाग द्वारा पात्र पशुपालकों को उन्नत नस्ल के पशु उपलब्ध कराने की भी योजना है, जिससे दूध उत्पादन में वृद्धि हो सके।
इसके साथ ही पशुपालकों को वर्षभर हरे चारे की उपलब्धता सुनिश्चित करने के लिए रबी, खरीफ और ग्रीष्म ऋतु के अनुरूप चारा फसलों की जानकारी दी जाती है। पशुपालकों को संतुलित पशु आहार, साइलेज और हे निर्माण, मिनरल मिक्सचर और विटामिन के उपयोग के संबंध में प्रशिक्षण दिया जाता है, जिससे पशुओं का स्वास्थ्य बेहतर बना रहे और उत्पादन क्षमता बढ़े।

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