गुवाहाटी हाईकोर्ट की कोहिमा खंडपीठ ने नागालैंड में डॉग मीट के व्यापार और बिक्री से जुड़े मामले में अलग-अलग राय दी है। दो जजों की बेंच किसी एक निष्कर्ष पर नहीं पहुंच सकी, इसलिए अब इस मामले का अंतिम फैसला बड़ी पीठ द्वारा किया जा सकता है।

यह मामला दो याचिकाओं से जुड़ा है, जो 2023 और 2024 में दायर की गई थीं। इन याचिकाओं में जून 2023 के उस फैसले को चुनौती दी गई थी, जिसमें डॉग मीट की बिक्री और उपभोग की अनुमति दी गई थी।

22 अप्रैल 2026 को आए फैसले में एक जज ने याचिकाओं को खारिज करते हुए 2023 के फैसले को सही माना और डॉग मीट की बिक्री जारी रखने का समर्थन किया। वहीं दूसरे जज ने अलग राय रखते हुए याचिकाओं को स्वीकार किया और 2023 के फैसले को रद्द कर दिया। दोनों जजों के मतभेद के कारण मामला फिलहाल अधूरा रह गया है और विस्तृत आदेश आना अभी बाकी है।

गौरतलब है कि जुलाई 2020 में नागालैंड सरकार ने कुत्तों के आयात, व्यापार और डॉग मीट की बिक्री पर पूर्ण प्रतिबंध लगाया था। यह फैसला राज्य मंत्रिमंडल की मंजूरी के बाद लागू किया गया था।

इस प्रतिबंध को लेकर समाज में अलग-अलग प्रतिक्रियाएं सामने आई थीं। कुछ समुदाय इसे अपनी परंपरा और खानपान का हिस्सा मानते हैं, जबकि पशु अधिकार से जुड़े लोग इसका विरोध करते हैं। बाद में 2020 में ही व्यापार से जुड़े लोगों ने इस प्रतिबंध को अदालत में चुनौती दी थी।

2 जून 2023 को कोहिमा बेंच ने सरकार के प्रतिबंध आदेश को रद्द कर दिया था, यह कहते हुए कि इस तरह का आदेश जारी करने का अधिकार संबंधित अधिकारी के पास नहीं था। अब नए विभाजित फैसले के बाद मामला फिर से कानूनी उलझन में है।

विशेषज्ञों का मानना है कि इस विवाद पर अंतिम और स्पष्ट निर्णय अब बड़ी पीठ के गठन के बाद ही सामने आएगा।

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