देश में बेरोजगारी की समस्या जितनी गंभीर है, उससे कहीं ज्यादा चिंताजनक युवाओं की मानसिकता बनती जा रही है। पढ़े-लिखे युवा डिग्रियां हाथ में लेकर घूम रहे हैं, लेकिन छोटे काम करने में उन्हें शर्म आ रही है। नतीजा यह है कि जहां एक ओर वे 10 से 15 हजार रुपए की मामूली नौकरी में जिंदगी काट रहे हैं, वहीं दूसरी ओर कम पढ़े-लिखे लेकिन हुनरमंद लोग हर महीने 30 से 40 हजार रुपए आसानी से कमा रहे हैं।  सवाल यह है कि आखिर डिग्री लेने के बाद भी युवा आत्मनिर्भर क्यों नहीं बन पा रहे?

मेहनत के काम करने से दूरी

आज का एक बड़ा वर्ग मेहनत से ज्यादा दिखावे को महत्व देने लगा है। जैसे पेंटिंग, वेल्डिंग, प्लंबिंग, इलेक्ट्रिकल जैसे काम उन्हें अपनी ‘इमेज’ के खिलाफ लगते हैं। लेकिन यही काम करने वाले लोग रोज 800 से 1000 रुपए कमा रहे हैं और महीने में 30-40 हजार रुपए तक पहुंच रहे हैं।  इसके उलट, कई ग्रेजुएट युवा एसी ऑफिस में बैठकर 10-15 हजार की नौकरी को ‘सम्मानजनक’ मान लेते हैं, भले ही उसमें न भविष्य हो और न संतोष।

सरकारी नौकरी के 

चक्कर में ढलती आयु

सरकारी नौकरी पाने की चाहत ने लाखों युवाओं का कीमती समय निकल गया है और उनकी उम्र ढलती जा रही है। यहां तक की कई युवाओं की शादी तक नहीं हो सकी है। परीक्षा दिए जा रहे हैं और अंत में छोटी-मोटी नौकरियां कर रहे हैं, लेकिन हुनर के काम नहीं कर  रहे हैं।

परिवार और समाज भी जिम्मेदार

इस मानसिकता के पीछे केवल युवा नहीं, बल्कि परिवार और समाज भी जिम्मेदार हैं। बचपन से ही बच्चों को यह सिखाया जाता है कि ‘बड़ा बनना है तो केवल डॉक्टर-इंजीनियर या अफसर बनो।’ कोई यह नहीं बताता कि एक कुशल कारीगर भी सम्मानजनक और सफल जीवन जी सकता है।

छोटे काम, बड़े अवसर

जमीनी सच्चाई यह है कि देश में स्किल्ड वर्कर्स की भारी कमी है। कुछ उदाहरण देखें—

पेंटर: 800 से 1200 रुपए प्रतिदिन

वेल्डर: 1000 रुपए या उससे अधिक

इलेक्ट्रिशियन/प्लंबर: 25 से 40 हजार रुपए मासिक

इतना ही नहीं, ये काम केवल मजदूरी तक सीमित नहीं हैं। अनुभव के साथ यही लोग ठेकेदार बन जाते हैं, अपनी टीम तैयार करते हैं और लाखों का कारोबार खड़ा कर लेते हैं।

स्वरोजगार: असली समाधान

  • अगर युवा छोटे काम को अपनाने में हिचक छोड़ दें, तो वे खुद के मालिक बन सकते हैं। उदाहरण के तौर पर—
  • इलेक्ट्रिशियन अपनी सर्विस कंपनी शुरू कर सकता है
  • वेल्डर अपनी वर्कशॉप खोल सकता है
  • पेंटर ठेके लेकर टीम बना सकता है

आज के दौर में “स्किल” ही असली ताकत है, न कि सिर्फ डिग्री। सच्चाई यह है कि समस्या रोजगार की कमी से ज्यादा ‘काम की पसंद’ की है। युवा काम नहीं, कुर्सी ढूंढ रहे हैं। जब तक यह मानसिकता नहीं बदलेगी, तब तक डिग्रियां फाइलों में दबती रहेंगी और जिंदगी संघर्ष में बीतती रहेगी। पढ़े-लिखे युवाओं को अपनी सोच बदलना होगी। कोई भी काम छोटा नहीं होता, बल्कि हर काम एक अवसर होता है। छोटी शुरुआत ही बड़ी सफलता की नींव होती है। अगर युवा मेहनत को अपनाएं और कौशल विकसित करें, तो न केवल वे खुद आत्मनिर्भर बनेंगे, बल्कि देश की अर्थव्यवस्था को भी मजबूती देंगे।

क्या किसी ने रोबोट मशीनों से सीवरेज चैंबर साफ होते देखा? 

मशीनें नहीं..,सफाईकर्मी चैंबर कर रहे साफ

क खबर, जो 2 अक्टूबर 2020 को सामने आई थी, जिसमें नगर निगम ने कहा था कि इंदौर में अब रोबोट मशीन करेंगी चैंबरों की सफाई। तब दो करोड़ की रोबोटिक चैंबर क्लीनिंग मशीनों का विधिवित उद्घाटन हुआ था। तब कहा गया था कि इंदौर में सफाई में चौका लगाने के बाद अब पांचवीं बार नंबर 1 बनने की तैयारी शुरू कर रहा है और ये उद्घाटन सत्र गांधी जयंती के अवसर पर हुआ था। 

करीब छह साल हो गए हैं इस बात को और इस दौरान कई सफाईकर्मी चैंबर साफ करते हुए मौत की नींद सो गए। कहा गया कि सुरक्षा के उपकरण उनके पास नहीं थे। प्रदेश सरकार ने उनके परिवारों की आर्थिक सहायता भी की। सबसे बड़ी बात है कि व्यवस्था नहीं सुधरी। आज भी इंदौर में कई सफाईकर्मियों को चैंबर में उतरकर सफाई करते देखा जा सकता है।

ऐसा ही एक वाकया 17 अप्रैल 2026 का है। ओल्ड पलासिया में सीवरेज लाइन चोक होने पर सफाईकर्मी पहुंचे और एक सफाई सीवरेज के चैंबर में उतरकर सफाई कर रहा था। जवाबदेही के प्रतिनिधि ने उसे सावधान होने के साथ काम करने कहा, जिस पर उसने सहमति भी जताई और चैंबर साफ किया। दरअसल, नगर निगम ने जो दो करोड़ रुपए से रोबोटिंक चैंबर क्लीनिंग मशीनें खरीदी थी, वो कहां है? क्योंकि इन मशीनों द्वारा कभी सीवरेज चैंबर की सफाई होते दिखाई नहीं देती। हर जगह सफाईकर्मियों को भेजकर चैंबर साफ कराए जा रहे हैं। यदि इन मशीनों का उपयोग नहीं किया गया तो पड़े-पड़े भंगार हो जाएगी, जैसा कि कई बार होता आया है। 

सफाईकर्मियों की जताई थी चिंता

तत्कालीन निगमायुक्त प्रतिभा पाल ने मशीनों के उद्घाटन सत्र के दौरान कहा था कि  नगर निगम के कर्मचारी पाइप लाइन में उतर कर मलवा कूड़ा करकट निकालने का काम करते है, जिसमें दम घुटने सहित कई अन्य प्रकार की बीमारियां भी होती थीं। इन्हीं सबको ध्यान में रखकर तैयार किया हुआ रोबोट अब सीवरेज पाइप लाइन में अंडरग्राउंड 10 मीटर तक सफाई का कार्य करेगा। 

तब कलेक्टर मनीष सिंह ने तारीफ की थी

तब इंदौर कलेक्टर रहे मनीष सिंह ने नगर निगम इंदौर को बधाई देते हुए कहा कि नगर निगम इंदौर अच्छा कार्य कर रहा है। 20 से 30 लाख तक की रोबोटिक मशीनों से अब शहर के चैंबर साफ होंगे।  इंदौर में 2 मार्च 2026 को चोइथराम सब्जी मंडी के पास सीवरेज चैंबर में जहरीली गैस के कारण नगर निगम के दो सफाईकर्मियों (अजय यादव और करण) की दम घुटने से मौत हो गई थी।  इसके पहले भी कई हादसे हो चुके हैं और सफाईकर्मियों की मौत हो चुकी है।

इंदौर में सड़क निर्माण को लेकर कार्रवाई 

आरई-2 प्रोजेक्ट के लिए हटाए बाधक निर्माण

इंदौर में नेमावर रोड से खजराना तक बन रही आरई-2 सड़क परियोजना के तहत सोमवार को बिचौली क्षेत्र में बड़ी कार्रवाई की गई। प्रशासन ने बुलडोजर की मदद से 12 से अधिक निर्माणों को ध्वस्त कर दिया। इन मकानों में वर्षों से परिवार रह रहे थे, जिन्हें पिछले साल ही हटने के नोटिस दिए जा चुके थे।

सोमवार सुबह करीब 10 बजे नगर निगम और प्रशासन की टीम पुलिस बल के साथ मौके पर पहुंची और रहवासियों से घर खाली करने को कहा। कुछ लोगों ने विरोध किया, लेकिन भारी पुलिस बल की मौजूदगी में कार्रवाई जारी रही। करीब दो घंटे में सभी निर्माण जमींदोज कर दिए गए।

मास्टर प्लान के अनुसार सड़क की चौड़ाई 45 मीटर प्रस्तावित है, जबकि फिलहाल 24 मीटर (80 फीट) चौड़ी सड़क का निर्माण किया जा रहा है। इस कार्रवाई के बाद निर्माण कार्य के लिए रास्ता पूरी तरह साफ हो गया है। करीब साढ़े चार किलोमीटर लंबी यह सड़क नायता मुंडला स्थित नए आरटीओ को खजराना क्षेत्र से जोड़ेगी, जिससे बायपास पर यातायात का दबाव कम होगा और शहर के भीतर कनेक्टिविटी बेहतर होगी।

300 परिवारों को विस्थापित किया गया : इस परियोजना के तहत पहले ही 184 परिवारों को विस्थापित कर प्रधानमंत्री आवास योजना के तहत मकान उपलब्ध कराए जा चुके हैं। कुल मिलाकर करीब 300 परिवारों को फ्लैट आवंटित कर शिफ्ट किया गया है। हालांकि, विस्थापन को लेकर पहले काफी विरोध हुआ था और कुछ परिवारों ने कोर्ट से स्टे भी लिया था। अब स्टे खारिज होने के बाद शेष बाधक निर्माणों को हटाने की कार्रवाई की गई।


Post a Comment

Previous Post Next Post