अमेरिका-ईरान तनाव के कारण होर्मुज स्ट्रेट लंबे समय तक बंद रहा, जिसके बाद शुक्रवार को तेहरान ने इसे दोबारा खोलने का ऐलान किया। इससे उम्मीद जगी कि ऊर्जा संकट कम होगा, लेकिन शनिवार को ईरान ने फिर इसे बंद करने का फैसला ले लिया। ईरान ने अमेरिका पर सीजफायर उल्लंघन और नाकेबंदी जारी रखने का आरोप लगाया है। ईरान की संयुक्त सैन्य कमान ने कहा कि अब होर्मुज स्ट्रेट पर सख्त नियंत्रण रखा जा रहा है और जब तक उसके बंदरगाहों पर रोक जारी रहेगी, तब तक आवाजाही भी सीमित रखी जाएगी।

होर्मुज स्ट्रेट एक अहम समुद्री मार्ग है, जहां से दुनिया के लगभग 20% कच्चे तेल की सप्लाई होती है। इसके बंद होने से पहले भी तेल की कीमतों में तेजी आई थी और कई देशों में पेट्रोल-डीजल महंगा हुआ। भारत में भी इसका असर देखा गया, जहां तेल से जुड़े खर्चों में बदलाव और एलपीजी सप्लाई पर दबाव देखने को मिला। दोबारा बंद होने से यह संकट और बढ़ सकता है।

भारत अपनी जरूरत का करीब 85% कच्चा तेल आयात करता है, जिसमें बड़ा हिस्सा खाड़ी देशों से आता है और यह मार्ग उसी स्ट्रेट से गुजरता है। इसके बंद होने से पेट्रोल-डीजल की कीमतों में बढ़ोतरी और महंगाई बढ़ने की आशंका है। ट्रांसपोर्ट महंगा होने से रोजमर्रा की चीजों, खाने-पीने के सामान और लॉजिस्टिक्स पर असर पड़ सकता है, जिससे आम लोगों पर आर्थिक दबाव बढ़ेगा।

हालांकि, स्थिति इस बात पर निर्भर करेगी कि यह मार्ग कितने समय तक बंद रहता है। अमेरिका और ईरान के बीच बातचीत जारी है और उम्मीद जताई जा रही है कि कुछ शर्तों पर सहमति बनने के बाद स्थिति सामान्य हो सकती है और होर्मुज स्ट्रेट फिर से खुल सकता है।

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