भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (ISRO) ने अंतरिक्ष में तिरंगा फहराने के अपने महत्वाकांक्षी मिशन गगनयान मिशन की दिशा में एक और बड़ा कदम बढ़ाया है। सतीश धवन अंतरिक्ष केंद्र में ISRO ने दूसरे इंटीग्रेटेड एयर ड्रॉप टेस्ट (IADT-02) को सफलतापूर्वक पूरा किया।
इस उपलब्धि की जानकारी केंद्रीय मंत्री डॉ. जितेंद्र ने देश के साथ साझा की। यह परीक्षण मानव अंतरिक्ष मिशन की सुरक्षा के लिहाज से बेहद महत्वपूर्ण माना जा रहा है।
इस परीक्षण में एक डमी क्रू मॉड्यूल को कई किलोमीटर ऊंचाई से नीचे गिराया गया। असली चुनौती तब होती है जब अंतरिक्ष यात्री लगभग 400 किलोमीटर की ऊंचाई से पृथ्वी के वायुमंडल में प्रवेश करते हैं। उस समय मॉड्यूल की गति बहुत अधिक होती है, इसलिए सुरक्षित लैंडिंग के लिए पैराशूट का सही क्रम में खुलना बेहद जरूरी होता है।
IADT-02 की सफलता ने साबित कर दिया है कि भारत का पैराशूट सिस्टम और रिकवरी तकनीक पूरी तरह सटीक और भरोसेमंद है। गगनयान मिशन के तहत तीन भारतीय अंतरिक्ष यात्रियों को करीब 3 दिन के लिए अंतरिक्ष में भेजने की योजना है।
इस मिशन की सबसे बड़ी चुनौती अंतरिक्ष यात्रियों को सुरक्षित समुद्र में उतारना है। ISRO की इस सफलता से यह भरोसा और मजबूत हुआ है कि लैंडिंग के दौरान सुरक्षा के सभी मानक पूरे किए जाएंगे।
यह मिशन अगले वर्ष के लिए निर्धारित है और इसकी हर सफलता भारत को उन चुनिंदा देशों की श्रेणी में शामिल करने की दिशा में आगे बढ़ा रही है, जो मानव को अंतरिक्ष में भेजने की क्षमता रखते हैं।

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