सूखा प्रभावित बुंदेलखंड क्षेत्र में वर्षा जल संरक्षण की तकनीक कंटूर ट्रेंचिंग किसानों के लिए काफी फायदेमंद साबित हो रही है। इस तरीके से बारिश का पानी जमीन में ज्यादा समय तक रुकने लगा है, जिससे भूजल स्तर में सुधार देखने को मिला है।
जालौन जिले के कई हिस्सों में पहले किसानों को सिंचाई के लिए बोरिंग से पर्याप्त पानी नहीं मिल पाता था, लेकिन अब किसान पंपिंग सेट से 2–3 घंटे अधिक पानी निकाल पा रहे हैं। इसके कारण धान और बाजरा जैसी खरीफ फसलों के साथ-साथ रबी फसलों की खेती का क्षेत्र भी बढ़ गया है।
स्थानीय स्तर पर चलाए गए जल संरक्षण प्रयासों से दालों और तिलहनों का उत्पादन लगभग 20–30 प्रतिशत तक बढ़ा है। इससे किसानों को आय का एक स्थिर और भरोसेमंद स्रोत मिलने लगा है। कई इलाकों में ऊसर और बंजर जमीन में भी सुधार हुआ है और मिट्टी की उर्वरता बढ़ने लगी है।
कंटूर ट्रेंचिंग के तहत खाइयों को ढलान के समानांतर नहीं बल्कि समोच्च रेखाओं (Contour Lines) के अनुसार बनाया गया है। इससे बारिश का पानी तेजी से नीचे बहने की बजाय इन खाइयों में रुक जाता है और धीरे-धीरे जमीन में समा जाता है।
स्थानीय लोगों के अनुसार, पहले बारिश का पानी कुछ ही घंटों में बह जाता था, लेकिन अब वही पानी ट्रेंचों में जमा होकर जमीन में रिसता है। इससे आसपास के कुओं और हैंडपंपों के जलस्तर में भी सुधार हुआ है और कई जगह सूखी जमीन पर फिर से हरियाली दिखाई देने लगी है।

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