करीब दस वर्ष पुराने सिनर्जी हॉस्पिटल से जुड़े मामले में बड़ी कानूनी राहत मिली है। विशेष न्यायाधीश (पीएमएलए) की कोर्ट ने प्रवर्तन निदेशालय (ED) द्वारा प्रस्तुत खात्मा प्रतिवेदन स्वीकार करते हुए मामले को समाप्त कर दिया है।

दरअसल 31 मार्च 2016 को ईडी ने डॉ. सुबोध जे. सहित अन्य के विरुद्ध ईसीआईआर दर्ज की थी। यह कार्रवाई धोखाधड़ी और छल से जुड़े आरोपों के आधार पर की गई थी, जिनकी दो मूल एफआईआर विजय नगर थाना क्षेत्र में दर्ज थीं।

बाद में इन दोनों एफआईआर में जांच के बाद खात्मा प्रतिवेदन प्रस्तुत किया गया, जिसे 16 दिसंबर 2023 को जेएमएफसी कोर्ट द्वारा स्वीकार कर लिया गया था। इसके बाद ईडी ने भी कोर्ट में खात्मा प्रतिवेदन पेश करते हुए कहा कि जब मूल अपराध ही अस्तित्व में नहीं रहा, तो उसके आधार पर दर्ज ईसीआईआर का प्रचलन संभव नहीं है।

ईडी ने अपने पक्ष में सुप्रीम कोर्ट की तीन जजों की पीठ के एक महत्वपूर्ण फैसले का हवाला भी दिया, जिसमें स्पष्ट किया गया है कि यदि मूल अपराध (प्रेडिकेट ऑफेंस) समाप्त हो जाता है, तो मनी लॉन्ड्रिंग एक्ट के तहत दर्ज मामला भी आगे नहीं चल सकता।

इन तर्कों को स्वीकार करते हुए विशेष न्यायाधीश (पीएमएलए) एस. चौ. की कोर्ट ने ईडी द्वारा प्रस्तुत खात्मा प्रतिवेदन मंजूर कर लिया और मामले का निराकरण कर दिया।

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