इंदौर (ईएमएस) — अपर सत्र न्यायाधीश य. सि. की अदालत में 5 लाख रुपये में नवजात शिशु की कथित अवैध खरीद-फरोख्त के मामले में सुनवाई के दौरान अभियोजन पक्ष सातों आरोपियों पर संदेह से परे आरोप साबित नहीं कर सका। इसके चलते कोर्ट ने छह महिलाओं सहित सभी सात आरोपियों को दोषमुक्त करार देते हुए बरी कर दिया।

यह मामला वर्ष 2022 का है। अभियोजन के अनुसार, थाना हीरानगर में एक समाजसेवी दी. क. की शिकायत पर पुलिस ने शायना बी., पूजा व., नेहा व., नेहा स., नीलम व., लीना य. और अंतरसिंह के खिलाफ प्रकरण दर्ज किया था। पुलिस ने नवजात शिशु को बरामद कर विवेचना के बाद चालान अदालत में पेश किया।

ट्रायल के दौरान शिकायतकर्ता ने स्वयं एफआईआर दर्ज कराने से इनकार करते हुए आरोपियों की पहचान नहीं की। वहीं, मामले के अन्य स्वतंत्र गवाहों ने भी अभियोजन कहानी का समर्थन नहीं किया।

इन परिस्थितियों को देखते हुए अदालत ने यह मानते हुए कि अभियोजन आरोप सिद्ध करने में विफल रहा है, सभी सातों आरोपियों को दोषमुक्त कर दिया।

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