पटना के एक निजी हॉस्टल में नीट की तैयारी कर रही छात्रा की संदिग्ध मौत के मामले में सीबीआई ने जांच तेज कर दी है। गुरुवार को टीम तीसरी बार जहानाबाद पहुंची और मखदुमपुर थाना क्षेत्र स्थित मृतका के पैतृक गांव में परिजनों से लंबी पूछताछ की।
जांच एजेंसी का मुख्य फोकस छात्रा के इलाज के दौरान की परिस्थितियों और हॉस्टल संचालिका के साथ हुई बातचीत पर रहा। अधिकारियों ने मृतका की मां और नानी से करीब तीन घंटे तक गहन पूछताछ की।
सूत्रों के अनुसार, टीम यह समझने की कोशिश कर रही है कि हॉस्टल में रहने के दौरान छात्रा की स्थिति कैसी थी और प्रबंधन की भूमिका क्या रही। जहानाबाद में पूछताछ के बाद टीम गया स्थित छात्रा के ननिहाल पहुंची, जहां मामा और अन्य रिश्तेदारों से भी जानकारी ली गई। बताया जाता है कि छात्रा के चार मामा हैं, जिनमें से दो बाहर नौकरी करते हैं। परिवार के कुछ सदस्य गया में और कुछ गांव में रहते हैं। सभी संबंधित लोगों के सामूहिक बयान दर्ज किए गए हैं।
सीबीआई ने गुरुवार को कदमकुआं थाना के निलंबित दारोगा हेमंत J. से करीब चार घंटे पूछताछ की। एफएसएल रिपोर्ट आने के बाद सबूत इकट्ठा करने में कथित लापरवाही के आरोप में एसआई हेमंत J. और एक अन्य थानेदार R. K. को निलंबित किया गया था।
जांच के दौरान यह सवाल भी उठाया गया कि छात्रा को अस्पताल पहुंचाने के बाद उसके कपड़े क्यों जब्त नहीं किए गए। परिजनों को कपड़े कैसे मिले और पुलिस को किस आधार पर सौंपे गए। पोस्टमार्टम और एफएसएल रिपोर्ट में दुष्कर्म की आशंका सामने आने के बावजूद मामले को आत्महत्या कैसे माना गया — यह भी जांच का हिस्सा है।
इस बीच एक सांसद P. Y. ने सोशल मीडिया पर लाइव आकर पुलिस अधिकारियों की कार्यशैली पर सवाल उठाए। उन्होंने पूछा कि एक आरोपी को किस मामले में गिरफ्तार किया गया और हॉस्टल मालिक के खिलाफ अब तक क्या कार्रवाई हुई है।
मृतका के चाचा ने कहा कि परिवार अपने संदेह पर कायम है। उनका कहना है कि घटना से जुड़े कई रहस्य हॉस्टल परिसर के भीतर ही छिपे हो सकते हैं। उन्होंने जांच एजेंसी से हॉस्टल संचालिका, उसके परिजन और वार्डेन को आमने-सामने बैठाकर पूछताछ करने की मांग की है।

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