इंदौर शहर के एक पुराने थाना क्षेत्र में बुधवार सुबह करीब 8 बजे अचानक हलचल बढ़ गई, जब नगर निगम की टीम पुलिस बल के साथ कार्रवाई के लिए पहुंची। न्यायालय के आदेश के तहत दो मकानों के चार कमरों को तोड़ा गया।

जैसे ही जेसीबी मशीन आगे बढ़ी, घरों के भीतर मौजूद महिलाएं और बच्चे बाहर निकल आए। कोई जल्दी-जल्दी सामान समेटता नजर आया तो कोई हाथ जोड़कर गुहार लगाता दिखा। कुछ ही देर में गली में रोने-बिलखने की आवाजें गूंजने लगीं।

कार्रवाई से पहले निगम कर्मचारियों ने परिवारों का घरेलू सामान बाहर रखवाया। इसके बाद निर्धारित चार कमरों को ढहा दिया गया। मौके पर एहतियातन पुलिस बल तैनात रहा ताकि स्थिति नियंत्रण में रहे।

निगम अधिकारियों के अनुसार, संबंधित मकान पुराने और जर्जर घोषित किए गए थे तथा उन्हें हटाने के लिए न्यायालय का आदेश प्राप्त था। संभावित दुर्घटना को रोकने के उद्देश्य से यह कार्रवाई की गई।

मौके पर मौजूद महिलाओं ने कहा, “हमारे पास रहने के लिए दूसरा घर नहीं है। बच्चों की परीक्षाएं चल रही हैं। ऐसे समय में मकान तोड़ दिया गया, अब हम कहां जाएं?”

परिवारों का दावा है कि मकान एक मंजिला था और उस पर टीन शेड लगा था, जिससे वह खतरनाक नहीं था। उनका यह भी आरोप है कि आसपास के अधिक जर्जर भवनों पर कार्रवाई नहीं की गई। 

प्रभावित परिवारों का कहना है कि यह उनकी पैतृक संपत्ति है। उनका आरोप है कि संपत्ति का सौदा लगभग 14 लाख रुपये में तय हुआ था, लेकिन पूरी राशि नहीं दी गई। इसके बाद भवन को जर्जर घोषित कर कानूनी प्रक्रिया के जरिए तुड़वा दिया गया।

हालांकि, अधिकारियों का कहना है कि पूरी कार्रवाई न्यायालय के आदेश के तहत नियमानुसार की गई है।

कार्रवाई के बाद गली में मलबा और बिखरा सामान पड़ा रहा। महिलाएं बच्चों को संभालती नजर आईं और क्षेत्र में देर तक सन्नाटा तथा लोगों की भीड़ बनी रही।

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