इंदौर जिले के ग्रामीण इलाकों में तेंदुओं की गतिविधियां लगातार बढ़ रही हैं। महू से लेकर देवगुराड़िया तक फैले इस खतरे ने स्थानीय निवासियों में डर का माहौल बना दिया है। देवगुराड़िया के पास सनावदिया गांव में वन विभाग ने एक तेंदुए को पिंजरे में फंसा कर रेस्क्यू किया और चिड़ियाघर भेज दिया।

वहीं, महू स्थित आर्मी वॉर कॉलेज परिसर में तेंदुए की गतिविधियां अभी भी जारी हैं। पिछले एक सप्ताह में तेंदुओं ने कई बकरों और बकरियों को अपना शिकार बनाया, जिससे गांववासियों में दहशत फैल गई है।

पिछले सात दिनों से देवगुराड़िया और सनावदिया क्षेत्र में तेंदुओं की मौजूदगी की लगातार सूचनाएं मिल रही थीं। वन विभाग ने तेंदुओं के मूवमेंट पर नजर रखते हुए शिकार के प्रमाण मिलने के बाद एक सप्ताह पहले पिंजरा लगाया था। आज सुबह तेंदुआ उसमें फंसा हुआ मिला, माना जा रहा है कि वह देर रात पिंजरे में कैद हुआ।

इस मामले में क्षेत्रीय जनप्रतिनिधि मधु व. ने भी अधिकारियों से चर्चा की।
रेस्क्यू टीम के प्रभारी और रालामंडल रेंजर योगेश या. ने बताया कि तेंदुए को स्वास्थ्य परीक्षण के लिए कमला नेहरू प्राणी संग्रहालय भेज दिया गया है। टीम ने त्वरित कार्रवाई करते हुए तेंदुए को सुरक्षित स्थानांतरित किया। रेस्क्यू ऑपरेशन सुबह करीब 7 बजे पूरा हुआ।

तेंदुए के पकड़े जाने के बाद गांववासियों ने राहत की सांस ली, हालांकि वे अब भी सतर्क हैं। एक स्थानीय निवासी ने बताया कि पिछले सप्ताह से रात में बाहर निकलना मुश्किल हो गया था, लेकिन अब हालात सुधरने की उम्मीद है।

दूसरी ओर, महू के आर्मी वॉर कॉलेज परिसर में तेंदुए की गतिविधियां पिछले तीन दिनों से देखी जा रही हैं। वन विभाग के अनुसार, कॉलेज कर्मचारियों ने तेंदुए को परिसर में घूमते हुए देखा है। यह न केवल कैमरों में कैद हुआ, बल्कि कर्मचारियों ने इसे झाड़ियों में जाते हुए भी देखा।

स्थिति को देखते हुए वन विभाग ने इलाके में तीन नाइट विजन ट्रैप कैमरे लगाए हैं। अधिकारियों ने बताया कि कैमरों के जरिए तेंदुए की लोकेशन की जांच की जा रही है और टीम 24 घंटे निगरानी कर रही है।

जंगल सिमटने से बढ़ी चुनौती

आर्मी वॉर कॉलेज के एक कर्मचारी ने नाम न छापने की शर्त पर बताया कि परिसर बड़ा है और आसपास जंगली इलाका होने से तेंदुए का आना स्वाभाविक है, लेकिन सुरक्षा के लिए वन विभाग की सतर्कता जरूरी है।

वन विभाग के अनुसार, इंदौर जिले में तेंदुओं की संख्या बढ़ रही है और उनका मूवमेंट अब शहर की सीमाओं तक पहुंच रहा है। विशेषज्ञों का मानना है कि जंगलों के सिमटने और मानवीय अतिक्रमण के कारण तेंदुए भोजन की तलाश में गांवों और शहरी इलाकों की ओर आ रहे हैं।

वन विभाग आगे और पिंजरे लगाने के साथ-साथ स्थानीय लोगों को जागरूक करने के लिए विशेष कैंप आयोजित करने की योजना बना रहा है।

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