नई दिल्ली।
भारत में घुटनों की समस्या अब केवल बुज़ुर्गों तक सीमित नहीं रही। आर्थराइटिस, खेलों में चोट, मोटापा, लंबे समय तक बैठकर काम करना और कोविड के बाद की जटिलताओं के चलते युवा और मध्यम आयु वर्ग में भी घुटना सर्जरी के मामले तेजी से बढ़ रहे हैं। ऐसे में मरीजों के सामने यह सवाल अहम हो गया है कि पारंपरिक घुटना सर्जरी कराएं या रोबोटिक, और इसका खर्च व इंश्योरेंस कवरेज क्या होगा।
पारंपरिक घुटना सर्जरी में सर्जन अपने अनुभव और सामान्य उपकरणों से खराब जोड़ को बदलता है। यह तकनीक लंबे समय से उपयोग में है और लगभग हर बड़े अस्पताल में उपलब्ध है। भारत में एक घुटने की पारंपरिक सर्जरी का खर्च आमतौर पर ₹1.8 लाख से ₹3.5 लाख के बीच होता है।
रोबोटिक घुटना सर्जरी में कंप्यूटर-नियंत्रित सिस्टम सर्जन को इम्प्लांट अधिक सटीक तरीके से लगाने में मदद करता है। इससे दर्द कम, रिकवरी तेज और भविष्य में दोबारा सर्जरी की संभावना कम हो सकती है। हालांकि इसकी लागत ज्यादा होती है। एक घुटने की रोबोटिक सर्जरी का खर्च ₹3.5 लाख से ₹6.5 लाख तक हो सकता है।
इंश्योरेंस कवरेज की बात करें तो अधिकतर हेल्थ पॉलिसी घुटना प्रत्यारोपण सर्जरी को कवर करती हैं, लेकिन रोबोटिक सर्जरी में अतिरिक्त शुल्क पर सब-लिमिट या आंशिक भुगतान की शर्तें लागू हो सकती हैं। रूम रेंट लिमिट, इम्प्लांट कैप, मॉडर्न ट्रीटमेंट क्लॉज और 2–3 साल का वेटिंग पीरियड क्लेम को प्रभावित कर सकता है।
अस्पताल में दी जाने वाली फिजियोथेरेपी आमतौर पर कवर होती है, जबकि डिस्चार्ज के बाद की फिजियोथेरेपी कई पॉलिसियों में शामिल नहीं होती।
विशेषज्ञों के अनुसार, सीमित बजट और सामान्य केस में पारंपरिक सर्जरी उपयुक्त है, जबकि बेहतर सटीकता और तेज रिकवरी चाहने वाले मरीजों के लिए रोबोटिक सर्जरी बेहतर विकल्प हो सकती है। क्लेम से जुड़ी परेशानी से बचने के लिए सर्जरी से पहले प्री-ऑथराइजेशन और पॉलिसी शर्तों की जांच जरूरी है।

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