इंदौर के भागीरथपुरा क्षेत्र में दूषित पानी से अब तक 15 लोगों की मौत के बाद नगर निगम और प्रशासन की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं। नगर निगम और प्रशासनिक अधिकारियों के बीच जिम्मेदारी को लेकर चल रही खींचतान के बीच यह मामला अब राजनीतिक बहस का विषय बन गया है। सत्ता पक्ष और विपक्ष, दोनों ही ओर से प्रशासनिक लापरवाही को लेकर तीखी प्रतिक्रियाएं सामने आ रही हैं।

प्रदेश की एक वरिष्ठ नेता और पूर्व मुख्यमंत्री ने अपनी ही सरकार और सिस्टम पर सवाल उठाते हुए नगर प्रशासन की भूमिका पर कड़ी टिप्पणी की है। उन्होंने सोशल मीडिया पर लिखा कि जब जिम्मेदारी निभाई नहीं जा सकी, तो पद पर रहते हुए जनता से दूरी क्यों बनाई गई। उन्होंने कहा कि ऐसे मामलों में न तो कोई स्पष्टीकरण स्वीकार्य होता है और न ही बचाव, बल्कि जवाबदेही तय होनी चाहिए।

पूर्व मुख्यमंत्री ने दूषित पानी से हुई मौतों को पूरी व्यवस्था के लिए शर्मनाक बताते हुए कहा कि किसी भी मुआवजे से जान की कीमत नहीं चुकाई जा सकती। पीड़ित परिवारों का दर्द जीवनभर बना रहता है। उन्होंने दोषियों पर सख्त कार्रवाई, पीड़ित परिवारों से माफी और प्रशासनिक जवाबदेही की मांग की है।

वहीं विपक्षी नेताओं ने भी इस घटना को प्रशासन की गंभीर लापरवाही बताते हुए सरकार को कटघरे में खड़ा किया है। पूरे मामले को लेकर अब प्रदेश की राजनीति में आरोप-प्रत्यारोप तेज हो गए हैं, जबकि प्रभावित क्षेत्र के लोग अब भी जवाब और न्याय की प्रतीक्षा कर रहे हैं।

Post a Comment

Previous Post Next Post