इंदौर में दूषित पानी से मौत के मामले में राज्य सरकार ने अपनी स्टेटस रिपोर्ट हाईकोर्ट में पेश कर दी है। जनहित याचिका पर सुनवाई करते हुए कोर्ट ने मामले की अगली सुनवाई की तारीख 6 जनवरी तय की है। स्टेटस रिपोर्ट में सरकार ने दावा किया है कि गंदे पानी से अब तक चार लोगों की मौत हुई है, जबकि दूसरी ओर 15 मौतों की जानकारी सामने आ रही है, जिससे आंकड़ों को लेकर सवाल खड़े हो गए हैं।

विशेषज्ञों के अनुसार दूषित पानी का अर्थ उसमें हानिकारक बैक्टीरिया की मौजूदगी से है। हालांकि किस बैक्टीरिया के कारण संक्रमण फैला, इसकी पुष्टि के लिए स्पेशल कल्चर जांच की जाती है। ड्रेनेज के पानी में कई प्रकार के घातक तत्व होते हैं, जिनमें टॉयलेट से निकलने वाला मल-मूत्र, बाथरूम का गंदा पानी, कपड़े धोने में इस्तेमाल होने वाला साबुन और पाउडर शामिल होते हैं।

इसके अलावा बर्तन धोने के साबुन, फर्श साफ करने वाले केमिकल और अन्य घरेलू व औद्योगिक अपशिष्ट भी ड्रेनेज में मिल जाते हैं। यदि किसी क्षेत्र में व्यावसायिक इकाइयों का केमिकल वेस्ट भी इसमें शामिल हो जाए, तो यह मिश्रण और अधिक खतरनाक हो जाता है। जब ऐसा दूषित पानी पीने की पानी की लाइन में मिल जाता है, तो स्थिति बेहद गंभीर हो सकती है।

विशेषज्ञों का कहना है कि ऐसी स्थिति में शिगेला (Shigella), साल्मोनेला (Salmonella), हैजा (Cholera) और ई-कोलाई (Escherichia coli) जैसे बैक्टीरिया पनप सकते हैं। इनमें से किसी एक बैक्टीरिया के कारण ही यह जानलेवा स्थिति उत्पन्न हुई हो सकती है।

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