मध्यप्रदेश के ऐसे है हाल....
जवाबदेही @ इंदौर
मध्यप्रदेश में भ्रष्टाचार चरम पर है। ऐसा नहीं है कि भ्रष्टाचार बीजेपी के शासनकाल में ही हो रहा है, बल्कि कांग्रेस के कार्यकाल में भी भ्रष्टाचार चरम पर रहा है। लेकिन किसी भी मुख्यमंत्री ने ऐसी कार्रवाई कभी नहीं की, जैसे पंजाब में हुई है। अपनों को बचाने की नीति प्रदेश में सबसे हावी रही है। हमारे प्रदेश में कार्रवाई होती है, लेकिन एक-दूसरे को नीचा दिखाने की, एक-दूसरे पर तंज कसने की। गत सप्ताह ही मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान ने गर्जना की कि भ्रष्टों को बर्खास्त करो और गरीबों का पैसा खाने वालों को तोड़ दो...। बड़ा सवाल यही है कि भ्रष्टों को कौन उखाड़कर फेंकेगा।
जवाबदेही इस बात को प्रमुखता से प्रकाशित करता रहा है कि आखिर भ्रष्टाचारियों का निलंबन क्यों? उन्हें सीधे बर्खास्त कर जेल क्यों नहीं भेजा जाता। इसके पीछे भी कानूनी दांव-पेंच ही है, कि भ्रष्टाचार निवारण कानून में घूसखोर को जिमानत देने का प्रावधान नहीं है, लेकिन सीआरपीसी की धारा -41 की व्याख्या के आधार पर गिरफ्तार नहीं किया जाता। जानकारों की माने तो सुप्रीम कोर्ट ने 7 साल से कम की सजा में मौके पर जमानत देने का निर्णय किया है। इसी आधार पर ये घूसखोर छोड़ दिए जाते हैं। इससे देश का ही नुकसान हो रहा है, क्योंकि ईमानदार आदमी को काम करने का मौका ये बेईमान देना ही नहीं चाहते। प्रदेश की सरकार शिवराज सिंह के हाथ में है, लेकिन हकीकत इसके उलट है। प्रदेश की सरकार अफसर चला रहे हैं। अफसर तंत्र इतना हावी हो चुका है कि वो मुख्यमंत्री पद को प्रोटोकाल के तहत ही तवज्जो दे रहा है।
खिलौना जानकर तुम तो मेरा दिल तोड़े जाते हो...
आंगनबाड़ी केंद्रों के लिए 10 ट्रक (पिकअप एवं 407 वाहन) सामान और दो करोड़ रुपये इकठ्ठे हुए हैं।
भोपाल में अशोका गार्डन क्षेत्र स्थित मां मंशादेवी मंदिर की गली में मंगलवार को ‘आया रे खिलौने वाला खेल-खिलौने लेके आया रे” गीत गूंज रहा था। प्रदेश के मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान आंगनबाड़ी के बच्चों के लिए जनसहयोग से खिलौने इकठ्ठे करने ठेला लेकर निकले। फूलों से सजा हाथ ठेला लेकर ‘मामा’ शिवराज करीब आठ सौ मीटर का सफर पौने तीन घंटे में तय कर पाए। इस दौरान हजारों लोगों ने टीवी, बर्तन, कैरम बोर्ड, खेल-खिलौने सहित आंगनबाड़ी केंद्रों के लिए उपयोगी सामान दान किया।
कमलनाथ बोले-
जवाबदारी निभाने के समय नाटक-नौटंकी में लग जाते हैं
इधर पूर्व मुख्यमंत्री कमलनाथ ने कहा कि जब जिम्मेदारी निभाने का समय आता है तो उससे भाग कर मुख्यमंत्री इंवेट-नाटक-नौटंकी में लग जाते हैं। कमलनाथ ने कहा कि आज जब प्रदेश में कुपोषण निरंतर बढ़ता जा रहा है, मध्य प्रदेश कुपोषण के मामले में देश में शीर्ष पर पहुंच चुका है, आज आवश्यकता है कि बच्चों को ठीक पोषण आहार मिले, वो सुपोषित हों,आंगनवाड़ी के बच्चों को सभी सुविधाएं मिले, इसको लेकर ठीक कार्ययोजना बने, इसके नाम पर चली आ रही योजनाओं में जो वर्षों से भ्रष्टाचार व घोटाले हो रहे हैं, उस पर रोक लगे, लेकिन हमारे शिवराज जी एक बार फिर जिम्मेदारी निभाने की बजाय, इससे भागकर अब ठेला लेकर सड़कों पर निकल पड़े हैं। कमलनाथ ने कहा कि अब वो जनता से सहयोग मांग रहे हैं। बड़ा ही शर्मनाक है कि इस कार्यक्रम को भी इवेंट बनाकर, इसके प्रचार-प्रसार पर ही करोड़ों खर्च किये जा रहे हैं। जबकि इस राशि से कई आंगनवाड़ियों की दशा सुधारी जा सकती थी। कमलनाथ ने कहा शिवराज सरकार ने विधानसभा में स्वीकारा है कि मध्य प्रदेश में अभी भी 10 लाख 32 हजार 166 बच्चे कुपोषित हैं और इसमें से 6 लाख 30 हजार 90 बच्चे अति कुपोषित श्रेणी में हैं।

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