घर ढोल बजाने वाले की वजह से गिरा...! बात अजीब और अटपटी है, लेकिन कहीं-कहीं सही भी साबित होती है..., तो चलिए जानते हैं घर ढोल बजाने वाले की वजह से कैसे गिरा...। एक सरकारी भवन बनना था, जिसके लिए कार्ययोजना तैयार की गई। भवन को लेकर टेंडर प्रक्रिया हुई..। शर्तों के अनुसार ठेकेदार को काम दिया गया और तय समय में सरकारी भवन बनकर तैयार हुआ..। अब भवन के उद््घाटन का समय तय किया गया और तमाम सरकारी अफसर, नेता और ठेकेदार इस कार्यक्रम में मौजूद थे। उद््घाटन समारोह में उत्साह बढ़ाने के लिए ढोल वाले को भी बुलाया गया था और वह ढोल बजा रहा था...। कार्यक्रम चल ही रहा था कि भवन का कुछ हिस्सा गिर गया और कई जगह से भवन क्षतिग्रस्त हो गया...? सवाल उठने लगे कि आखिर कैसे नवनिर्मित भवन क्षतिग्रस्त हो गया...। जांच कमेटी बैठाई गई...! टेंडर की शर्तों को देखा गया। मटेरियल की जांच की गई..जो सही पाई गई। जांच में सभी के द्वारा किया गया काम ईमानदारी से करना पाया गया...! लेकिन सवाल फिर भी उठ रहा था कि आखिर भवन गिरा तो कैसे गिरा...? अंत में जांच कमेटी ने अपनी जांच में लिखा कि भवन निर्माण सामग्री उच्च क्वालिटी की थी, कहीं कोई गड़बड़ी नहीं हुई... भवन गिरने की वजह ढोली द्वारा ढोल जोर से बजाना पाया गया। इस वजह से भवन में कंपन हुआ, जिससे वह क्षतिग्रस्त हुआ...! और फाइल बंद कर ढोल वाले पर कार्रवाई की बात कही जाने लगी....!
सुपर कॉरिडोर करीब 43 करोड़ रुपए में बनकर तैयार हुआ है। इस पर बने आठ लेन वाले पुल का एक टुकड़ा जो करीब दो फुट लंबा और तीन फुट चौड़ा टूटकर गिर गया और सरिए दिखने देने लगे। मामला मीडिया में छा गया और अफसर, एक्सपर्ट सभी मौके पर पहुंच गए और जांच शुरू की गई। कहा गया -
1 स्लैब लांच करते करते वक्त सीमेंट-कांक्रीट की फिलिंग में गैप रह गई होगी।
2 कुछ दिन पहले लोहे की 8 से 10 टन वजनी क्वाइल गिर गई थी।
3 जहां गड्ढा हुआ वहां पर ब्रेक लगाने की भी जरूरत पड़ती है। ब्रेक लगने से जो प्रेशर पड़ता है, उससे भी गड्ढा हो सकता है।
अब एक्सपर्ट ने सुझाव दिया है कि गड्ढे वाले हिस्से की माइक्रो कांक्रीटिंग से फिलिंग की जाएगा। यह फिलिंग एकदम साॅलिड होगी और किसी तरह का खोखलापन नहीं रह जाएगा। रिपेयरिंग होने के बाद इसकी वजन सहने की क्षमता भी आंकी जाएगी। बड़ी आसानी से और हाथ बचाकर सभी ने अपनी-अपनी राय प्रकट कर दी। ब्रिज पर काम शुरू हो गया है और दावा किया जा रहा है कि यह थेगला काफी मजबूत रहेगा। दूसरी ओर अब पंचायत चुनाव होने हैं और आचार संहिता लगने से पहले विकास कार्यों के लिए उद्घाटन, शिलान्यास जैसे कार्यक्रम प्रदेशभर में हो रहे हैं। आनन-फानन में किए गए विकास कार्यों की पोल-पट्टी भी सामने आ रही है, कि किस तरह से त्वरित निर्माण कार्य घटिया तरीके से किए जा रहे हैं। गौरी नगर चौराहे पर शहीद ज्ञानसिंह परिहार चौराहे की है, जिसका उद्घाटन करीब पंद्रह दिन पहले किया गया। इस चौराहे से लगी बाउंड्रीवॉल जो टूटने लगी है, बता रही है कि कैसा निर्माण किया गया। टूट-फूट छुपाने का तरीका नगर निगम के भ्रष्ट अधिकारियों ने ठेकेदार के साथ मिलकर निकाल लिया है और उस पर रंगरोगन कर लीपापोती कर दी। ठीक इसी प्रकार का एक मामला और सामने आया। नगर निगम के अफसर ठेकेदारों के साथ मिलकर घटिया सड़क बना रहे हैं। मामला कृष्णबाग कॉलोनी का है, जो विजय नगर जोनल कार्यालय में आती है। निगम के दस्तावेजों में सड़क 6 इंच मोटाई वाली बन रही है, लेकिन हकीकत में इस सड़क पर मात्र 3 इंच का कांक्रीट बिछाकर आधी रकम का घोटाला किया जा रहा है। नगर निगम की जिम्मेदारी है कि शहर में जो विकास कार्य हो रहे हैं, उसका निर्माण गुणवत्तापूर्वक हो, लेकिन बरसों से सब ऐसा ही चल रहा है। आरोप भी लगते आ रहे हैं कि 3 प्रतिशत का गणित विकास कार्यों की गुणवत्ता में कमी लाने का काम करता आ रहा है। अब बारिश आने में कुछ ही दिन शेष बचे हैं। हम स्वच्छता में तो आगे बढ़ चुके हैं, लेकिन सुरक्षा को लेकर दावा नहीं किया जा सकता...। जल-जमाव की स्थिति शहर में बनेगी और फिर किसी ( बेकसूर पर कार्रवाई की जाएगी...)
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