मणिपुर के राहत शिविरों में हुई मौतों और यौन उत्पीड़न से जुड़े मामलों को लेकर सुप्रीम कोर्ट ने राज्य सरकार से जवाब मांगा है। अदालत ने राहत शिविरों में हुई 25 संदिग्ध मौतों पर चिंता जताते हुए मुख्य सचिव को सभी मामलों की पोस्टमार्टम रिपोर्ट पेश करने का निर्देश दिया है।

सुनवाई के दौरान पूर्व मुख्य न्यायाधीश गीता मित्तल की अध्यक्षता वाली समिति की रिपोर्ट का हवाला देते हुए पीठ ने राहत शिविरों में रह रहे विस्थापित लोगों की सुरक्षा और सम्मान को लेकर सवाल उठाए। राज्य सरकार की ओर से पर्याप्त जानकारी नहीं दिए जाने पर सीजेआई सूर्यकांत ने मुख्य सचिव से अब तक उठाए गए कदमों की जानकारी अदालत के सामने रखने को कहा।

सुप्रीम कोर्ट को बताया गया कि मणिपुर के आठ जिलों के राहत शिविरों में कुल 640 मौतें दर्ज हुई हैं। इनमें सिर्फ 20 मामलों में पोस्टमार्टम कराया गया। अदालत ने कुछ मामलों में 20 से 30 हजार रुपये तक का मुआवजा दिए जाने पर भी राज्य सरकार से स्पष्टीकरण मांगा है।

सरकार की ओर से बताया गया कि हिंसा से जुड़े मामलों की जांच के लिए आठ जिलों में 42 एसआईटी बनाई गई हैं। कुल 3020 मामलों की जांच चल रही है। इनमें 302 मामलों में चार्जशीट दाखिल हो चुकी है, जबकि 1583 मामलों में क्लोजर रिपोर्ट पेश की गई है।

पीठ ने एमएसएलएसए को निर्देश दिया कि इन एफआईआर की जांच जल्द पूरी कराने के साथ राहत शिविरों में रह रहे विस्थापित लोगों की सुरक्षा और गरिमा सुनिश्चित की जाए। अदालत ने यह निर्देश न्यायमूर्ति मित्तल समिति और एक आईएएस अधिकारी की रिपोर्ट पर विचार करने के बाद दिया। रिपोर्ट में राहत शिविरों में 30 से अधिक मौतों का उल्लेख था। इनमें एक मौत कथित तौर पर यौन उत्पीड़न के बाद होने की बात भी सामने आई थी।

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