रूस के सैन्य ठिकानों और तेल रिफाइनरियों पर यूक्रेन के लगातार ड्रोन हमलों ने राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन के लिए नई चुनौती खड़ी कर दी है। चार वर्ष पहले जिस युद्ध में रूस को जल्द जीत की उम्मीद थी, उसी संघर्ष में अब यूक्रेन की गुप्त ड्रोन इकाइयां रूस के भीतर तक हमले कर रही हैं। इन अभियानों ने रूस की सुरक्षा व्यवस्था और रणनीति पर दबाव बढ़ा दिया है।

मीडिया रिपोर्टों के अनुसार, इन अभियानों को अंजाम देने वाले सैनिक बेहद गोपनीय तरीके से काम करते हैं। उनकी पहचान, चेहरा, फोन नंबर और निजी जानकारी पूरी तरह छिपाकर रखी जाती है। यूनिट के सदस्य सख्त सुरक्षा नियमों का पालन करते हैं और उनकी गतिविधियों के बारे में बहुत सीमित लोगों को ही जानकारी होती है।

रिपोर्ट के मुताबिक, इस यूनिट का एक सदस्य, जिसे यहां डेनिस कहा गया है, वर्ष 2025 से इन अभियानों में शामिल है। उसके करीबी दोस्तों और माता-पिता तक को उसकी वास्तविक जिम्मेदारी की जानकारी नहीं है। इस यूनिट ने रूस के भीतर कई महत्वपूर्ण ठिकानों को निशाना बनाया है। जून में मॉस्को की एक तेल रिफाइनरी पर हुए हमले के बाद राजधानी के आसमान में घना काला धुआं दिखाई दिया था। इसके अलावा, सेंट पीटर्सबर्ग में एक अहम अंतरराष्ट्रीय सम्मेलन के दौरान भी हमला किया गया था।

यूक्रेन का कहना है कि ये कार्रवाई रूस द्वारा यूक्रेनी शहरों पर लगातार की जा रही रात की बमबारी का जवाब है। बताया जाता है कि यूक्रेन हर सप्ताह रूस के ईंधन डिपो और तेल रिफाइनरियों को निशाना बनाकर उसकी ऊर्जा आय और सैन्य आपूर्ति क्षमता को कमजोर करने की कोशिश कर रहा है। डेनिस के अनुसार, ये सभी लक्ष्य रूस के लिए रणनीतिक रूप से बेहद महत्वपूर्ण हैं, इसलिए मिशन की गोपनीयता बनाए रखना सबसे बड़ी प्राथमिकता होती है।

इस विशेष यूनिट के सदस्यों की उम्र, पहचान और चेहरे सार्वजनिक नहीं किए जाते। उनकी तस्वीरें या वीडियो रिकॉर्ड करना भी पूरी तरह प्रतिबंधित है। यूनिट के एक अन्य सदस्य, जिसे यहां वोरोन के रूप में उल्लेख किया गया है, ने बताया कि वे जानते हैं कि उनकी पहचान उजागर होने पर उनके परिवार और स्वयं उनकी सुरक्षा खतरे में पड़ सकती है। इसी कारण वे अपनी निजी जिंदगी में भी पूरी सावधानी बरतते हैं।

वोरोन पहले चित्रकार और मार्शल आर्ट प्रशिक्षक के रूप में काम करते थे। वह विवाहित हैं और एक बच्चे के पिता हैं। उनके अनुसार, उनकी पत्नी को उनके काम को लेकर कुछ अंदाजा है, लेकिन वह इस बारे में सवाल नहीं करती। परिवार और मित्र अब भी यही मानते हैं कि वह विशेष सैन्य बल में तैनात हैं।

सैन्य खुफिया से जुड़े एक अधिकारी ने बताया कि सामान्य जीवन में इन कर्मियों की पहचान करना लगभग असंभव होता है। वे आम नागरिकों की तरह शर्ट और जींस पहनकर रहते हैं और सार्वजनिक स्थानों पर किसी भी मिशन से जुड़ी चर्चा नहीं करते। यहां तक कि टेकऑफ या विंग जैसे सैन्य अभियानों से जुड़े शब्दों का इस्तेमाल भी पूरी तरह प्रतिबंधित रहता है।

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