पश्चिम बंगाल के बीरभूम जिले में पुलिस ने बुधवार देर रात की गई छापेमारी में करीब ₹28.5 करोड़ नकद और 15 किलो सोना बरामद किया है। पुलिस के अनुसार, जब्त किए गए सोने की अनुमानित कीमत करीब ₹21.5 करोड़ है। इस तरह कुल बरामदगी लगभग ₹50 करोड़ की बताई जा रही है। नकदी इतनी अधिक थी कि उसे गिनने के दौरान पांच करेंसी काउंटिंग मशीनें खराब हो गईं।


कार्रवाई के दौरान पुलिस ने मिनार नामक आरोपी को गिरफ्तार किया। शुरुआती जांच में सामने आया कि वह पहले राज्य परिवहन विभाग में बस चालक था और बाद में पत्थर के कारोबार से जुड़ गया। पुलिस के मुताबिक, वह फरार कारोबारी तुलु उर्फ मोहम्मद नजीबुद्दीन का मैनेजर और रिश्तेदार है। इसी कारोबारी ने वर्ष 2024 में अपनी बेटी की करीब ₹100 करोड़ की भव्य शादी आयोजित की थी।

पुलिस ने गुप्त सूचना मिलने के बाद बुधवार रात आरोपी के घर पर छापा मारा। शुरुआत में करीब ₹20 करोड़ नकद मिला, लेकिन पूरी रात चली गिनती के बाद यह राशि बढ़कर ₹28.5 करोड़ पहुंच गई। जब्त नकदी को लोहे के बक्सों में भरकर थाने लाया गया, जहां से बैंक में जमा कराने की प्रक्रिया शुरू की गई।

छापेमारी के दौरान पुलिस ने 1-1 किलो के 14 गोल्ड बार और 100-100 ग्राम के 10 गोल्ड बिस्किट भी बरामद किए। इनकी कुल अनुमानित कीमत करीब ₹21.5 करोड़ बताई गई है। पूछताछ में गिरफ्तार आरोपी ने दावा किया कि नकदी और सोना फरार कारोबारी का है।

जांच एजेंसियां अब यह पता लगाने में जुटी हैं कि इतनी बड़ी मात्रा में नकदी और सोना कहां से आया और इस पूरे मामले में किन-किन लोगों की भूमिका रही। पुलिस को संदेह है कि बरामद रकम का बड़ा हिस्सा पत्थर खदानों से वसूले गए सरकारी राजस्व से जुड़ा हो सकता है, जिसे सरकारी खजाने में जमा कराने के बजाय कथित रूप से हड़प लिया गया।

प्रारंभिक जांच के अनुसार, वर्ष 2016-17 के आसपास फरार कारोबारी ने बीरभूम की स्टोन क्वारियों में डिस्ट्रिक्ट कलेक्शन रेट (DCR) की वसूली का काम संभाला था। यह पत्थर खनन पर लगाया जाने वाला सरकारी शुल्क है, जिसकी वसूली का जिम्मा एक निजी कंपनी को दिया गया था। आरोप है कि इसी प्रक्रिया में करोड़ों रुपये की अनियमितताएं हुईं। हालांकि, इन आरोपों की जांच जारी है।

फरार कारोबारी का नाम पहले भी विभिन्न जांच एजेंसियों की जांच में सामने आ चुका है। वर्ष 2022 में केंद्रीय एजेंसियों ने उसके ठिकानों पर छापेमारी की थी और बाद में पूछताछ के लिए भी तलब किया था। हालांकि, इन मामलों में अब तक कोई अंतिम न्यायिक फैसला नहीं आया है।

इस कार्रवाई के बाद राज्य की सियासत भी गर्मा गई है। विभिन्न नेताओं ने मामले की निष्पक्ष जांच की मांग करते हुए कहा कि यह स्पष्ट होना चाहिए कि बरामद नकदी और सोना किसका है तथा इसके पीछे किन लोगों की भूमिका है।

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