अमेरिका के मैसाचुसेट्स राज्य के केप कॉड समुद्री तट पर दुनिया की सबसे बड़ी जेलीफिश प्रजातियों में गिनी जाने वाली लायंस मेन जेलीफिश की संख्या में बढ़ोतरी दर्ज की गई है। इसके बाद स्थानीय प्रशासन और समुद्री विशेषज्ञों ने समुद्र तट पर आने वाले लोगों और तैराकों को सतर्क रहने की सलाह दी है। विशेषज्ञों का कहना है कि यह जेलीफिश देखने में आकर्षक दिखाई देती है, लेकिन इसका डंक बेहद दर्दनाक हो सकता है और लापरवाही स्वास्थ्य के लिए गंभीर समस्या पैदा कर सकती है।
विशेषज्ञों के अनुसार, लायंस मेन जेलीफिश का छाते जैसा ऊपरी भाग करीब तीन फीट तक चौड़ा हो सकता है। इसके लंबे और पतले टेंटेकल्स 100 फीट से अधिक लंबाई तक फैल सकते हैं। यही कारण है कि पानी में इसके टेंटेकल्स आसानी से दिखाई नहीं देते और कई बार लोग अनजाने में इनके संपर्क में आ जाते हैं।
इस जेलीफिश के टेंटेकल्स में मौजूद विषैली कोशिकाएं त्वचा के संपर्क में आते ही सक्रिय हो जाती हैं। इसके कारण तेज जलन, दर्द, लाल चकत्ते और अन्य शारीरिक प्रतिक्रियाएं हो सकती हैं। कुछ मामलों में एलर्जी या गंभीर स्वास्थ्य संबंधी समस्याएं भी सामने आ सकती हैं।
लायंस मेन जेलीफिश सामान्यतः ठंडे समुद्री इलाकों में पाई जाती है। इसका विस्तार प्रशांत महासागर, अटलांटिक महासागर, आर्कटिक महासागर, बाल्टिक सागर और उत्तरी सागर जैसे क्षेत्रों तक है। हालांकि इस वर्ष मैसाचुसेट्स के तटीय क्षेत्रों, विशेष रूप से केप कॉड के आसपास, इसकी संख्या में अचानक बढ़ोतरी देखी गई है।
समुद्री वैज्ञानिकों का मानना है कि समुद्री धाराओं में बदलाव, तेज हवाएं, पानी के तापमान में परिवर्तन और भोजन की उपलब्धता जैसे कारणों से यह जेलीफिश बड़ी संख्या में इस क्षेत्र तक पहुंची है। विशेषज्ञों के अनुसार, इनका दिखना मई से शुरू हुआ था और जून के मध्य तक इनकी संख्या तेजी से बढ़ गई।
स्थानीय अधिकारियों ने लोगों से अपील की है कि यदि समुद्र तट या पानी में लायंस मेन जेलीफिश दिखाई दे तो उससे सुरक्षित दूरी बनाए रखें। विशेषज्ञों ने चेतावनी दी है कि इसके टेंटेकल्स पानी में स्पष्ट रूप से नजर नहीं आते, इसलिए समुद्र में उतरते समय विशेष सतर्कता बरतना जरूरी है।
यदि किसी व्यक्ति को जेलीफिश डंक मार दे तो प्रभावित हिस्से को तुरंत गुनगुने पानी से साफ करने की सलाह दी गई है। अगर त्वचा पर टेंटेकल्स चिपके हों तो उन्हें सावधानीपूर्वक हटाना चाहिए। आवश्यकता होने पर सिरके का उपयोग भी किया जा सकता है, जिससे जलन कम करने में मदद मिल सकती है। वहीं, तेज दर्द, सांस लेने में दिक्कत, अत्यधिक एलर्जी या अन्य गंभीर लक्षण दिखाई देने पर तुरंत चिकित्सकीय सहायता लेने की सलाह दी गई है।

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