सोमवती अमावस्या के अवसर पर हरिद्वार में श्रद्धा और आस्था का विशाल जनसैलाब देखने को मिला। सुबह से ही हर की पौड़ी सहित गंगा के प्रमुख घाटों पर बड़ी संख्या में श्रद्धालु पहुंचे और मां गंगा में स्नान कर पूजा-अर्चना की। श्रद्धालुओं की भीड़ को देखते हुए प्रशासन और पुलिस पूरी तरह सतर्क रहे। जिलाधिकारी और वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक ने मौके पर पहुंचकर व्यवस्थाओं का निरीक्षण किया तथा अधिकारियों को आवश्यक निर्देश दिए।

अखाड़ा परिषद के अध्यक्ष रवींद्र ने बताया कि लगभग 300 वर्षों बाद सोमवती अमावस्या, अधिक मास और ग्रहों की विशेष स्थिति का दुर्लभ संयोग बना है। उनके अनुसार यह योग हरिद्वार, प्रयागराज, सरयू तट सहित देश के प्रमुख तीर्थस्थलों के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण माना जा रहा है। उन्होंने कहा कि जो श्रद्धालु पूरे मास व्रत रखते हैं, उन्हें इस दिन अपने पूर्वजों और पितरों का तर्पण अवश्य करना चाहिए। जहां नदियां या संगम स्थल उपलब्ध हों, वहां स्नान करना शुभ माना गया है। यदि कोई व्यक्ति घर पर है, तो वह स्नान के जल में गंगाजल मिलाकर स्नान कर सकता है और अपने पितरों का स्मरण कर सकता है।

उन्होंने बताया कि अमावस्या पर पितृ तर्पण का विशेष महत्व है। इस दिन पूर्वजों की शांति और कल्याण के लिए प्रार्थना करना शुभ माना जाता है। साथ ही उन्होंने भगवान श्रीकृष्ण के भगवद्गीता में वर्णित उपदेशों का उल्लेख करते हुए पीपल वृक्ष के महत्व पर प्रकाश डाला। उनके अनुसार पीपल का धार्मिक और पर्यावरणीय दोनों दृष्टियों से विशेष महत्व है। इसलिए इस दिन पीपल वृक्ष का पूजन, अभिषेक और जल अर्पण करना शुभ माना जाता है। उन्होंने श्रद्धालुओं को पहले गंगा स्नान और उसके बाद भगवान शिव का अभिषेक करने की सलाह दी।

जिलाधिकारी ने बताया कि सोमवती अमावस्या स्नान पर्व के दौरान घाटों पर सभी आवश्यक सुविधाएं उपलब्ध कराई गई हैं। वहीं वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक के अनुसार मेले की सुरक्षा व्यवस्था के लिए छह सुपर जोन, 16 जोन और 40 सेक्टर बनाए गए हैं। विभिन्न क्षेत्रों में डिप्टी एसपी, सीओ, इंस्पेक्टर और सब-इंस्पेक्टर स्तर के अधिकारियों की तैनाती की गई है। श्रद्धालुओं की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए एसडीआरएफ, एनडीआरएफ, बम निरोधक दस्ता और डॉग स्क्वायड की टीमों को भी सक्रिय रूप से लगाया गया है।

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