इंदौर में हर साल करीब 15 जून के आसपास मानसून सक्रिय होता है, लेकिन उससे पहले शहरवासियों को अगले 30 दिनों तक जलसंकट का सामना करना पड़ सकता है। शहर की 60 प्रतिशत से अधिक बोरिंगों में पानी का स्तर गिर चुका है, जबकि कई बोरिंग पूरी तरह सूख गई हैं। स्थानीय तालाबों का जलस्तर भी आधे से ज्यादा कम हो गया है।

शहर की मुख्य जल आपूर्ति नर्मदा नदी पर निर्भर है, लेकिन नदी का जलस्तर समुद्र तल से 147 मीटर तक नीचे पहुंच गया है। इंदौर में प्रतिदिन 430 एमएलडी पानी की मांग है, जबकि वर्तमान में केवल 320 एमएलडी पानी उपलब्ध हो पा रहा है। नर्मदा और यशवंत सागर से कुल 350 एमएलडी पानी की आपूर्ति हो रही है।

यशवंत सागर तालाब, जिसकी कुल क्षमता 19 फीट है, आधे से ज्यादा खाली हो चुका है। यह तालाब शहर को प्रतिदिन करीब 30 एमएलडी पानी उपलब्ध कराता है।

शहर में जल वितरण के लिए प्रतिदिन 600 से अधिक टैंकर चलाए जा रहे हैं। कुछ वार्डों में दो और कुछ में तीन टैंकर भेजे जा रहे हैं। शहर की 100 से अधिक बस्तियों की गलियां इतनी संकरी हैं कि वहां टैंकर या चार पहिया वाहन तक नहीं पहुंच पा रहे हैं।

गोमा की फेल, पंचम की फेल, लाला का बगीचा, चंदन नगर, अशर्फी नगर, धीरज नगर और कृष्णबाग कॉलोनी सहित कई इलाकों में लोग दिनभर खाली बर्तन और केन लेकर पानी का इंतजार कर रहे हैं। तालाबों का घटता जलस्तर आसपास की कॉलोनियों के भूजल स्तर को भी प्रभावित कर रहा है।

जलकार्य समिति प्रभारी अभिषेक एस. का कहना है कि गर्मी के मौसम में पानी की मांग बढ़ जाती है, जबकि आपूर्ति प्रभावित होती है। इसी वजह से कई इलाकों में जलसंकट गहरा गया है और टैंकरों पर निर्भरता बढ़ी है।

  • शहर में 60 प्रतिशत से अधिक बोरिंगों में पानी कम आ रहा है, जबकि कई बोरिंग पूरी तरह सूख चुकी हैं।
  • तालाबों का जलस्तर कम होने से आसपास की कॉलोनियों का भूजल स्तर प्रभावित हो रहा है।
  • नर्मदा नदी का जलस्तर घटने से शहर में करीब 100 एमएलडी पानी की कमी हो गई है।
  • टैंकर नर्मदा की टंकियों से भरे जा रहे हैं, जिससे नलों में पानी का दबाव भी कम हो गया है।

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