संपादकीय

देशभर में स्वच्छता के लिए पहचान बना चुका इंदौर आज ट्रैफिक अव्यवस्था की वजह से लगातार सवालों के घेरे में है। शहर ने सफाई के क्षेत्र में कई बार नंबर वन का तमगा हासिल किया, लेकिन ट्रैफिक व्यवस्था के मामले में स्थिति लगातार बिगड़ती जा रही है। करोड़ों रुपए के चालान काटे जाने के बावजूद वाहन चालकों की आदतों में सुधार दिखाई नहीं दे रहा। यही कारण है कि अब केवल जागरूकता अभियान नहीं, बल्कि सख्ती ही ट्रैफिक सुधार का सबसे प्रभावी उपाय नजर आने लगी है।

इंदौर ट्रैफिक पुलिस द्वारा समय-समय पर नए प्रयोग किए जाते हैं। एनजीओ, स्कूली और कॉलेज विद्यार्थियों, समाजसेवियों और स्वयंसेवी संस्थाओं को अभियान से जोड़ा जाता है। चौराहों पर खड़े होकर लोग हेलमेट पहनने, सीट बेल्ट लगाने, रांग साइड वाहन नहीं चलाने और ट्रैफिक नियमों का पालन करने की अपील करते दिखाई देते हैं। कई जगह ट्रैफिक पुलिस लाउडस्पीकर से लगातार एनाउंसमेंट भी करती है। इसके बावजूद हालात यह हैं कि शहर की अधिकांश सड़कों और चौराहों पर नियमों की खुलेआम धज्जियां उड़ती दिखाई देती हैं। सबसे बड़ी समस्या यह है कि वाहन चालक केवल वहीं नियमों का पालन करते हैं, जहां पुलिसकर्मी खड़े दिखाई देते हैं। जैसे ही चौराहा खाली दिखता है, रेड लाइट जंप करना, गलत दिशा से वाहन निकालना और बीच सड़क पर वाहन रोक देना आम बात बन जाती है। इससे साफ है कि लोगों में ट्रैफिक नियमों के प्रति जिम्मेदारी की भावना विकसित नहीं हो पाई है। जब तक नियम तोड़ने वालों में कार्रवाई का डर पैदा नहीं होगा, तब तक सुधार की उम्मीद करना मुश्किल है। लेफ्ट टर्न की व्यवस्था भी इंदौर में पूरी तरह अव्यवस्थित नजर आती है। जिन वाहनों को सीधे या दाईं ओर जाना होता है, वे भी सबसे आगे निकलने की होड़ में लेफ्ट लेन घेर लेते हैं। दोपहिया वाहन चालक कारों के बीच घुसकर खड़े हो जाते हैं, जबकि कई लोग फुटपाथ तक पर वाहन चढ़ा देते हैं। इसका सबसे बड़ा नुकसान पैदल चलने वालों को उठाना पड़ता है। गीता भवन, नवलखा, विजय नगर और पलासिया जैसे प्रमुख चौराहों पर रोजाना यही स्थिति देखने को मिलती है। सड़कें चौड़ी होने के बावजूद ट्रैफिक जाम बना रहता है, क्योंकि वाहन चालक लेन अनुशासन का पालन ही नहीं करते। हैरानी की बात यह भी है कि करोड़ों रुपए के चालान भरने के बाद भी वाहन चालकों की मानसिकता नहीं बदल रही। इसका अर्थ साफ है कि केवल चालान काटना पर्याप्त नहीं है। ट्रैफिक विभाग को अब निरंतर और कठोर कार्रवाई करनी होगी। हर प्रमुख चौराहे पर स्थायी निगरानी, मोबाइल पेट्रोलिंग, सीसीटीवी आधारित कार्रवाई और बार-बार नियम तोड़ने वालों के लाइसेंस निलंबित करने जैसे कदम उठाने होंगे। कोर्ट भी ट्रैफिक पुलिस की कार्यप्रणाली पर नाराजगी जता चुका है कि कई चौराहों पर जवान नजर ही नहीं आते। ऐसे में विभाग को अपनी जवाबदेही भी तय करनी होगी। इंदौर जैसे विकसित और जागरूक शहर से बेहतर ट्रैफिक अनुशासन की अपेक्षा की जाती है। यदि शहर को वास्तव में देश का आदर्श शहर बनाए रखना है, तो नागरिकों और प्रशासन दोनों को अपनी जवाबदेही समझनी होगी। 

-जगजीतसिंह भाटिया

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