पश्चिम बंगाल में इस बार जनता ने बताया है कि यदि कोई भी राजनीतिक पार्टी जनता का दमन करेगी, कानून व्यवस्था के साथ खिलवाड़ करेगी और देश से गद्दारी करेगी तो जनता उसको कुर्सी से हटा देगी..., और ऐसा ही ममता बनर्जी और उसकी पार्टी के साथ हुआ। 15 साल से पश्चिम बंगाल की जनता ममता और उसकी पार्टी टीएमसी से परेशान थी। गुंडागर्दी, बलवा, अपहरण, दुष्कर्म सहित तमाम अपराध पश्चिम बंगाल में होने लगे थे। खासकर हिंदुओं को टारगेट किया जाता रहा और ममता चुपचाप समर्थन देकर तमाशा देखती रही।
कोलकाता का उदाहरण
कोलकाता के रहवासी ने नाम नहीं प्रकाशित करने की शर्त पर जवाबदेही से बताया कि ममता बनर्जी ने चुनाव हमेशा गुंडागर्दी के दम पर जीता है। कोलकाता में ये हालात थे कि चुनाव के दौरान टीएमसी के कार्यकर्ता पुलिस के साथ मल्टियों में पहुंचते थे और रहवासियों को मल्टियों के प्रांगण में बुलाकर उनके सामने ईवीएम मशीन पर टीएमसी को वोट देने के लिए कहा जाता था, जो लोग नहीं मानते उनके साथ बदसलूकी, मारपीट तक की जाती थी। टीएमसी की इतनी धौंस थी कि लोग डर के मारे उनके सामने ही टीएमसी को वोट देते थे। इस बार पहली बार ऐसा हुआ है कि लोगों ने खुद वोट भारतीय जनता पार्टी को दिया है।
सोशल मीडिया और राजनीतिक पार्टियों के अनुसार ममता बनर्जी और उनकी पार्टी टीएमसी मुस्लिम परस्त पार्टी है...। टीएमसी, राजद और कांग्रेस ये मुस्लिम परस्त पार्टियां हैं। राहुल गांधी, सोनिया गांधी, प्रियंका वाड्रा, मुलायमसिंह यादव, अब अखिलेश यादव, औवेसी, अरविंद केजरीवाल सहित ज्यादातर नेता मुस्लिम परस्त है और इनकी हरकतों से भी लगता है कि ये लोग भारत को मुस्लिम देश बनाने पर तूले हुए हैं। व्यक्तिगत रूप से ये लोग भारत के खिलाफ ही जहर उगलते देखे जा सकते हैं और कई मौको पर हिंदू नेता टोपी लगाए भी दिखाई देते है?
हमारे यहां की रीत है...
इधर, मध्यप्रदेश की बात की जाए तो यहां भी अब लोगों को लगने लगा है कि यहां के हालात बिहार, यूपी और बंगाल जैसे हो रहे हैं। यहां पर भाजपा की सरकार है, लेकिन हिंदूत्व का विरोध करने वाले सिर उठा रहे हैं। मध्यप्रदेश में लव जिहाद के मामले बढ़ गए हैं। ड्रग्स का कारोबार बड़ी मात्रा में किया जा रहा है। ज्यादातर मामलों में जो ड्रग्स तस्कर पकड़ा रहे हैं वो मुस्लिम युवा, बुजुर्ग, महिलाएं ही निकलते हैं...। एक तरह से एजेंडा चल रहा है कि कैसे भी हो हिंदुओं को नशे का आदी बनाओ, उनकी महिलाओं और लड़कियों का धर्म परिवर्तन करो, दुष्कर्म करो, उनकी जमीनों पर अपना कब्जा जमाओ.... जैसी कई अवैध गतिविधियां मध्यप्रदेश में हो रही है।
जिस तरह से हिंदू संत-समाजजन युवाओं को संदेश देता नजर आता है कि नशे से दूर रहो, लव जिहाद से दूर रहो। इस तरह किसी भी तरह से कोई मुस्लिम धर्मावलंबी सार्वजनिक मंचों से ऐसा कहते नजर नहीं आता और मुस्लिम युवाओं को यह संदेश नहीं देता कि लव जिहाद जैसा षड्यंत्र मत रचो, ड्रग्स मत बेचा...। जब सवाल किया जाता है तो इस मामले में किसी का मुंह नहीं खुलता।
विवादों में रहा बनर्जी का कार्यकाल
पश्चिम बंगाल में हिंदू टारगेट पर रहे
ममता बनर्जी ने पहली बार 20 मई 2011 को पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री पद की शपथ ली थी। 2026 तक उनका कार्यकाल लगभग 15 वर्ष माना जा रहा है। उनके शासनकाल में पश्चिम बंगाल कई कारणों से राष्ट्रीय बहस और विवादों के केंद्र में रहा। इनमें राजनीतिक हिंसा, चुनावी झड़पें, हिंदुओं के धार्मिक जुलूसों पर हमले, रामनवमी-हनुमान जयंती के दौरान तनाव, संदेशखाली प्रकरण, केंद्रीय एजेंसियों पर हमले और कानून-व्यवस्था को लेकर लगातार उठते सवाल शामिल रहे।
राजनीतिक हिंसा और झड़पें
पश्चिम बंगाल लंबे समय से राजनीतिक हिंसा के लिए चर्चा में रहा है, लेकिन 2011 के बाद भी यह सिलसिला कम नहीं हुआ। पंचायत चुनावों, लोकसभा चुनावों और विधानसभा चुनावों के दौरान कई हिंसक घटनाएं सामने आईं। विपक्षी दलों, विशेषकर भाजपा और वाम दलों का आरोप है कि राज्य में राजनीतिक विरोधियों पर हमले बढ़े।
2023 और 2024 में रामनवमी की शोभायात्रा के दौरान हावड़ा, उत्तर दिनाजपुर और मुर्शिदाबाद जैसे क्षेत्रों में हिंसा और पथराव की घटनाएं हुईं। भाजपा और हिंदू संगठनों ने आरोप लगाया कि रामनवमी और दुर्गा विसर्जन जैसे आयोजनों पर प्रतिबंधात्मक रवैया अपनाया गया।
2017 में दुर्गा विसर्जन और मुहर्रम एक ही दिन पड़ने पर प्रशासन द्वारा लगाए गए प्रतिबंध को लेकर बड़ा राजनीतिक विवाद हुआ था। बाद में सुप्रीम कोर्ट में भी यह मुद्दा उठा था।
मंदिरों और धार्मिक स्थलों को लेकर आरोप
विभिन्न राजनीतिक दलों और हिंदू संगठनों ने आरोप लगाए कि कुछ सांप्रदायिक घटनाओं में मंदिरों को नुकसान पहुंचाया गया या हिंदू समुदाय को निशाना बनाया गया।
संदेशखाली मामला - सबसे बड़ा उदाहरण
2024 में संदेशखाली क्षेत्र से महिलाओं ने आरोप लगाए कि स्थानीय तृणमूल कांग्रेस नेताओं और उनके समर्थकों द्वारा जमीन कब्जाने, उत्पीड़न और महिलाओं के साथ दुर्व्यवहार जैसी घटनाएं हुईं। भाजपा ने इसे ‘राज्य प्रायोजित अराजकता’ बताया, जबकि तृणमूल कांग्रेस ने कई आरोपों को राजनीतिक साजिश कहा।
केंद्रीय एजेंसियों पर हमले और टकराव
ईडी और अन्य केंद्रीय एजेंसियों की टीमों पर भी पश्चिम बंगाल में हमलों की घटनाएं सामने आईं। 2024 में राशन घोटाले की जांच के दौरान ईडी अधिकारियों पर हमला हुआ, जिसने राष्ट्रीय स्तर पर बड़ा विवाद खड़ा किया।
लक्ष्मी पूजा/विश्वकर्मा पूजा की छुट्टी: मुहर्रम के कारण छुट्टी बढ़ाने के लिए हिंदू त्योहारों के समय में कटौती की गई।
दिवाली/काली पूजा: पटाखों पर समय सीमा और प्रतिबंध।
मुस्लिम समुदाय को बढ़ावा देने के आरोप
इमाम और मुअज्जिन मानदेय: पश्चिम बंगाल सरकार द्वारा इमामों (2,500/- रुपए प्रतिमाह माह) और मुअज्जिनों (1,000/- रुपए प्रतिमाह) को वक्फ बोर्ड के माध्यम से मानदेय देने की नीति की काफी आलोचना हुई है।
अल्पसंख्यक विकास योजनाएं: ममता सरकार पर अल्पसंख्यक छात्रों के लिए विशेष छात्रवृत्ति और योजनाओं के जरिए तुष्टीकरण का आरोप लगाया जाता है।
बजट में प्राथमिकता: भाजपा का आरोप है कि राज्य के कुल बजट का एक बड़ा हिस्सा अल्पसंख्यक मामलों और मदरसा शिक्षा (2025-26 के अनुसार लगभग 5 हजार करोड़ से अधिक) पर खर्च किया जा रहा है।
ममता बनर्जी के खिलाफ प्रमुख प्रकरण
ईडी की कार्रवाई में बाधा (2026): सर्वोच्च न्यायालय ने आई-पैक (I-PAC) छापे के दौरान ईडी जांच में हस्तक्षेप के लिए ममता बनर्जी की आलोचना की है। प्रवर्तन निदेशालय (ED) ने आरोप लगाया कि राज्य पुलिस की अनुमति के बिना, सीएम ने 2,742 करोड़ रुपये के कोयला घोटाले से जुड़ी सबूत सामग्री को ले जाने से रोका।
राष्ट्रगान का अपमान (2022): मुंबई में आयोजित एक कार्यक्रम में राष्ट्रगान के कथित अपमान के मामले में एक निचली अदालत ने ममता को समन जारी किया था, जिस पर बाद में सत्र अदालत ने रोक लगा दी थी।

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