मध्यप्रदेश में भी 

गुंडे-बदमाशों का खौफ कायम होता जा रहा 

है। हाथ-पैर टूटने से नहीं सुधरने वाले बदमाश...

जवाबदेही @ इंदौर

उत्तर प्रदेश में मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की सख्त कार्यशैली से गुंडाराज ने दम तोड़ा और कई नामचीनों को जन्नत की सैर करवा दी गई है तो कई अपराधियों ने उत्तर प्रदेश ही छोड़ दिया है तो कुछ ने पुलिस के सामने सरेंडर कर अपराधों से तौबा कर ली है। जो लोग नहीं मान रहे हैं और अपराध कर रहे हैं, उनका एनकाउंटर भी तय है, क्योंकि समाज से गंदगी साफ होना जरूरी है। इसी कार्यशैली को आगे बढ़ाते हुए अब बिहार में कानून राज की स्थापना होना शुरू हो गई है और बिहार में सम्राट चौधरी ने मुख्यमंत्री का पद 15 अप्रैल को संभालते ही अपने दायित्व का निर्वाह शुरू कर दिया और बिहार में योगी आदित्यनाथ का मॉडल लागू कर दिया... यानी गुंडे-बदमाशों का सफाया...।

दरअसल, देश में कानून व्यवस्था लागू करना बहुत जरूरी है। गुंडे-बदमाशों में खौफ यदि आएगा तो सिर्फ एनकाउंटर से... और देश की जनता ने उत्तर प्रदेश में ऐसे हालात देखे और अब बिहार में देखने को मिल रहे हैं। 

रही मध्यप्रदेश की बात तो यहां पर गुंडे-बदमाशों के हाथ-पैर तोड़ने और मात्र जुलूस निकालने की वाहवाही पुलिस द्वारा दिखाई जाती है, क्योंकि मध्यप्रदेश में पुलिस के हाथ बंधें है और वह इसलिए गुंडों का एनकाउंटर नहीं कर पा रही है। प्रदेशभर में कई बड़े जघन अपराध हुए, लेकिन अपराधी बेखौफ है..., जेल से छूटते है फिर अपराध करते हैं। ऐसा ही दुष्कर्मी भी है, जेल से छूटने के बाद फिर दुष्कर्म की वारदात करते हैं...। ऐसा इसलिए कि क्योंकि उन्हें पता है कि ज्यादा से ज्यादा हाथ-पैर में थोड़ा फ्रैक्चर होने तक मार पड़ेगी उसके बाद जेल भेज दिया जाएगा, जहां वह फिर आराम से मुफ्त की रोटी तोड़ सकेंगे...। और यही कारण है कि मध्यप्रदेश में अपराध बढ़ रहे है। वहीं, उत्तर प्रदेश और बिहार के अपराधियों ने मध्यप्रदेश में शरण ले ली है और अपराध कर रहे हैं। इनके अलावा अन्य राज्यों के भी बदमाश इंदौर में अपराध कर रहे हैं और फिरौती तक मांग रहे हैं। 

'गोली का जवाब गोली से'

मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने पुलिस को अपराधियों के खिलाफ ‘फ्री हैंड’ कर दिया है।  उन्होंने स्पष्ट संदेश दिया है कि ‘गोली ‘चलाओगे तो गोली खाओगे’। 

एनकाउंटर शुरू 

अप्रैल-मई 2026 में बिहार पुलिस ने कई एनकाउंटर किए हैं। भागलपुर में एक मुख्य साजिशकर्ता को ढेर किया गया और सिवान में कुख्यात अपराधी सोनू कुमार यादव (छोटू यादव) को मुठभेड़ में घायल किया गया। 

‘तस्वीर पर माला’ का संदेश :   ने पुलिस अधिकारियों को बैठक में यह निर्देश दिया है कि अपराधियों को माला पहनाने की जरूरत नहीं है, बल्कि उनकी तस्वीरों पर माला चढ़ाई जानी चाहिए, जिसका अर्थ है कि पुलिस को अपराधियों को बख्शना नहीं है। 

बुलडोजर की नीति: एनकाउंटर के साथ-साथ, हिस्ट्रीशीटर और फरार अपराधियों के घरों पर बुलडोजर चलाने (कुर्की-जब्ती) की कार्रवाई भी शुरू हो गई है। 

48 घंटे में एक्शन: पुलिस को निर्देश दिया गया है कि हत्या और बड़ी आपराधिक घटनाओं के 48 घंटे के भीतर आरोपियों को गिरफ्तार किया जाए।  

सम्राट मॉडल के अन्य पहलू

पुलिस स्टेशन की जिम्मेदारी: पुलिस थानों को सतर्क किया गया है कि वे अपने इलाके के अपराधियों पर नजर रखें।

सम्राट चौधरी ने कहा है कि जब तक बेटियां सुरक्षित घर नहीं पहुंच जातीं, पुलिस चैन से नहीं सोएगी।  इस सख्त कार्रवाई के बाद से बिहार में अपराधी वर्ग में खौफ का माहौल बताया जा रहा है। उत्तर प्रदेश और बिहार में अपराधियों के खिलाफ तेजी से हो रहे पुलिस एनकाउंटर को लेकर देशभर में बहस छिड़ी हुई है। अब यह सवाल मध्यप्रदेश में भी उठने लगा है कि क्या प्रदेश में भी इसी तरह का सख्त “एनकाउंटर अभियान” शुरू किया जाना चाहिए, ताकि गुंडे-बदमाशों पर लगाम लगे और आम जनता को सुरक्षित माहौल मिल सके।

मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव मध्यप्रदेश में भ्रष्टाचार और गुंडागर्दी पर भले ही कहते रहे हो की जीरो टोलरेंस की नीति पर काम हो रहा है, लेकिन मध्यप्रदेश की पुलिस सौदेबाज हो गई है। थानों पर प्रॉपर्टी के मामलों में ज्यादा दिलचस्पी ली जा रही है। उसके अलावा गुंडे-बदमाशों को बचाने का षड्यंत्र रचकर मोटी रकम की वसूली हो रही है। ऐसे कई मामले इन दिनों इंदौर शहर के सामने आए हैं। पुलिस को इन सब हरकतों से बचना चाहिए और कानून व्यवस्था कायम करना चाहिए।

सबसे महत्वपूर्ण बात: मध्यप्रदेश का मॉडल अभी भी संतुलित पुलिसिंग पर आधारित है,  जहां एनकाउंटर अपवाद है और कानूनी प्रक्रिया मुख्य रास्ता है।

उत्तर प्रदेश : योगी आदित्यनाथ के कार्यकाल (मार्च 2017 से अब तक) 

पुलिस एनकाउंटर के आंकड़े आधिकारिक डेटा के अनुसार इस प्रकार हैं:

  • कुल एनकाउंटर (ऑपरेशन)
  • लगभग 16,000+ पुलिस एनकाउंटर/ऑपरेशन हुए हैं
  • एनकाउंटर में मारे गए अपराधी
  • करीब 266 आरोपी मारे गए (2017–दिसंबर 2025 तक)
  • घायल और अन्य आंकड़े
  • लगभग 10,990 आरोपी घायल हुए
  • 1,700+ पुलिसकर्मी घायल और 18 की मौत भी हुई

बिहार: मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी कार्यकाल 15 अप्रैल 2026 से अब तक

  • कुल एनकाउंटर (हालिया ट्रेंड)
  • लगभग 15-18 दिनों में 4 से 5 एनकाउंटर हुए
  • पहले 2 हफ्तों में 4 एनकाउंटर 
  • मारे गए अपराधी
  • कम से कम 2 से 4 अपराधी ढेर (कन्फर्म केस आधारित)
  • अन्य कार्रवाई (हाफ एनकाउंटर)
  • कई मामलों में अपराधियों को पैर में गोली मारकर गिरफ्तार किया गया
  • 2026 के शुरुआती महीनों में:
  • 12 एनकाउंटर घटनाएं (जनवरी–अप्रैल)

मध्यप्रदेश: मुख्यमंत्री डॉ. मोहन 

यादव का कार्यकाल

  • फरवरी 2025 में बालाघाट में 4 महिला नक्सली एनकाउंटर में मारी गईं
  • 2025 में कुल मिलाकर करीब 11 नक्सली मारे गए (सुरक्षा बल कार्रवाई में)
  • पुलिसिंग का फोकस (एनकाउंटर नहीं, अन्य कार्रवाई ज्यादा)

(A) नक्सल खत्म करने का अभियान

सरकार ने मध्यप्रदेश को “नक्सल मुक्त” घोषित करने का लक्ष्य रखा

2025–26 में नक्सल गतिविधियां काफी कम हुईं

(B) पारंपरिक कानून व्यवस्था

गिरफ्तारी, चार्जशीट, कोर्ट ट्रायल

प्रशासनिक कार्रवाई (जिलाबदर, NSA आदि)

(C) पुलिस पर हमले (एक महत्वपूर्ण संकेत)

जनवरी 2024–जून 2025: 461 हमले पुलिस पर 612 पुलिसकर्मी घायल, 5 की मौत

राज्य में अपराधियों के साथ सीधा टकराव बढ़ा, लेकिन उसे “एनकाउंटर मॉडल” में नहीं बदला गया

 


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