गुजरात के गिर राष्ट्रीय उद्यान की तर्ज पर अब पेंच टाइगर रिजर्व में भी कम्युनिटी मुखबिर मॉडल तैयार किया जा रहा है। इस पहल के तहत स्थानीय शिक्षित बेरोजगार युवाओं को रोजगार से जोड़कर उनके परिवारों को वन संरक्षण से जोड़ा जा रहा है।
यह मॉडल सफल होने पर कान्हा, बांधवगढ़ और सतपुड़ा नेशनल पार्क में भी लागू किया जाएगा। पहले चरण में 16 युवाओं को टाटा मोटर्स और एलएंडटी जैसी कंपनियों के सहयोग से प्रशिक्षण और रोजगार उपलब्ध कराया गया है। इससे इन परिवारों की जंगल पर निर्भरता कम हुई है और अब ये लोग जंगल में संदिग्ध गतिविधियों पर नजर रखने में वन विभाग की मदद कर रहे हैं।
किसी भी संदिग्ध गतिविधि, जैसे नए लोगों की आवाजाही, रात में हलचल या शिकार के संकेत मिलने पर इसकी सूचना तुरंत वन अमले तक पहुंचाई जाती है, जिससे समय रहते कार्रवाई संभव हो पाती है।
अधिकारियों के अनुसार, इस मॉडल के जरिए बफर जोन में रहने वाले युवाओं और उनके परिवारों का विश्वास जीतकर वन्यजीव संरक्षण में उनका सहयोग लिया जा सकता है। बफर जोन वन्यजीव अपराधों के लिहाज से सबसे संवेदनशील क्षेत्र माना जाता है।
इससे पहले कूनो नेशनल पार्क में 450 ‘चीता मित्र’ बनाए गए थे। वन अधिकारियों के अनुसार, इनकी भूमिका गांवों में जागरूकता फैलाने, चीतों की गतिविधियों की सूचना देने और मानव-वन्यजीव संघर्ष कम करने में अहम रही है। कई चीता मित्र नियमित निगरानी और सूचना तंत्र में सक्रिय हैं। इनके परिवारों को रोजगार, प्रशिक्षण और अन्य योजनाओं में प्राथमिकता दी जाती है।
पेंच में मोगली महोत्सव, वन मित्र और बाघ मित्र जैसी योजनाएं पहले से संचालित हैं। कम्युनिटी मुखबिर मॉडल को भी इसी पहल से जोड़ा गया है। पायलट प्रोजेक्ट सफल होने पर इसे अन्य टाइगर रिजर्व में भी लागू किया जाएगा।

Post a Comment