कोलकाता| शहरों
में फ्लाईओवर के
नीचे की जगह
अक्सर गंदगी, कचरे,
अतिक्रमण और अव्यवस्था का
प्रतीक बन जाती
है। कहीं ठेले-गुमटियां नजर आती हैं
तो कहीं असामाजिक गतिविधियों का
अड्डा बन जाता
है। लेकिन अब
एक ऐसा मॉडल
सामने आया है,
जिसने यह साबित
कर दिया कि
सही सोच और
बेहतर प्लानिंग से
बेकार पड़ी जगह
को भी शहर
की सबसे उपयोगी
जगहों में बदला
जा सकता है।
यहां
फ्लाईओवर के नीचे एक
छोटा लेकिन बेहद
आकर्षक स्पोर्ट्स कॉम्प्लेक्स विकसित
किया गया है।
सीमित जगह होने
के बावजूद बच्चों
और युवाओं के
लिए फुटबॉल ग्राउंड, क्रिकेट प्रैक्टिस एरिया,
स्केट पार्क और
स्केटिंग रिंक जैसी सुविधाएं तैयार
की गई हैं।
पहली नजर में
यह जगह छोटी
जरूर लगती है,
लेकिन जब यहां
बच्चे खेलते और
अभ्यास करते दिखाई
देते हैं तो
पूरा माहौल ऊर्जा
और उत्साह से
भर जाता है।
क्रिकेट की
प्रैक्टिस करते युवा, फुटबॉल
खेलते बच्चे और
स्केटिंग करते नन्हे खिलाड़ी यह
एहसास कराते हैं
कि सपनों के
लिए बड़ी जमीन
नहीं, बल्कि बड़ी
सोच की जरूरत
होती है। यही
कारण है कि
यह मॉडल अब
दूसरे शहरों के
लिए भी प्रेरणा बनता
जा रहा है।
सबसे
खास बात यह
है कि यहां
सिर्फ खेल सुविधाएं ही
नहीं बनाई गईं,
बल्कि बच्चों की
जरूरतों का भी पूरा
ध्यान रखा गया
है। चेंजिंग रूम,
वॉशरूम और सुरक्षित आने-जाने के लिए
विशेष पैसेज तैयार
किया गया है।
फ्लाईओवर के नीचे से
ही प्रवेश की
व्यवस्था होने के कारण
बच्चों और अभिभावकों को
किसी तरह की
परेशानी का सामना नहीं
करना पड़ता।
जहां
अधिकांश शहरों में फ्लाईओवर के
नीचे कचरा और
अव्यवस्था नजर आती है,
वहीं यह पहल
बताती है कि
प्रशासन और समाज मिलकर
चाहें तो हर
खाली पड़ी जगह
को जनहित में
उपयोगी बनाया जा
सकता है। यह
मॉडल न केवल
बच्चों को खेल
का बेहतर वातावरण दे
रहा है, बल्कि
शहर की सुंदरता बढ़ाने
के साथ सामाजिक बदलाव
का उदाहरण भी
बन रहा है।
इंदौर
जैसे शहर में
भी इस दिशा
में काम करने
की बड़ी जरूरत
महसूस की जा
रही है। शहरभर
में बने फ्लाईओवरों के
नीचे फिलहाल कई
जगहों पर कचरा,
गंदगी, अतिक्रमण, सब्जी
के ठेले और
अव्यवस्थित गतिविधियां देखने को मिलती
हैं। यदि इन
खाली स्थानों को
योजनाबद्ध तरीके से विकसित
किया जाए तो
यहां छोटे स्पोर्ट्स जोन,
ओपन जिम, स्केटिंग रिंक,
बच्चों के प्ले
एरिया या सामुदायिक गतिविधियों के
केंद्र बनाए जा
सकते हैं।
इससे बच्चों को खेल के लिए दूर नहीं जाना पड़ेगा, आसपास ही सुरक्षित और बेहतर वातावरण मिल सकेगा। साथ ही शहर की सुंदरता भी बढ़ेगी और फ्लाईओवर के नीचे की बेकार पड़ी जगहें शहर के लिए उपयोगी संपत्ति में बदल जाएंगी। अब जरूरत सिर्फ एक नई सोच और मजबूत पहल की है, ताकि फ्लाईओवर के नीचे की अंधेरी और उपेक्षित जगहें बच्चों के सपनों का मैदान बन सकें।
https://www.instagram.com/jawabdehi15/reel/DYRuio-PGkl/

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