देश में लगातार आठ बार स्वच्छता में शीर्ष स्थान हासिल कर चुके इंदौर में अब कचरा प्रबंधन को लेकर सवाल उठने लगे हैं। शहर के अलग-अलग क्षेत्रों से ऐसे वीडियो सामने आए हैं, जिनमें नगर निगम के कर्मचारी रहवासी इलाकों के पास खुले स्थानों पर कचरा डालते दिखाई दे रहे हैं। आरोप है कि बाद में इसी कचरे में आग लगा दी जाती है, जिससे आसपास के लोगों को धुएं और प्रदूषण की समस्या का सामना करना पड़ता है।

ताजा मामला वार्ड क्रमांक-53 के एक रहवासी क्षेत्र का है। स्थानीय लोगों के अनुसार निगम कर्मचारी ट्रैक्टर-ट्रॉली में कचरा और मलबा लाकर खाली जगह पर डाल देते हैं। बताया गया कि रात के समय इसी कचरे में आग लगा दी जाती है, जिससे क्षेत्र में धुआं फैल जाता है और लोगों को परेशानी होती है। रहवासियों ने कई बार इसका विरोध किया, लेकिन स्थिति में सुधार नहीं हुआ।

28 मई को कचरा डंप किए जाने का एक वीडियो भी सामने आया है। स्थानीय लोगों का कहना है कि एक दिन पहले रात में कचरे में लगी आग ने बड़ा रूप ले लिया था। धुएं से परेशान होकर लोगों ने फायर ब्रिगेड को सूचना दी, जिसके बाद दमकल कर्मियों ने मौके पर पहुंचकर आग पर काबू पाया।

क्षेत्र की पार्षद ने बताया कि उन्हें इस संबंध में शिकायत प्राप्त हुई है। उन्होंने कहा कि खुले स्थान पर कचरा फेंकना और उसे जलाना नियमों के विरुद्ध है। कचरे का निस्तारण निर्धारित प्रक्रिया के तहत ट्रेंचिंग ग्राउंड में किया जाना चाहिए। मामले की जानकारी संबंधित अधिकारियों को दे दी गई है।

जोन-19 के प्रभारी अधिकारी ने पूरे मामले की जांच के निर्देश दिए हैं। उनका कहना है कि यदि जांच में किसी निगम कर्मचारी की लापरवाही या संलिप्तता सामने आती है तो नियमानुसार कार्रवाई की जाएगी।

फायर ब्रिगेड के आंकड़ों के अनुसार पिछले दो महीनों में शहर में कचरा जलाने की 50 से अधिक शिकायतें दर्ज की गई हैं। औसतन रोजाना दो से तीन शिकायतें विभिन्न क्षेत्रों से मिल रही हैं। कई मामलों में कचरे में लगी आग आसपास की दुकानों और गोदामों तक पहुंचने से नुकसान भी हुआ है। लगातार सामने आ रही घटनाओं ने शहर की कचरा प्रबंधन व्यवस्था और निगरानी प्रणाली की प्रभावशीलता पर सवाल खड़े कर दिए हैं।

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