देशभर में खराब बुनियादी सुविधाओं और नागरिक समस्याओं के खिलाफ युवाओं ने विरोध का एक नया और व्यंग्यात्मक तरीका अपनाया है। सोशल मीडिया पर चर्चा में आई कॉकरोच जनता पार्टी (सीजेपी) अब ऑनलाइन अभियान से आगे बढ़कर जमीनी स्तर पर भी सक्रिय दिखाई दे रही है। पार्टी का पहला सार्वजनिक अभियान तेजी से लोगों का ध्यान आकर्षित कर रहा है और स्थानीय प्रशासन की कार्यप्रणाली पर सवाल खड़े कर रहा है।
अभियान के तहत समर्थक अपने-अपने क्षेत्रों में गड्ढों वाली सड़कें, कूड़े के ढेर, खराब स्ट्रीट लाइट, जलभराव और अन्य नागरिक समस्याओं के वीडियो तथा तस्वीरें रिकॉर्ड कर पार्टी को टैग कर रहे हैं। संगठन का कहना है कि इन सामग्रियों को व्यापक स्तर पर साझा कर संबंधित अधिकारियों और प्रशासन पर कार्रवाई का दबाव बनाया जाएगा।
इस अभियान की शुरुआत करने वाले अभिजीत ने सोशल मीडिया पर एक वीडियो भी साझा किया है। करीब तीन मिनट के इस वीडियो में एक व्यक्ति कॉकरोच जैसा मुखौटा पहनकर शहर की सड़कों और नालों के आसपास दिखाई देता है। वीडियो का उद्देश्य गंदगी, खुले नालों और कमजोर स्वच्छता व्यवस्था जैसे मुद्दों की ओर लोगों का ध्यान आकर्षित करना बताया गया है।
अभियान के दौरान स्थानीय जनप्रतिनिधियों और अधिकारियों को टैग करते हुए उनके क्षेत्रों की खराब सड़कों और जलभराव की समस्याओं पर व्यंग्यात्मक डिजिटल प्रमाणपत्र भी जारी किए जा रहे हैं। वहीं, इंस्टाग्राम और एक्स जैसे सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर युवा कॉकरोच फिल्टर का उपयोग कर दूषित पानी, ट्रैफिक जाम और टूटी सड़कों से जुड़ी व्यंग्यात्मक रील्स बना रहे हैं।
यह पूरा घटनाक्रम 15 मई 2026 को उस समय शुरू हुआ, जब भारत के मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत ने सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई के दौरान कुछ बेरोजगार युवाओं के संदर्भ में “कॉकरोच” और “परजीवी” शब्दों का इस्तेमाल किया था। बाद में उन्होंने स्पष्ट किया कि यह टिप्पणी फर्जी डिग्री रखने वाले लोगों के लिए थी, न कि पूरे युवा वर्ग के लिए। इसके बावजूद यह बयान सोशल मीडिया पर व्यापक चर्चा का विषय बन गया।
रिपोर्ट के अनुसार, बेरोजगारी, नीट पेपर लीक, यूपीएससी से जुड़े विवादों और भविष्य को लेकर बढ़ती निराशा के बीच कई युवाओं ने इस टिप्पणी को अपमानजनक माना। इसी माहौल के बीच बोस्टन यूनिवर्सिटी में पब्लिक रिलेशंस की पढ़ाई कर रहे अभिजीत ने 16 मई को कॉकरोच जनता पार्टी की शुरुआत की। उन्होंने “कॉकरोच” शब्द को विरोध और प्रतिरोध के प्रतीक के रूप में प्रस्तुत किया।
बताया जाता है कि अभियान को सोशल मीडिया पर तेजी से समर्थन मिलने के बाद संबंधित अकाउंट को सूचना प्रौद्योगिकी अधिनियम की धारा 69ए के तहत भारत में ब्लॉक कर दिया गया। इसके बाद अभियान नए सोशल मीडिया हैंडल के माध्यम से जारी रखा गया। अभिजीत ने अपने इंस्टाग्राम अकाउंट के हैक होने, जान से मारने की धमकियां मिलने और परिवार को निशाना बनाए जाने के आरोप भी लगाए हैं। इस मामले में दिल्ली हाई कोर्ट में याचिका दायर कर अकाउंट बहाल करने की मांग की गई है।

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