जानकारी के अनुसार, 24 अप्रैल को एक माता-पिता अपने बच्चे की कॉपी से जुड़ी समस्या लेकर स्कूल पहुंची थीं। उनका कहना था कि बच्चे के पास जो कॉपी है, उसमें कुछ दिनों तक काम करने की अनुमति दे दी जाए, क्योंकि नई कॉपियां अभी नहीं खरीदी जा सकी हैं।

माता-पिता का आरोप है कि उनकी बात सुनने के बजाय प्रिंसिपल ने ऊंची आवाज में उन्हें डांटना शुरू कर दिया। वायरल वीडियो में प्रिंसिपल को कहते हुए सुना जा सकता है, “यहां से जाइए, तमाशा मत कीजिए, मुझे बच्चों के टीकाकरण के लिए अंदर जाना है।” इसके अलावा उन्होंने यह भी कहा कि “दो घंटे से समझा रही हूं, अब और नहीं सुनूंगी,” और “जहां शिकायत करनी है कर दीजिए।”

माता-पिता का यह भी आरोप है कि बातचीत के दौरान उन्हें अपमानजनक शब्द कहे गए और सार्वजनिक रूप से फटकारा गया, जिससे वे आहत हुईं।

वहीं, प्रिंसिपल ने इन आरोपों को खारिज करते हुए कहा कि मामला केवल कॉपी का नहीं था। उनके अनुसार, संबंधित माता-पिता स्कूल फीस कम कराने का दबाव बना रहे थे और पहले भी कई बार इस मुद्दे को उठाया गया था।

प्रिंसिपल ने बताया कि जिस दिन यह घटना हुई, उस दिन स्कूल में टीकाकरण कार्यक्रम चल रहा था और वह बार-बार कह रही थीं कि “आज बच्चों का कार्यक्रम है, आप बाद में बात कीजिए।” उन्होंने यह भी कहा कि माता-पिता उनकी बात नहीं सुन रहे थे और लगातार बहस कर रहे थे, जिससे स्थिति बिगड़ गई।

प्रिंसिपल के अनुसार, उन्होंने करीब दो से तीन घंटे तक समझाने की कोशिश की, लेकिन जब बात नहीं बनी तो माहौल तनावपूर्ण हो गया और उसी दौरान वीडियो रिकॉर्ड कर लिया गया।

हालांकि, वीडियो में इस्तेमाल की गई कड़ी भाषा और सार्वजनिक बहस को लेकर सवाल उठ रहे हैं। शिक्षा संस्थान में इस तरह के व्यवहार को लेकर कई लोग आपत्ति जता रहे हैं।

फिलहाल, मामले में दोनों पक्षों के अलग-अलग दावे सामने आए हैं और जांच के बाद ही पूरी सच्चाई स्पष्ट हो सकेगी।


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