केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र के साथ मुख्यमंत्री डॉ. मोहन ने शुक्रवार को शहर के तारामंडल में 3 दिवसीय ‘महाकाल द मास्टर्स ऑफ टाइम’ अंतरराष्ट्रीय सम्मेलन का शुभारंभ किया। इस दौरान उज्जैन में 15.20 करोड़ की लागत से बने विज्ञान केंद्र का लोकार्पण किया गया।

दोनों नेताओं ने ‘विद्यार्थी विज्ञान मंथन 2026-27’ की वेबसाइट भी लॉन्च की। केंद्रीय मंत्री धर्मेंद्र ने कहा कि महाकाल हमारी परंपरा में कालगणना के केंद्र बिंदु हैं और इस सम्मेलन का उद्देश्य ‘महाकाल द मास्टर ऑफ टाइम’ से ‘महाकाल स्टैंडर्ड टाइम’ की अवधारणा पर विचार करना है।

उन्होंने कहा कि भारत को विकसित बनाने के लिए वैज्ञानिक ताकत को बढ़ाना जरूरी है और देश की ज्ञान-विज्ञान परंपरा को जन-जन तक पहुंचाना चाहिए।

तीन दिवसीय इस आयोजन में प्राचीन ज्ञान और आधुनिक विज्ञान पर मंथन होगा, जिसमें देश-विदेश के वैज्ञानिक और विद्वान भाग ले रहे हैं।

मुख्यमंत्री डॉ. मोहन ने कहा कि उज्जैन को ज्ञान-विज्ञान की नगरी बनाने के प्रयास जारी हैं और विज्ञान केंद्र की स्थापना उसी दिशा में बड़ा कदम है।

उन्होंने बताया कि प्राचीन काल में वराहमिहिर और आर्यभट्ट जैसे महान वैज्ञानिकों के कारण उज्जैन का विशेष महत्व था, जिसे आधुनिक समय में फिर स्थापित करने की कोशिश की जा रही है।

मुख्यमंत्री ने कहा कि उज्जैन और डोंगला के आधार पर होने वाली खगोलीय गणनाएं बेहद सटीक हैं और डोंगला को एस्ट्रोनॉमिकल स्टडी सेंटर के रूप में विकसित किया जा रहा है।

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