उत्तर प्रदेश के प्रयागराज में अतरसुईया सब्जी मंडी के पास जलेबी की मशहूर दुकान चलाने वाले अमन ने गैस की किल्लत के बीच एक अनोखा देसी जुगाड़ निकाला है। उन्होंने जले हुए पुराने मोबिल, ब्लोअर, तेल की खाली बोतल, पुरानी कोल्ड ड्रिंक की बोतल और लोहे की पाइप को जोड़कर एक चूल्हा तैयार किया है, जो बिना गैस के भी शानदार तरीके से जल रहा है। इस चूल्हे की मदद से अमन रोजाना सैकड़ों ग्राहकों को गर्मागर्म, ताजा जलेबियां परोस रहे हैं।

गैस की कमी के कारण उनकी दुकान 2 दिन तक बंद रही थी। यह दुकान उनके पिता ने शुरू की थी और यहां की जलेबी पूरे इलाके में मशहूर है। कमर्शियल गैस सिलेंडर की किल्लत से उनका कारोबार प्रभावित हुआ, लेकिन परिवार की आजीविका इसी पर निर्भर होने के कारण उन्होंने सस्ता और कारगर विकल्प तलाशा। अब दुकान फिर से पहले जैसी रफ्तार में चल रही है।

यह अनोखा चूल्हा करीब ढाई हजार रुपए में तैयार किया गया है। सुबह 6 बजे से 11 बजे तक दुकान पर ग्राहकों की भारी भीड़ रहती है। इस चूल्हे में रोजाना लगभग 5 लीटर डीजल और जला हुआ मोबिल इस्तेमाल होता है, जिससे काम आसानी से चल रहा है। अमन का कहना है कि गैस सिलेंडर महंगा पड़ता है, जबकि यह जुगाड़ वेस्ट मटेरियल से चलने के कारण काफी सस्ता है।

लोग न सिर्फ जलेबी का स्वाद ले रहे हैं, बल्कि इस देसी चूल्हे को देखकर हैरान भी हो रहे हैं। कई दुकानदार उनसे जानकारी ले रहे हैं, ताकि वे भी गैस की महंगाई से बच सकें। यह जुगाड़ न केवल उनके व्यवसाय को बचाने में मददगार साबित हुआ है, बल्कि लोकल इनोवेशन की एक अच्छी मिसाल भी बन गया है।

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