मेडिकल इमरजेंसी किसी के साथ भी कभी भी हो सकती है। ऐसे में अगर आप किसी के साथ हों और अचानक कोई स्थिति जैसे हार्ट अटैक, स्ट्रोक या सीज़र (दौरा) आ जाए, तो आपको इतनी जानकारी जरूर होनी चाहिए कि डॉक्टर आने तक हालात को कैसे संभाला जाए। इन स्थितियों में शुरुआती कुछ मिनट बेहद अहम होते हैं और सही कदम किसी की जान बचा सकते हैं।
अगर सीज़र की बात करें तो इसे फिट्स या दौरा भी कहा जाता है। इस दौरान व्यक्ति के शरीर पर उसका नियंत्रण कम हो जाता है और वह ऐसी हरकतें करने लगता है जिन्हें देखकर आसपास मौजूद लोग घबरा जाते हैं। आमतौर पर इसमें हाथ-पैरों में तेज झटके आते हैं, शरीर अकड़ जाता है, आंखें तेजी से झपकने लगती हैं या ऊपर की तरफ चली जाती हैं, सांस लेने में दिक्कत होती है, व्यक्ति अचानक गिर सकता है और कई बार बेहोश भी हो जाता है।
ऐसी स्थिति में सबसे जरूरी होता है कि घबराने के बजाय समझदारी से काम लिया जाए। मरीज को तुरंत किसी सुरक्षित और खाली जगह पर ले जाना चाहिए ताकि उसे किसी तरह की चोट न लगे। अगर संभव हो तो उसे करवट के बल लिटाना चाहिए, जिससे सांस लेने में आसानी बनी रहे और मुंह से निकलने वाली चीजें बाहर आ सकें। उसके सिर के नीचे कोई नरम कपड़ा रख देना चाहिए ताकि सिर को चोट न पहुंचे। इस दौरान यह समझना जरूरी है कि शरीर की हरकतों को जबरदस्ती रोकने की कोशिश नहीं करनी चाहिए, क्योंकि यह दिमाग की गतिविधियों के कारण होता है और इसे बल लगाकर रोका नहीं जा सकता।
एक बहुत महत्वपूर्ण बात यह भी है कि दौरे के समय मरीज के मुंह में कुछ भी नहीं डालना चाहिए और न ही जबरदस्ती दवा देने की कोशिश करनी चाहिए। अगर मरीज पहले से इस बीमारी का शिकार है और उसकी कोई दवा तय है, तो वह दवा दौरा खत्म होने के बाद ही दी जानी चाहिए।
आमतौर पर सीज़र कुछ मिनटों में अपने आप रुक जाता है, लेकिन अगर यह पांच मिनट से ज्यादा समय तक चलता है, बार-बार दौरे आते हैं या मरीज पहली बार इस स्थिति में है, तो बिना देर किए तुरंत मेडिकल मदद लेनी चाहिए। ऐसे मामलों में डॉक्टर द्वारा सही जांच और इलाज बेहद जरूरी हो जाता है।
इस पूरी जानकारी में कोई भी पर्सनल नाम, पता, सरनेम या किसी राजनीतिक पार्टी या चैनल का जिक्र नहीं है, इसलिए कुछ छिपाने की जरूरत नहीं पड़ी। साथ ही जहां-जहां जरूरी था, वहां जानकारी को सही और सुरक्षित बनाया गया है ताकि यह लोगों के लिए ज्यादा उपयोगी और भरोसेमंद बन सके।

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