दिल्ली के पूर्व मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल और वरिष्ठ नेता मनीष सिसोदिया ने दिल्ली हाईकोर्ट के मुख्य न्यायाधीश द्वारा सीबीआई की उत्पाद शुल्क नीति मामले की याचिका को न्यायमूर्ति स्वर्ण कांत श. की पीठ से किसी अन्य न्यायाधीश को स्थानांतरित करने से इनकार करने के फैसले के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट में याचिका दायर की है।

दोनों नेताओं ने 11 मार्च को मुख्य न्यायाधीश देवेंद्र कुमार उ. को एक आवेदन देकर सुनवाई की निष्पक्षता को लेकर गंभीर आशंका जताई थी। हालांकि मुख्य न्यायाधीश ने यह आवेदन खारिज करते हुए कहा कि मामला अदालत की तय कार्यसूची के अनुसार सूचीबद्ध है और इसे दूसरी पीठ को देने का कोई प्रशासनिक आधार नहीं है।

सीबीआई की याचिका, जो सोमवार को न्यायमूर्ति श. की अदालत में सूचीबद्ध है, उस फैसले को चुनौती देती है जिसमें निचली अदालत ने 27 फरवरी को केजरीवाल, सिसोदिया और 21 अन्य आरोपियों को बरी कर दिया था। यह मामला शराब लाइसेंसधारियों को कथित तौर पर फायदा पहुंचाने से जुड़े घोटाले से संबंधित बताया जा रहा है।

मीडिया रिपोर्टों के अनुसार, 2021 की दिल्ली उत्पाद शुल्क नीति (अब रद्द) का उद्देश्य शराब बिक्री को निजी क्षेत्र के माध्यम से बढ़ाकर सरकारी राजस्व में इजाफा करना था। हालांकि बाद में इस नीति पर अनियमितताओं, रिश्वतखोरी और सरकारी खजाने को नुकसान पहुंचाने के आरोप लगे, जिसके बाद उपराज्यपाल के आदेश पर सीबीआई और ईडी ने जांच शुरू की।

निचली अदालत ने सीबीआई की कुछ जांच टिप्पणियों पर सवाल उठाते हुए सभी आरोपियों को बरी कर दिया था। इसके बाद हाईकोर्ट में सुनवाई के दौरान न्यायमूर्ति श. ने 9 मार्च को सभी 23 प्रतिवादियों को नोटिस जारी किया, साथ ही सीबीआई के जांच अधिकारी के खिलाफ विभागीय कार्रवाई पर रोक लगा दी और निचली अदालत की कुछ टिप्पणियों में प्रथम दृष्टया त्रुटियां बताई। इसके साथ ही संबंधित पीएमएलए कार्यवाही को भी फिलहाल स्थगित कर दिया गया।

इस घटनाक्रम के बाद एक राजनीतिक दल ने अदालत की निष्पक्षता को लेकर सवाल उठाए। पार्टी की ओर से कहा गया कि 9 मार्च को निचली अदालत की टिप्पणियों पर बिना उनका पक्ष सुने रोक लगाने का आदेश दिया गया।

सुप्रीम कोर्ट में दाखिल याचिका में मामले की निष्पक्ष सुनवाई सुनिश्चित करने के लिए इसे मुख्य न्यायाधीश की अध्यक्षता वाली पीठ के सामने जल्द सूचीबद्ध करने की मांग की गई है। इस पूरे घटनाक्रम ने हाई-प्रोफाइल भ्रष्टाचार मामले की सुनवाई से पहले न्यायिक प्रक्रिया को लेकर नई बहस छेड़ दी है।



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