इंदौर की मशहूर सराफा चौपाटी पर अब गैस किल्लत का असर दिखने लगा है। अपनी चटपटी और पारंपरिक व्यंजनों के लिए देशभर में पहचान रखने वाली इस चौपाटी में कमर्शियल गैस की कमी के कारण कई स्टालों पर पकवान कम बनने लगे हैं। हालात ऐसे हैं कि यहां दही बड़े तो शान से बिक रहे हैं क्योंकि उन्हें बनाने में गैस की जरूरत नहीं पड़ती, लेकिन गराडू और भुट्टे के किस जैसे व्यंजनों की गरमाहट कम हो गई है, क्योंकि इन्हें तैयार करने के लिए लगातार आंच की जरूरत होती है।

गुरुवार को सराफा चौपाटी में आम दिनों की तुलना में भीड़ कुछ कम नजर आई। ग्राहकों के मन में यह आशंका है कि गैस संकट के कारण उन्हें गरमा-गरम व्यंजन शायद मिल पाएं, हालांकि पर्यटकों की मौजूदगी बनी रही। एक दुकानदार धर्मेंद्र Y. ने बताया कि फिलहाल उनके पास दो-तीन दिनों का गैस स्टॉक बचा है, लेकिन अगर जल्द सप्लाई सामान्य नहीं हुई तो स्टाल लगाने में दिक्कत हो सकती है। चूंकि सराफा में ज्यादातर दुकानें अस्थायी होती हैं, इसलिए दुकानदार बिजली के चूल्हे या इंडक्शन का इस्तेमाल भी नहीं कर पा रहे हैं, क्योंकि इसके लिए अलग से बिजली कनेक्शन की जरूरत होगी।

सराफा चौपाटी व्यापारी एसोसिएशन के अध्यक्ष राम G. का कहना है कि यह चौपाटी शहर की शान है और इसे गैस संकट के कारण बंद नहीं किया जा सकता। उन्होंने बताया कि व्यापारियों ने विकल्प के तौर पर इंडक्शन अपनाने पर विचार शुरू कर दिया है। एक कमर्शियल सिलेंडर आमतौर पर चार-पांच दिन चलता है, इसलिए फिलहाल हफ्ते भर तक काम चल सकता है। इस स्थिति से निपटने के लिए चौपाटी के व्यापारी जल्द ही बैठक करने वाले हैं।

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