जवाबदेही
शहर को सुंदर बनाने की कवायद अगर लोगों की जान पर बन आए तो उस पर सवाल उठना तय है। इंदौर के व्यस्त फुटीकोठी चौराहे पर बने ब्रिज पर हाल ही में किए गए सौंदर्यीकरण ने भी कुछ ऐसे ही सवाल खड़े कर दिए हैं। ब्रिज की बॉर्डर पर दोनों ओर बड़े-बड़े प्लास्टिक के गमले रख दिए गए हैं। देखने में यह सजावट भले आकर्षक लगती हो, लेकिन जमीनी हकीकत यह है कि यह व्यवस्था कभी भी किसी बड़े हादसे की वजह बन सकती है।
सबसे चिंताजनक बात यह है कि इन गमलों को ब्रिज की बॉर्डर पर खुले तौर पर रख दिया गया है। इन्हें इस तरह सुरक्षित या फिक्स नहीं किया गया है कि वे किसी भी हालत में अपनी जगह से हिल न सकें। ऐसे में यह सवाल उठना लाजिमी है कि क्या सौंदर्यीकरण के नाम पर सुरक्षा को पूरी तरह नजरअंदाज कर दिया गया?
शहर में वैसे ही असामाजिक तत्वों की कमी नहीं है। देर रात कई इलाकों में खड़ी गाड़ियों के कांच फोड़ने, वाहनों को नुकसान पहुंचाने और तोड़फोड़ की घटनाएं अक्सर सामने आती रहती हैं। ऐसे माहौल में ब्रिज की ऊंचाई पर रखे ये बड़े गमले मानो शरारती तत्वों को एक नया हथियार थमा देने जैसा है।
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कल्पना कीजिए, अगर किसी ने मजाक या शरारत में इनमें से किसी गमले को धक्का दे दिया तो क्या होगा? ब्रिज के नीचे से हर समय दोपहिया, चारपहिया वाहन और कई बार पैदल लोग भी गुजरते हैं। ऊपर से गिरने वाला भारी गमला किसी वाहन चालक या राहगीर के लिए जानलेवा साबित हो सकता है। एक छोटी सी लापरवाही किसी परिवार के लिए जिंदगी भर का दुख बन सकती है।
ब्रिज कोई पार्क या गार्डन नहीं होता, जहां सजावट के नाम पर इस तरह के सामान खुले में रख दिए जाएं। ब्रिज पर लगातार तेज रफ्तार से वाहन गुजरते हैं। वाहनों की गति से पैदा होने वाला कंपन, तेज हवा या हल्का धक्का भी इन गमलों को असंतुलित कर सकता है। यदि ये गमले नीचे गिरते हैं तो न केवल दुर्घटना होगी, बल्कि ट्रैफिक भी बुरी तरह प्रभावित हो सकता है।
यह समझ से परे है कि इतने व्यस्त चौराहे पर इस तरह का निर्णय कैसे ले लिया गया। क्या नगर निगम या संबंधित विभाग ने इस व्यवस्था को लागू करने से पहले ट्रैफिक पुलिस या सुरक्षा विशेषज्ञों से कोई सलाह ली थी? क्या यह जांचा गया कि ब्रिज पर इस तरह के भारी गमले रखना सुरक्षित है या नहीं? शहर में पहले भी कई बार अव्यवस्थित निर्माण और लापरवाही के कारण दुर्घटनाएं हो चुकी हैं। इसके बावजूद यदि सौंदर्यीकरण के नाम पर ऐसी व्यवस्था की जाए जो खुद ही खतरा बन जाए, तो यह प्रशासनिक संवेदनशीलता पर भी सवाल खड़े करता है।
फुटीकोठी चौराहा शहर के सबसे व्यस्त ट्रैफिक पॉइंट्स में से एक है। दिनभर यहां वाहनों का भारी दबाव रहता है। ऐसे स्थान पर इस तरह के जोखिम भरे प्रयोग करना समझदारी नहीं कहा जा सकता। शहर की सुंदरता जरूरी है, लेकिन उससे भी ज्यादा जरूरी लोगों की सुरक्षा है। जरूरत इस बात की है कि जिम्मेदार विभाग इस व्यवस्था की तुरंत समीक्षा करे। यदि गमले सुरक्षित तरीके से स्थायी रूप से फिक्स नहीं किए गए हैं तो उन्हें तुरंत हटाया जाना चाहिए या ऐसी व्यवस्था की जानी चाहिए जिससे वे किसी भी स्थिति में नीचे न गिर सकें।
शहर को सजाने के नाम पर अगर खतरे खड़े किए जाएं तो यह सौंदर्यीकरण नहीं, बल्कि लापरवाही कहलाएगी। बेहतर होगा कि जिम्मेदार अधिकारी समय रहते इस पर ध्यान दें, क्योंकि हादसे के बाद उठने वाले सवालों का जवाब देना हमेशा मुश्किल होता है।
ब्रिज पर लगानी चाहिए ऊंची जालियां
नियमों को ताक में रखकर वैसे भी सेल्फीबाजों की इस ब्रिज पर आवाजाही लगी रहती है और वह हरकत कर सकते हैं। दरअसल, जिम्मेदारों को इस ब्रिज पर जालियां लगानी चाहिए, जैसे कि रीगल ब्रिज, पटेल ब्रिज, राजकुमार ब्रिज, इसके अलावा हरसिद्धि, पलासिया सहित तमाम जगह ऊंची जालियां लगाई गई है, ताकि कोई हादसा ना, लेकिन इन गमलों को रखने को औचित्य समझ से परे है।



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