शहर में साइबर ठगों ने ‘डिजिटल अरेस्ट’ का डर दिखाकर एक बुजुर्ग दंपति से 1 करोड़ 15 लाख रुपए की ठगी कर ली। पुलिस ने अज्ञात आरोपियों के खिलाफ प्रकरण दर्ज कर जांच शुरू कर दी है।

हीरानगर थाना क्षेत्र में रहने वाले 80 वर्षीय विजय और उनकी 77 वर्षीय पत्नी सुमन को 15 नवंबर 2025 को एक वीडियो कॉल आया। कॉल करने वाले ने खुद को पुणे एटीएस मुख्यालय का अधिकारी “चंद्रभान सिंह” बताया। उसने दावा किया कि सुमन के नाम से जम्मू स्थित एक बैंक खाते में 70 लाख रुपए की संदिग्ध ट्रांजैक्शन हुई है और मामला आतंकवाद से जुड़ा है।

आरोपियों ने लगातार वीडियो कॉल कर दंपति को कथित पूछताछ के नाम पर घंटों बैठाए रखा। उन्हें धमकी दी गई कि सहयोग नहीं किया तो गिरफ्तारी होगी, संपत्ति जब्त कर ली जाएगी और बच्चों को नुकसान पहुंचाया जाएगा।

डर के माहौल में आरोपियों ने व्हाट्सऐप पर आधार कार्ड, पैन कार्ड और बैंक संबंधी दस्तावेज मंगवा लिए। इसके बाद दो बैंक खातों के नंबर देकर कहा गया कि जांच पूरी होने तक रकम “सुरक्षित ट्रांजैक्शन” के रूप में ट्रांसफर करनी होगी।

20 नवंबर 2025 को महिला ने अपने खाते से 49.70 लाख रुपए और उनके पति ने 65.30 लाख रुपए एनईएफटी के माध्यम से बताए गए खातों में ट्रांसफर कर दिए। आरोपियों ने यह भी कहा कि यदि बैंक में पूछताछ हो तो बताना कि रकम बेटियों को भेजी जा रही है।

रकम ट्रांसफर के बाद लगातार फोन कॉल और मानसिक दबाव के चलते पति की तबीयत बिगड़ गई और उन्हें अस्पताल में भर्ती कराना पड़ा।

कुछ दिन बाद महिला ने पूरी जानकारी अपने दामाद को दी। इसके बाद साइबर क्राइम ब्रांच में शिकायत की गई। जांच के बाद 27 फरवरी 2026 को हीरानगर थाने में एफआईआर दर्ज की गई।

पुलिस ने भारतीय न्याय संहिता (BNS) 2023 की धाराओं 318(4), 319(2) और 308 के तहत मामला दर्ज किया है।

महिला के अनुसार, आरोपियों ने अलग-अलग मोबाइल नंबरों से कॉल कर खुद को जांच एजेंसी का अधिकारी बताया और जम्मू में फर्जी बैंक खाते व मनी लॉन्ड्रिंग केस का डर दिखाया। दंपति ने स्पष्ट किया कि उनका जम्मू में कोई बैंक खाता नहीं है।

डीसीपी क्राइम ब्रांच ने बताया कि सीनियर सिटीजन को ‘डिजिटल अरेस्ट’ कर ठगी का मामला सामने आया है। मामले की जांच जारी है।


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