इंदौर के एक थाना क्षेत्र में टीआई की अनुपस्थिति के दौरान नाबालिग से छेड़छाड़ और गंभीर अपराध का मामला सामने आया। पीड़ित परिवार का आरोप है कि पुलिस स्टाफ ने उन्हें करीब तीन घंटे तक थाने में बैठाए रखा। बाद में जब थाना प्रभारी मौके पर पहुंचे, तो परिवार ने उन्हें पूरे घटनाक्रम की जानकारी दी। थाना प्रभारी ने स्टाफ को फटकार लगाते हुए आरोपी को हिरासत में लेने और तत्काल एफआईआर दर्ज करने के निर्देश दिए।

गौरतलब है कि हाल ही में पुलिस आयुक्त द्वारा निर्देश जारी किए गए थे कि थाना प्रभारी की अनुपस्थिति में भी ड्यूटी अधिकारी वरिष्ठ अधिकारियों को सूचना देकर तुरंत एफआईआर दर्ज करें। इसके बावजूद कई थानों में इन निर्देशों का पालन नहीं हो रहा है।

थाना पुलिस ने रविवार–सोमवार दरमियानी रात 10 वर्षीय बालिका की मां की शिकायत पर एक आरोपी के खिलाफ छेड़छाड़ सहित गंभीर धाराओं में एफआईआर दर्ज की। वहीं मंगलवार को पीड़िता को न्यायालय में धारा 164 के तहत बयान दर्ज कराने के लिए पेश किया गया।

पीड़िता की मां के अनुसार आरोपी ने करीब ढाई महीने पहले भी बच्ची के साथ गलत हरकत की थी, लेकिन सामाजिक दबाव के चलते उस समय मामले को उजागर नहीं किया गया।

पीड़िता की मां ने बताया कि वह अधिकतर समय घर पर नहीं रहती। पहली बार आरोपी ने 25 नवंबर 2025 को बच्ची को किसी बहाने से बुलाया और गोद में बैठाकर गलत हरकत की। बच्ची डरकर घर भाग आई और शाम को मां को पूरी घटना बताई। लोकलाज के कारण उन्होंने बच्ची को आरोपी से दूर रहने की समझाइश देकर मामला दबा दिया।

17 जनवरी की रात मां ने बच्ची के मोबाइल में आपत्तिजनक तस्वीरें देखीं। पूछताछ पर बच्ची ने बताया कि आरोपी ने उसे धमकाकर तस्वीरें दिखाने के लिए मजबूर किया और विरोध करने पर पिता को जान से मारने की धमकी दी। इसके बाद पूरा मामला परिवार के सामने आया।

रविवार को पीड़ित परिवार आरोपी से बात करने गया, जहां आरोपी और उसके परिजन ने गाली-गलौज करते हुए मारपीट और धमकी दी। इसके बाद परिवार बच्ची को लेकर थाने पहुंचा। थाना प्रभारी के मौजूद न रहने पर ड्यूटी पर तैनात महिला अधिकारी ने शिकायत सुनी, लेकिन परिवार को करीब तीन घंटे तक इंतजार कराया गया। देर रात थाना प्रभारी के पहुंचने पर एफआईआर दर्ज कर आरोपी को हिरासत में लिया गया।

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