पुलिस छावनी में तब्दील धार में इन दिनों अलग ही माहौल देखने को मिल रहा है। गलियों और चौबारों में खाकी वर्दी में तैनात पुलिस जवानों की लगातार गश्त है। संगीनों के साये में भोजशाला परिसर है, जहां चारों ओर बैरिकेड्स और कंटीले तार लगाए गए हैं। आसपास ड्रोन कैमरे मंडरा रहे हैं और छतों से लेकर गलियों तक कड़ी निगरानी की जा रही है। अब बसंत की बयार और इबादत की गूंज के बीच शुक्रवार को धार के संयम की परीक्षा होगी। प्रशासन की कोशिश है कि एक ही दिन नमाज और मां सरस्वती का पूजन शांतिपूर्वक संपन्न हो जाए और शहर का माहौल न बिगड़े, हालांकि यह चुनौती आसान नहीं है।
कोर्ट में लंबित मामलों और दोनों समुदायों की बढ़ती सक्रियता के चलते यह धार्मिक आयोजन शक्ति प्रदर्शन का रूप लेता नजर आ रहा है। पूजा और नमाज को शांतिपूर्ण तरीके से कराना प्रशासन के सामने सबसे बड़ी चुनौती बनी हुई है। बसंत पंचमी से पहले आए शुक्रवार को कमाल मौला मस्जिद में बड़ी संख्या में मुस्लिम समाज के लोग पहुंचे थे, जिनमें युवाओं की भागीदारी अधिक रही। वहीं मंगलवार को भोजशाला में हिंदू समाज ने भी अपनी मौजूदगी दर्ज कराई। शहर में अलग-अलग स्थानों पर भगवा यात्राएं निकाली गईं।
इतिहास गवाह है कि जब-जब शुक्रवार और बसंत पंचमी का संयोग बना है, धार की फिजाओं में तनाव बढ़ा है। आंसू गैस के गोले, पथराव और लाठीचार्ज की पुरानी घटनाओं की यादें आज भी लोगों के जहन में हैं। इसी को देखते हुए इस बार प्रशासन ने सुरक्षा का मजबूत घेरा तैयार किया है। शहर की सीमाएं सील की जा रही हैं और जमीन के साथ-साथ आसमान से भी भोजशाला व आसपास के इलाकों की निगरानी की जा रही है।
इस शक्ति प्रदर्शन के कारण एक बार फिर धार के माहौल में बेचैनी महसूस की जा रही है। सुरक्षा और आशंका के बीच हर किसी के मन में यही सवाल है कि शुक्रवार को हालात कैसे रहेंगे। आस्था की दो धाराएं एक ही दिन, एक ही स्थान पर आमने-सामने होंगी। वर्ष 2006, 2012 और 2016 की घटनाएं आज भी लोगों को सतर्क कर देती हैं। सभी की यही कामना है कि इस बार हालात न बिगड़ें।
शांति बनाए रखना प्रशासन की प्राथमिकता
शहर में शांति बनाए रखने के लिए इस बार प्रशासन ने पूरी ताकत झोंक दी है। करीब दस हजार पुलिसकर्मियों की तैनाती के साथ धार पुलिस छावनी जैसा नजर आ रहा है। भोजशाला परिसर को छह अलग-अलग सेक्टरों में बांटकर निगरानी की जा रही है। बाहर से आने वाले हर व्यक्ति की जांच के बाद ही शहर में प्रवेश दिया जा रहा है।
भोजशाला से जुड़ी भावनाएं दोनों समुदायों के लिए बेहद संवेदनशील हैं। हिंदू समाज की मांग है कि बसंत पंचमी पर सूर्योदय से सूर्यास्त तक मां सरस्वती की अखंड पूजा और हवन निर्बाध रूप से हो। वहीं मुस्लिम समाज का कहना है कि उन्हें वर्षों से शुक्रवार की नमाज अदा करने की अनुमति मिलती रही है और वे बिना किसी भय के इबादत करना चाहते हैं। समाज की ओर से सांकेतिक पूजा की बात भी कही गई है।
क्या है भोजशाला विवाद
धार स्थित भोजशाला का निर्माण 1010 से 1055 ईस्वी के बीच परमार वंश के शासक राजा भोज द्वारा कराया गया था। उनकी मृत्यु के बाद करीब 200 वर्षों तक यहां शिक्षा का कार्य चलता रहा। यहां देवी सरस्वती की प्रतिमा स्थापित थी, जिसे 1857 में एक ब्रिटिश अधिकारी इंग्लैंड ले गया था और वह प्रतिमा आज भी वहां मौजूद बताई जाती है। भोजशाला परिसर में कमाल मौला मस्जिद भी स्थित है।
भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण के अनुसार, मंगलवार को हिंदू पक्ष को पूजा-अर्चना और शुक्रवार को दोपहर 1 से 3 बजे तक मुस्लिम पक्ष को नमाज के लिए प्रवेश की अनुमति दी जाती है। बसंत पंचमी के दिन हिंदू पक्ष को पूरे दिन पूजा और हवन की अनुमति रहती है।

Post a Comment