इंदौर के एक इलाके में दूषित पानी से फैली बीमारी ने न सिर्फ लोगों की सेहत पर असर डाला है, बल्कि उनकी रोज़ी-रोटी भी संकट में डाल दी है। अब तक करीब 20 लोगों की मौत की सूचना है, जबकि सैकड़ों लोग अलग-अलग अस्पतालों में इलाजरत हैं। हालात ऐसे हो गए हैं कि लोग मजबूरी में पानी उबालकर पी रहे हैं।
डर और असुरक्षा का माहौल इस कदर है कि कुछ परिवारों ने इलाका छोड़कर अपने मूल स्थान लौटने का फैसला कर लिया है। दूषित पानी की वजह से लोगों की दिनचर्या पूरी तरह प्रभावित हुई है। इसका सबसे ज्यादा असर खाने-पीने से जुड़े छोटे कारोबारियों पर देखने को मिल रहा है।
फास्ट फूड, चाय-नाश्ता और ठेले-खोमचे लगाने वालों की दुकानें कई दिनों तक पूरी तरह बंद रहीं। कुछ दुकानदारों ने दुकानें दोबारा खोली भी हैं, लेकिन ग्राहकों की संख्या बेहद कम है। लोग बाहर का खाना खाने से परहेज कर रहे हैं, जिससे कारोबार लगभग ठप हो गया है।
लगातार दुकानें बंद रहने और ग्राहकों की कमी का सीधा असर छोटे व्यापारियों की आर्थिक स्थिति पर पड़ रहा है। कई लोग रोजमर्रा के खर्च निकालने के लिए संघर्ष कर रहे हैं। दुकानदारों का कहना है कि जब तक पानी की गुणवत्ता को लेकर लोगों का भरोसा बहाल नहीं होता, तब तक हालात सुधरने की उम्मीद कम है।

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