अमेरिका के राष्ट्रपति ने सत्ता संभालते ही ग्रीनलैंड पर कब्जे की इच्छा जताई थी। अब अमेरिका ने इस दिशा में कदम बढ़ाने शुरू कर दिए हैं। इस पर डेनमार्क ने चिंता जताते हुए बयान जारी किया है और अपनी क्षेत्रीय अखंडता के सम्मान की अपील की है।
डेनमार्क के विदेश मंत्री ने सोमवार को कहा कि अमेरिका सहित सभी देशों को डेनमार्क की क्षेत्रीय अखंडता का सम्मान करना चाहिए। यह बयान ऐसे समय सामने आया है, जब अमेरिका की ओर से ग्रीनलैंड के लिए एक विशेष प्रतिनिधि नियुक्त किए जाने की घोषणा की गई है।
ग्रीनलैंड पर पहले भी जताई जा चुकी है इच्छा
अमेरिकी राष्ट्रपति अपने दूसरे कार्यकाल की शुरुआत में ही ग्रीनलैंड को लेकर दावा कर चुके हैं। फिलहाल ग्रीनलैंड, डेनमार्क का एक अर्ध-स्वायत्त क्षेत्र है। खनिज संसाधनों से भरपूर यह इलाका रणनीतिक रूप से भी काफी अहम माना जाता है। इससे पहले अमेरिका के एक शीर्ष पदाधिकारी ने ग्रीनलैंड में स्थित अमेरिकी सैन्य ठिकाने का दौरा किया था और वहां पर्याप्त ध्यान न देने को लेकर डेनमार्क पर सवाल उठाए थे।
कुछ समय बाद यह मामला सुर्खियों से बाहर हो गया था। हालांकि अगस्त में डेनमार्क सरकार ने अमेरिकी राजनयिक को तलब कर ग्रीनलैंड में कथित गुप्त गतिविधियों को लेकर आपत्ति दर्ज कराई थी। अब हाल ही में अमेरिका ने ग्रीनलैंड के लिए एक विशेष दूत की नियुक्ति की है।
इस नियुक्ति को लेकर अमेरिकी राष्ट्रपति ने कहा कि ग्रीनलैंड अमेरिका और उसके सहयोगियों की राष्ट्रीय सुरक्षा के लिए बेहद महत्वपूर्ण है और देश के हितों को मजबूती से आगे बढ़ाया जाएगा। वहीं, नियुक्त विशेष प्रतिनिधि ने सोशल मीडिया पर ग्रीनलैंड को अमेरिका का हिस्सा बनाने की दिशा में काम करने की बात कही।
डेनमार्क का कड़ा संदेश
इस पर प्रतिक्रिया देते हुए डेनमार्क के विदेश मंत्री ने संक्षिप्त बयान में कहा कि यह नियुक्ति ग्रीनलैंड में अमेरिकी रुचि की निरंतरता को दर्शाती है, लेकिन अमेरिका सहित सभी देशों को डेनमार्क की क्षेत्रीय अखंडता का सम्मान करना चाहिए।
इससे पहले डेनमार्क की रक्षा खुफिया एजेंसी ने एक वार्षिक रिपोर्ट में कहा था कि अमेरिका अपनी आर्थिक ताकत का इस्तेमाल कर कई बार अपनी इच्छा थोपने की कोशिश करता है और मित्र व विरोधी देशों दोनों के खिलाफ सैन्य दबाव की नीति अपनाता है।

Post a Comment