यह पहली बार है जब इन दुर्लभ और आक्रामक शिकारी जानवरों की मौजूदगी इस अभयारण्य में दर्ज की गई है। इस घटना से वन अधिकारियों के साथ-साथ प्रकृति प्रेमियों में भी खासा उत्साह देखा जा रहा है।

वन विभाग के एक वरिष्ठ अधिकारी के अनुसार, जंगली कुत्ते—जिन्हें ढोल (Dholes) कहा जाता है—अपनी उत्कृष्ट शिकार क्षमता के लिए प्रसिद्ध हैं। ये बड़े शिकारी बिल्लियों की तरह अकेले नहीं, बल्कि पूरी तरह संगठित झुंड में शिकार करते हैं। इसी कारण इन्हें भारतीय जंगलों के सबसे सफल शिकारी जीवों में गिना जाता है। सामूहिक ताकत और रणनीतिक हमलों के माध्यम से ये तेंदुए या बाघ जैसे बड़े मांसाहारी जानवरों से भी शिकार छीनने में सक्षम होते हैं।

अधिकारी ने बताया कि इनका दिखाई देना अभयारण्य की बेहतर स्थिति का संकेत है। उन्होंने कहा कि इस क्षेत्र में जंगली कुत्तों का नजर आना बेहद सकारात्मक संकेत माना जा रहा है, क्योंकि यह प्रजाति यहां बहुत कम पाई जाती है। इनकी मौजूदगी यह दर्शाती है कि अभयारण्य का पर्यावरण मजबूत हो रहा है और यह शीर्ष शिकारी जीवों के लिए अनुकूल आवास बन चुका है। इससे जैव विविधता और पारिस्थितिकी तंत्र को और मजबूती मिलेगी।

वन विभाग के अनुसार, गुरुवार को दो जंगली कुत्ते देखे गए थे, जिनमें से एक की स्पष्ट तस्वीर वनकर्मियों ने कैमरे में कैद की। अब यह जानने के लिए विस्तृत सर्वे किया जाएगा कि ये दोनों किसी बड़े झुंड का हिस्सा हैं या केवल अस्थायी रूप से यहां पहुंचे हैं। साथ ही यह भी जांच की जाएगी कि क्या उन्होंने इस अभयारण्य को स्थायी निवास के रूप में अपनाया है, विशेषकर मौजूदा प्रजनन काल को ध्यान में रखते हुए।

फिलहाल वन विभाग पूरी तरह सतर्क है और कैमरा ट्रैप तथा गश्ती दलों के माध्यम से इन शिकारी जानवरों की गतिविधियों पर लगातार नजर रखी जा रही है। वरिष्ठ अधिकारियों के अनुसार, राज्य के अन्य संरक्षित जंगलों में जंगली कुत्तों की मौजूदगी दर्ज की जाती रही है, लेकिन इस क्षेत्र में इनके देखे जाने की घटनाएं अब तक बहुत कम सामने आई हैं।

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