लोकसभा में गुरुवार को उस वक्त माहौल गर्म हो गया, जब रोजगार और आजीविका से जुड़े एक नए प्रस्तावित कानून पर चर्चा के दौरान सदन में शोर-शराबा शुरू हो गया। विपक्षी सांसदों ने विरोध जताते हुए नारेबाजी की, कुछ सांसद वेल में पहुंचे और कागज भी लहराए गए।

इस दौरान कृषि मंत्री शिवराज सिंह ने सदन में सरकार का पक्ष रखा। उन्होंने रोजगार गारंटी कानून के पुराने नाम का जिक्र करते हुए कहा कि यह योजना शुरुआत में महात्मा गांधी के नाम पर नहीं थी। पहले इसका नाम कुछ और था, जिसे बाद में बदला गया। उन्होंने कहा कि नाम में बदलाव चुनावी दौर के दौरान किया गया था।

काफी हंगामे और विरोध के बीच आखिरकार भारत गारंटी फॉर रोजगार एंड आजीविका मिशन (ग्रामीण) से जुड़ा यह नया बिल लोकसभा में ध्वनिमत से पारित कर दिया गया।

विपक्ष का विरोध क्यों?

बिल के पास होने से पहले विपक्षी सांसदों ने इसके विरोध में संसद परिसर में मार्च निकाला। इस मार्च में 50 से अधिक सांसद शामिल हुए और बिल को वापस लेने की मांग की गई। उनका कहना था कि यह नया कानून मौजूदा रोजगार गारंटी व्यवस्था की जगह लेगा, इसलिए इस पर और गहन चर्चा जरूरी है।

पहले क्या हुआ था?

इससे एक दिन पहले लोकसभा में इस बिल पर करीब 14 घंटे लंबी चर्चा हुई थी। कार्यवाही देर रात करीब डेढ़ बजे तक चली। चर्चा में लगभग 98 सांसदों ने हिस्सा लिया। विपक्ष ने मांग की थी कि इस प्रस्तावित कानून को संसद की स्थायी समिति के पास भेजा जाए, ताकि हर पहलू पर विस्तार से विचार किया जा सके।

नया बिल क्यों अहम है?

यह प्रस्तावित कानून करीब 20 साल पुराने रोजगार गारंटी अधिनियम की जगह लेने वाला है। सरकार का दावा है कि इससे ग्रामीण इलाकों में रोजगार और आजीविका के अवसरों को नई दिशा मिलेगी, जबकि विपक्ष को इसके असर और ढांचे पर आपत्ति है।

फिलहाल, बिल लोकसभा से पास हो चुका है और आगे की प्रक्रिया के लिए भेज दिया गया है।

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